ईसाई और इस्लामिक समाज में पुनर्जन्म की अवधारणा नहीं है | उनके हिसाब से इन्सान का केवल एक ही जन्म होता है | लेकिन वे रूह यानि आत्मा पर विश्वास अवश्य करते हैं और मानते हैं कि इंसान की मौत के बाद रूह भटकती रहती…

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मैं कहीं जाने के लिए बस स्टॉप में खड़ा बस की प्रतीक्षा कर रहा था । काफी देर से बस नहीं आ रही थी और भीड़ बढ़ती जा रही थी । लोग बार बार सड़क में जाकर देख रहे थे कि शायद कोई बस नजर…

जब तक राम-मंदिर नहीं बन जाता, यह देश इसी प्रकार गरीबी में जियेगा क्योंकि राम जी बहुत नाराज हैं मंदिर नहीं बनने से

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Definition of Humanity

किसी को लगता है कि उसका मजहब ही मानवता सिखाता है और बाकी सभी मजहब पशुता या दानवता सिखाते हैं | किन्तु परिभाषा किसी को नहीं पता |

आइये आज मैं ऐसे शब्दों के आधुनिक अर्थ व परिभाषाएं बताता हूँ, जो भारतीय जनमानस के हृदय में बसता है, जिनके बिना भारतीय समाज का आस्तित्व नहीं

मुझे क्षमा करें, मुझसे बिलकुल भी अपेक्षा न रखें कि मैं इन नेताओं, अधिकारीयों, धर्म व जाति के ठेकेदारों या कूपमंडूक धार्मिकों सभ्य लोगों की तरह भला व सदाचारी, परोपकारी बन जाऊं

इस तस्वीर को देखकर मुझे कई हज़ार वर्ष पुरानी एक कहानी याद आ गयी और साथ ही याद आ गयी वही स्वर्ग के कपड़े पहन कर राज्य की सैर करने निकले राजा की कहानी जो बचपन में सुनी थी | स्वर्ग के कपड़े पहनकर घुमने…

प्राचीन काल में पर्दा-प्रथा नही थी भारत में | लेकिन विदेशियों के आगमन, स्त्रियों के हरण व कुत्सित मानसिकता के उत्थान के साथ पर्दा प्रथा आस्तित्व में आ गया | फिर कई जागृत आत्माओं के योगदान व बलिदानों के बाद पर्दा प्रथा से भारत को…

अक्सर आप लोगों ने पढ़े-लिखे और जमीने विद्वानों को यह कहते सुना होगा, “स्वप्न तो केवल स्वप्न होता है सत्य नहीं | स्वप्न मन की दबी हुई भावनाओं को ही दिखाता है या दिन में जो कुछ भी हम सोचते हैं, देखते हैं वही सब…

कई हज़ार वर्ष पुरानी बात है, धन्नासेठ ने अपनी कंपनी का GM नियुक्त किया चुनमुन परदेसी को | चुनमुन को हज़ारों उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेने के बाद चुना गया था | देश विदेश घूमना, महंगे महंगे कपड़े पहनना  और तीस हज़ार रूपये प्रतिकिलो के भाव…

राजा का ऐसा हृदयस्पर्शी, दिल को पिघला देने वाला भाषण सुनकर प्रजा भी फूट-फूटकर रोने लगी और राजा को पचास दिन दे दिए

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कई हज़ार वर्ष पुरानी बात है | रामराज्य नामक एक देश में बहुत अराजकता फैली हुई थी | जनता ‘मैं सुखी तो जग सुखी’ के सिद्धांत को आत्मसात कर चुकी थी और यह भाव उनके खून में भी इस तरह जड़ें जमा चुकी थी कि…