अधिकांश साधक त्राटक को मात्र ध्यान की एक विधि समझते हैं | वास्तव में त्राटक एक जीवन शैली है | आइये समझाता हूँ कि कैसे ? सोशल मिडिया आने के बाद से मानव के जीवन में बेचैनी अधिक बढ़ गयी, क्योंकि यहाँ दुनिया भर से…

मोह-माया सब मिथ्या है, जगत मिथ्या है…. आदि इत्यादि लगभग हर साधू-संत, ब्रह्मज्ञानियों से अक्सर सुनने को मिलता है | और आप देखेंगे कि इनमे से अधिकांश सारे ऐशो आराम भोग रहे होते हैं | हाँ कुछ लोग हैं जो भांगधतूरे के नशे में मस्त…

 जीवन के अंतिम पड़ाव में अंतिम घड़ी की प्रतीक्षा में बैठे लोग ही अध्यात्म में रूचि लेते हैं क्योंकि अब कुछ और करने लायक रह ही नहीं गये | नाती-पोते हो गये, गंभीरता दिखानी ज़रूरी हो गयी नहीं तो समाज क्या कहेगा… आदि इत्यादि |…

अब आदत बहुत बिगड़ गयी है या दुनिया समझ में आ गयी है | अब कोई फर्क नहीं पड़ता यदि कोई मुझ पर बहुत ही प्रेम बरसाने का दिखावा करे या बहुत मेहनती व सेवा भाव का | अब सब एक तमाशा ही लगता है…

अब आदत बहुत बिगड़ गयी है या दुनिया समझ में आ गयी है | अब कोई फर्क नहीं पड़ता यदि कोई मुझ पर बहुत ही प्रेम बरसाने का दिखावा करे या बहुत मेहनती व सेवा भाव का | अब सब एक तमाशा ही लगता है…

कल रात मेरे कमरे में एक गहन मीटिंग बैठी जिसमें फरार पंडित की तनखा के ऊपर चर्चा चली | हमारे रसोइया जो कि पंडा भी हैं और पंडित जी की गैरहाजिरी में पूजा पाठ वही देखता है….. तो पंडित के ना आने पर उसकी तनखा…

कल रात मेरे कमरे में एक गहन मीटिंग बैठी जिसमें फरार पंडित की तनखा के ऊपर चर्चा चली | हमारे रसोइया जो कि पंडा भी हैं और पंडित जी की गैरहाजिरी में पूजा पाठ वही देखता है….. तो पंडित के ना आने पर उसकी तनखा…

सुविचार: “मूढ़-अज्ञानी मनुष्य निन्दा सुनकर दुःखी और स्तुति सुनकर सुखी हुआ करते हैं, सात्विक पुरुष निन्दा सुनकर सावधान और स्तुति सुनकर लज्जित होते हैं, पर जीवनमुक्त का अन्तःकरण तो इन दोनों भावों से शून्य रहता है; क्योंकि उसकी दृष्टि में एक सच्चिदानन्दघन परमात्मा के अतिरिक्त…

सुविचार: “मूढ़-अज्ञानी मनुष्य निन्दा सुनकर दुःखी और स्तुति सुनकर सुखी हुआ करते हैं, सात्विक पुरुष निन्दा सुनकर सावधान और स्तुति सुनकर लज्जित होते हैं, पर जीवनमुक्त का अन्तःकरण तो इन दोनों भावों से शून्य रहता है; क्योंकि उसकी दृष्टि में एक सच्चिदानन्दघन परमात्मा के अतिरिक्त…

मै अब आध्यात्म मे उतरना चाहता हुँ विद्यार्थी जीवन से ही.. मुझे क्या करनी चाहिए .. अब मुझे लगता है कि मै आध्यात्म (स्वयं) मे जाऊँ , झाँकु, पुछूँ , जानुँ और महसुस करुँ… मुझे तरीका बताएँ? कैसे करुँ ध्यान? उपाय बताईए मुझे.. मुझे इधर…

मै अब आध्यात्म मे उतरना चाहता हुँ विद्यार्थी जीवन से ही.. मुझे क्या करनी चाहिए .. अब मुझे लगता है कि मै आध्यात्म (स्वयं) मे जाऊँ , झाँकु, पुछूँ , जानुँ और महसुस करुँ… मुझे तरीका बताएँ? कैसे करुँ ध्यान? उपाय बताईए मुझे.. मुझे इधर…

आजकल देख रहा हूँ कि लोग ज्योतिष का कुछ आवश्यकता से अधिक ही मजाक उड़ाने लगे हैं | और उसका कारण भी है क्योंकि ज्योतिष केवल गणित नहीं आध्यात्म भी है | और वर्तमान ज्योतिष उसे आध्यात्म की जगह सामान्य गणित की तरह सीख व…