व्यवहारिक परिभाषा महानता की क्या है यदि यह पूछा जाए तो सामान्य उत्तर मिलेगा, जो निःस्वार्थ दूसरों की सेवा, सहायता करता हो | यह फिर कहा जाएगा कि जिन्होंने समाज के हितों के लिए कोई बलिदान दिया हो | या फिर उसे महान माना जाएगा…

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इसीलिए आंबेडकर ने जो चाहा वह लिखा और थोप दिया भारत पर | बाकी सभी दरबारी आंबेडकर के सामने सर झुकाए खड़े रहे | शायद ये लोग यह मानते हैं कि आंबेडकर के शासनकाल में ब्राहमण वर्ग गुलाम होते थे और दलितों के घरों में झाडू पोंछा लगाते थे |

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सरकार को दोष देना व्यर्थ है क्योंकि सरकार को हमने ही चुना है और हमारी पसंद वही होगी जैसे हम हैं या होना चाहते हैं

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शर्मा बताते हैं कि बच्चे की मौत के बाद उसकी मां कई दिनों तक उस मनहूस दिन को कोसती रही थीं, जब उन्होंने टेबल फैन की जगह सीलिंग फैन लगाया था

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एक फिल्म (Zu Magical Warrior) देख रहा था | यह फिल्म १९८३ में हांगकांग में बनी थी और उस समय इस फिल्म ने एक करोड़ हांगकांग डॉलर से अधिक की कमाई की थी | यह और बात है कि यह फिल्म बिलकुल बच्चों के लिए…

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अधिकांश गरीब अपने भाग्य को दोष देते हैं, सरकार और समाज को कोसते हैं और रोते-कलपते जीवन गुजारते हैं या फिर किसी नेता-बाबा का दुमछल्ला बन जाते हैं या फिर अपराध जगत में कदम रख देते है |

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धर्म और जाति के आधार पर जो भेदभाव हैं, उन्हें दूर करने में धर्म गुरु और धार्मिक ग्रन्थ पुर्णतः असफल हो चुके हैं

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पिछले कुछ वर्षों से देख रहा हूँ कि समाज घृणा व द्वेष में ऐसा डूबा कि होश ही खो बैठा | ऊपर से सोशल मिडिया ने और बर्बाद कर दिया

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रिलीजन कभी भी धर्म नहीं हो सकता, क्योंकि प्रत्येक रिलीजन में भले और बुरे लोग होते हैं | रिलिजन केवल मिश्रित समूह है भयभीत व स्वार्थी अच्छे व बुरे लोगों का |

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