राजनैतिक पार्टियाँ जनहितों को ध्यान में रखकर नेता नहीं चुनती, यह देखकर चुनती हैं कि किस नेता से जनता डरती है, किसके पास गुंडे-मवालियों की सेना अधिक है और कौन सा नेता पार्टी को अधिक से अधिक आर्थिक लाभ पहुंचाता है | फिर चाहे वह…

इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि एक सुखी भक्त भक्ति में लीन चला जा रहा है दुनियादारी से बेखबर | उसका सुख यही है कि उसे कमल का फूल वाला कच्छा भेंट कर दिया किसी ने बस वह भक्त बन गया कमल के…

प्रश्न उठता था मन में बार-बार कि लोग बुद्ध, जीसस, महावीर का नहीं, धनानन्द, लुच्चों-लफंगों का अनुसरण करते हैं…लेकिन क्यों ? बरसों तक कारण नहीं समझ में आया लेकिन जब समझ में आया, तब आश्चर्य में पड़ गया | तब पहली बार ज्ञात हुआ कि…

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अर्थात, धर्म की रक्षा करने पर ही सुरक्षित रहोगे | अब चूँकि धर्म के ठेकेदारों, धर्म रक्षकों और कट्टर धार्मिकों को ही धर्म का ज्ञान नहीं, धर्म से परिचय नहीं, इसीलिए धर्म की रक्षा करने की बजाय, सम्प्रदाय, पंथों के विचारधाराओं, मत-मान्यताओं, कर्मकांडों, तिलक-टोपी और…

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society against dharma

समाज या सम्प्रदाय हिन्दू हो, या इस्लामिक, या ईसाई, या सिख, या बौध, या जैन या वामपंथी, या दक्षिणपंथी या भाजपाई, या सपाई या बसपाई या कोंग्रेसी या आपिया या और कोई भी | अधर्म यानि अन्याय, शोषण, अत्याचार, भ्रष्टाचार, अशिष्टता, अभद्रता, दूसरों की संपत्ति…

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“ध्यान का अर्थ होता है : चुप, मौन, कोई विचार नहीं उठता, कोई विचार की तरंग नहीं उठती, झील शांत है..। यह शांत झील वर्तमान से जोड़ देती है। और जो वर्तमान से जुड़ा, वही योगी है। ध्यानी योगी है। और जो वर्तमान से जुड़…

जब भी कभी यह प्रश्न उठता है कि विवाह बंधन है या समर्पण? तो अधिकांश का उत्तर होता है बंधन है | बहुत ही कम होंगे जिन्हें लगता है कि समर्पण | लेकिन यदि समाज की दृष्टि से देखें तो विवाह केवल सामाजिक स्वीकृति है…

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आज महिलादिवस था तो विश्वभर में कई आयोजन और गोष्ठियाँ हो रहीं हैं | लोगों से पूछा जा रहा स्त्रियों की स्वतंत्रता से सम्बंधित उनके विचार | सामान्यतः एक संन्यासी होने के नाते मुझे इस विषय पर कुछ नहीं कहना चाहिए और कहना भी पड़े…

शब्दों के अर्थ और परिभाषाएं बदल चुके हैं अब | अब भक्त का अर्थ भक्ति नहीं, अंधभक्ति है | अब देशभक्ति का अर्थ देश के प्रति भक्ति नहीं, मोदी और भाजपा के प्रति भक्ति है | अब देशसेवा का मतलब देश की सेवा नहीं, पूंजीपतियों,…

इस दीवार को देखिए ! क्या आप अपने घर की दीवार इसी प्रकार रंगीन देखना पसंद करेंगे ? क्या आपके मित्र व परिचित ऐसी दीवार के पास बैठकर चर्चा करना पसंद करेंगे ? पर्सनल आईडी और फेसबुक पेज, दो अलग अलग उद्देश्यों के लिए होते…

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जितने भी वाद हैं यानि मोदीवाद, अम्बेडकरवाद, माओवाद, आतंकवाद, नक्सलवाद, हिन्दुवाद, इस्लामवाद, ब्राह्मणवाद, दलितवाद…..राष्ट्रवाद…सभी इंसान को दिमाग से पैदल कर देते हैं, सोचने समझने की शक्ति छीन लेते हैं | केवल मानवतावादी और सनातनधर्मी ही कुछ ऐसे लोग होते हैं, जो अपना विवेक नहीं खोते,…

आतंकवाद की घटना निश्चित रूप से उस सबसे जुडी़ है , जो समाज में हो रहा है। समाज बिखर रहा है। उसकी पुरानी व्यवस्था , अनुशासन, नैतिकता, धर्म सब कुछ गलत बुनियाद पर खडा़ मालूम होता है। लोगों की अंतरात्मा पर अब उसकी कोई पकड़…

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