दैत्य, दानव, पिशाच आदि उन्हें कहा जाता है, जिनके पास असीम शक्तियाँ होती हैं | अर्थात सत्ता और पुलिस जिनके सामने नतमस्तक रहती है

पढ़े-लिखों ने जितनी क्षति सृष्टि को पहुंचाई है विकास के नाम पर, उतनी किसी भी जीव जंतु या आदिवासियों ने नहीं पहुँचाई |

रिलीजन कभी भी धर्म नहीं हो सकता, क्योंकि प्रत्येक रिलीजन में भले और बुरे लोग होते हैं | रिलिजन केवल मिश्रित समूह है भयभीत व स्वार्थी अच्छे व बुरे लोगों का |

मैं राम या किसी भी मंदिर, मस्जिद का विरोधी नहीं हूँ । मैं तो चाहता हूँ कि मंदिरों का निर्माण, भीड़-भाड़, शोर-शराबों से दूर एकांत व निर्जन स्थानोँ पर हो, ताकि उनकी गरिमा बनी रहे

सदैव स्मरण रखें: यदि सारे हिन्दू मुसलमान हो जाएँ या सारे मुसलमान हिन्दू हो जाएँ, तब भी धर्म खतरे में नहीं पड़ेगा | धर्म खतरे में पड़ता है जब कोई धार्मिक व्यक्ति अधार्मिक हो जाए | अर्थात जब कोई धार्मिक व्यक्ति धर्मांतरण कर अधर्म को…

साम्प्रदायिकों की भीड़ सबसे बड़ी दिखाई देगी जब भी कहीं कोई मंदिर-मस्जिद का खेल चल रहा हो, जब भी कहीं कोई धार्मिक दिखावा व ढोंग का कार्यक्रम चल रहा हो

आइये आज मैं ऐसे शब्दों के आधुनिक अर्थ व परिभाषाएं बताता हूँ, जो भारतीय जनमानस के हृदय में बसता है, जिनके बिना भारतीय समाज का आस्तित्व नहीं

क्या आप किसी ऐसे धर्म या सम्प्रदाय का सहयोग करते हैं जो अपने सम्प्रदाय के लोगों को अत्याचार, शोषण व भुखमरी से बचाता हो ?

मुझे आज भी दिल्ली के अंडे के पराठें अवश्य याद आते हैं | सर्दियों के दिनों में ये पराठें मेरी पहली पसंद हुआ करती थी | लेकिन आज मैं इन परांठों के विषय में सोच भी नहीं सकता क्योंकि तब मेरा भगवा कलंकित हो जाएगा

पत्थरों की प्रतिमाओं को भोग लगाने या उनपर लाखों लुटाने की बजाये, ईश्वर की अनुपम रचना यानि जीती जगती प्रतिमाओं पर भी कुछ धन लुटाओ, उन्हें भी कुछ भोग लगाओ, उनके जीवन को थोडा तो सरल बनाओ ?

मेरे एक पोस्ट पर दो महत्वपूर्ण कमेंट्स आये थे जिनका उत्तर मैं विस्तार से देना चाहता था…पहले पोस्ट पढ़ लीजिये, फिर वे दो महत्वूर्ण कमेंट्स और फिर मेरा उत्तर…. कोई मुस्लिम मारा जाए भीड़ द्वारा तो मुस्लिम समाज चिंतित हो जाएगा लेकिन कोई मुस्लिम भूख…