साधू-संन्यासियों का काम है उपदेश देना, वे अपना काम ही कर रहे हैं, लेकिन यदि बाकी भी उपदेश करने लग जाएँ, तो पतन निश्चित है |

हमारा ज्ञान रटा हुआ है, न कि जिया हुआ। हमने अनुभव नहीं किया बस हमने पढ़ा या सुना और हमें ठीक लगा तो हमने उसे याद कर लिया और हमें लगा कि हमें ज्ञान हो गया लेकिन वास्तव में हमें ज्ञान नहीं हुआ बल्कि ज्ञान प्राप्त करने के मार्ग की जानकारी भर हो गई।

चुन्नुमल घुन्घुनियाँ एक बहुत ही प्रतिष्ठित व्यापारी थे | देश विदेश में उनका व्यापार फैला हुआ था | करोंड़ों का लेन देन चलता था उनका | व्यस्त इतने रहते थे कि आँख खुलते ही काम पर लग जाते और आँख बंद होने तक काम करते…

कई हज़ार वर्ष पुरानी बात है | मैं एक घने जंगल में घनघोर तपस्या कर रहा था | न किसी ने मिलना न किसी से बोलना, न खाने के चिंता न कमाने की, न कहीं जाता और न कहीं से आता… बस एक ही जगह…

कई हज़ार साल पहले की बात है | किसी राज्य में बहुत ही घमंडी राजा राज किया करता था उसका नाम था मूर्खानंद | उसका घमंड इतना था कि उन्हें स्वयं ही नहीं पता होता था कि उन्हें किस बात का घमंड है | उसने…

एक प्रकांड पंडित एक दिन एक गाँव से गुजरे |चूँकि अत्याधिक थक गये थे सो एक पेड़ के नीचे सुस्ताने के लिए बैठ गये | धीरे धीरे करके गाँव के सभी लोग इकट्ठे हो गये और उनसे उनका परिचय माँगा | जब उन्होंने अपना नाम…

कई हज़ार साल पहले की बात है | स्वामी अखंड खुराफाती महाराज ईश्वर के दर्शन करने के लिए सैंकड़ों वर्षों की घनघोर तपस्या की | लेकिन ईश्वर के दर्शन नहीं हुए | वे बहुत ही निराश हुए और तपस्या छोड़ कर एक पहाड़ी के ऊपर…