अर्थात, धर्म की रक्षा करने पर ही सुरक्षित रहोगे | अब चूँकि धर्म के ठेकेदारों, धर्म रक्षकों और कट्टर धार्मिकों को ही धर्म का ज्ञान नहीं, धर्म से परिचय नहीं, इसीलिए धर्म की रक्षा करने की बजाय, सम्प्रदाय, पंथों के विचारधाराओं, मत-मान्यताओं, कर्मकांडों, तिलक-टोपी और…

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अपने इतिहास के सर्वोच्च नायकों के साथ हमने कैसा व्यवहार किया है उसकी एक बानगी देखिये! 🙌 झांसी के अंतिम संघर्ष में महारानी लक्ष्मीबाई की पीठ पर बंधा उनका बेटा दामोदर राव (असली नाम आनंद राव) सबको याद है. रानी की चिता जल जाने के…

मेरी व्यक्तिगत धारणा है कि समाज जिसे न्याय समझता है वह न्याय नहीं है | धर्म और न्याय दोनों के ही वास्तविक परिभाषाओं को तिरोहित करके समाज ने नई ही परिभाषाएं गढ़ ली हैं इनकी | उदाहरण के लिए सम्प्रदायों, परम्पराओं, मान्यताओं को धर्म कहा…

मैं यहाँ आपको भुत-प्रेत वशीकरण या उनके चमत्कारिक किस्से कहानियाँ नहीं सुनाने जा रहा | इन सबके लिए तो ढेर सारी पुस्तकें हैं, धार्मिक ग्रन्थ हैं, हदीसें हैं, पुराण हैं…..

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डिग्रियाँ प्राप्त कर लेने मात्र से कोई शिक्षित नहीं हो जाता, शिक्षित होने के लिए गुरु की आवश्यकता होती है | और गुरु का डिग्रीधारी होना अनिवार्य नहीं होता, क्योंकि जीवन की शिक्षा डिग्रियों से नहीं, अनुभवों से प्राप्त होती है |

किसी की नजर में मुफ्तखोर तो किसी की नजर में हरामखोर तो किसी की नजर में समाज और देश पर बोझ होते हैं संन्यासी

संन्यासी का मुख्य कर्म होता है स्वयं को जागृत करना और उसके पश्चात समाज को जागृत करना | यदि सभी संन्यासी रामदेव या श्री श्री रविशंकर की तरह व्यवसायी बन जाएँ, या नौकरी करने लगें या खेती करने लगें, तो वे अपने मूल कर्म से…

नघालॉह डॉर ने ग्रामीण मार्केटिंग की एक ऐसी तकनीक ईजाद की है जहां लोगों को अपना सामान बेचने के लिए बिचौलिए की जरूरत नहीं है. दुकान पर सेल्समैन रखने या कहें कि खुद बैठने की जरूरत नहीं है और फायदा पूरा है. यहां जो समय बचता है उसे दुकान के मालिक खेतों में ही बिताना पसंद करते हैं.

स्वयं की उपेक्षा मत कीजिए::: स्वयं ही स्वयं का आदर कीजिए ::::दूसरों के साथ भी प्रेमपूर्ण बर्ताव कीजिए

आदिवासी यौन कुंठित नहीं होते, पशु-पक्षी यौन कुंठित नहीं होते, यहाँ तक कि कीट पतंगे भी यौन कुंठित नहीं होते, केवल नैतिकता, सभ्यता, धार्मिकता की दुहाई देने वाला सभ्य कहलाने वाला समाज ही यौन कुंठित होता है | और यौन कुंठित समाज अप्राकृतिक यौन संबंधों का कारक है

भाग्य

मैं ऐसे लोगों से दूरी बना लेता हूँ जो केवल दूसरों की बुराई करने में ही अपना जीवन नष्ट करते हैं | मैं ऐसे लोगों से भी दूरी बना लेता हूँ, जो दिन रात अभावों, आर्थिक तंगी का रोना लिए बैठे रहते हैं | क्योंकि ऐसे लोग अपने ही भाग्य के दुश्मन होते हैं और ऐसे लोगों की संगत, आपके अपने भाग्य को प्रभावित करती है

“गुरू जी एक बात बताइये ?क्या उस स्थान का शुद्धिकरण करना उचित है, जहाँ हाल ही में कोई परिवार रह कर गया हो ? विशुद्ध चैतन्य जी, अगर उचित है तो फिर अगर में नेता हु तो मुझे भी शुद्धिकरण कराना चाहिए ? हाँ स्थान…