सिवाय किताबी धार्मिकों व धर्मगुरुओं के सभी दार्शनिक व अध्यात्मिक गुरु यही कहते हैं, कि “स्वयं को जानो”, “स्वयं को समझो”, “स्वयं के विवेकानुसार निर्णय लो” | लेकिन कम ही लोग दुनिया में ऐसे होते हैं जो स्वयं की सुनते हैं | जानने समझने की…

संन्यास की अवधारणा पश्चिम में विकसित नहीं हो पायी, क्योंकि संन्यास को समझने के लिए जिस उच्च मानसिक स्थिति की आवश्यकता होती है, जिस मुक्तता व स्वतंत्रता के भाव की आवश्यकता होती है, वह विकसित नहीं हो पायी थी पश्चिम में तब तक | लेकिन…

अधिकांश गरीब अपने भाग्य को दोष देते हैं, सरकार और समाज को कोसते हैं और रोते-कलपते जीवन गुजारते हैं या फिर किसी नेता-बाबा का दुमछल्ला बन जाते हैं या फिर अपराध जगत में कदम रख देते है |

मैं राम या किसी भी मंदिर, मस्जिद का विरोधी नहीं हूँ । मैं तो चाहता हूँ कि मंदिरों का निर्माण, भीड़-भाड़, शोर-शराबों से दूर एकांत व निर्जन स्थानोँ पर हो, ताकि उनकी गरिमा बनी रहे

Definition of Humanity

किसी को लगता है कि उसका मजहब ही मानवता सिखाता है और बाकी सभी मजहब पशुता या दानवता सिखाते हैं | किन्तु परिभाषा किसी को नहीं पता |

संन्यासी का मुख्य कर्म होता है स्वयं को जागृत करना और उसके पश्चात समाज को जागृत करना | यदि सभी संन्यासी रामदेव या श्री श्री रविशंकर की तरह व्यवसायी बन जाएँ, या नौकरी करने लगें या खेती करने लगें, तो वे अपने मूल कर्म से…

बीबीसी न्यूज़ की एक हेडिंग; चीन की ऐसी ‘जेल’ जहां बंद हैं दस लाख मुसलमान? पर नजर पड़ी तो सहसा ही स्क्रोल करते-करते ठहर गया. पूरा लेख पढकर और कुछ खोजबीन की तो और भी कई लेख मिले इसी विषय से सम्बंधित | उन्हें भी…

त्यागी, बैरागी, करोड़पति, अरबपति साधू-संतों की तरह धन, स्त्री, ऐश्वर्य, भौतिक सुखों को अछूत नहीं मानता हूँ मैं | न ही त्यागी बैरागी साधू-संतों की तरह धन को हाथ नहीं लगाता स्वयं अपितु उसके लिय सेक्रेटरी, या सेवक रखता हूँ |

इनका व्यापार इतना व्यापक है कि नेता तक खरीदे बेचे जाते हैं, वोट खरीदे बेचे जाते हैं | ये व्यापारी अपने ही देश के व्यपारियो को बर्बाद करके विदेशी व्यापारियों को लाभ पहुंचाते हैं ताकि मुनाफा अधिक मिले |

आदिवासी यौन कुंठित नहीं होते, पशु-पक्षी यौन कुंठित नहीं होते, यहाँ तक कि कीट पतंगे भी यौन कुंठित नहीं होते, केवल नैतिकता, सभ्यता, धार्मिकता की दुहाई देने वाला सभ्य कहलाने वाला समाज ही यौन कुंठित होता है | और यौन कुंठित समाज अप्राकृतिक यौन संबंधों का कारक है

मुझे क्षमा करें, मुझसे बिलकुल भी अपेक्षा न रखें कि मैं इन नेताओं, अधिकारीयों, धर्म व जाति के ठेकेदारों या कूपमंडूक धार्मिकों सभ्य लोगों की तरह भला व सदाचारी, परोपकारी बन जाऊं

पत्थरों की प्रतिमाओं को भोग लगाने या उनपर लाखों लुटाने की बजाये, ईश्वर की अनुपम रचना यानि जीती जगती प्रतिमाओं पर भी कुछ धन लुटाओ, उन्हें भी कुछ भोग लगाओ, उनके जीवन को थोडा तो सरल बनाओ ?