बात कई हज़ार साल पुरानी है | उन दिनों लोग इतने अशिक्षित होते थे कि अंग्रेजी लिखना तो दूर, बोलना भी नहीं जानते थे | यहाँ …Posted by विशुद्ध चैतन्य on 2 अक्टूबर 2013 5

शिक्षक, धर्मगुरुओं संत-महंतों और विद्वानों का कार्य व कर्तव्य था कि समाज व राष्ट्र के हित व समृद्धि के लिए मार्गदर्शन करते नयी पीढ़ी का | लेकिन वे अपने कर्तव्यों से भटक गए और कठपुतली बन गए राजनेताओं, अपराधियों और देश के सौदागरों के |…

? रिपोर्टर -आपका प्रकोप दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है,  क्यों ? ? मच्छर : सही शब्द इस्तेमाल कीजिये, इसे प्रकोप नहीं फलना-फूलना कहते हैं. पर तुम इंसान लोग तो दूसरों को फलते-फूलते देख ही नहीं सकते न ? आदत से मजबूर जो ठहरे. ?…

मेरा दड़बा सबसे महान का नारा लगाने वाले जब भाईचारा और सौहार्द की बातें करें तो उनका तात्पर्य केवल अपने दड़बे के लोगों की आपसी भाईचारा और सौहार्द तक ही होता है, यह और बात है कि यह एकता केवल राजनैतिक या धार्मिक रैलियों में…

 गाँव और शहर में सबसे बड़ा अंतर यह है कि शहर में मानसून का पता तब चलता है जब वैज्ञानिक बताते हैं | जबकि गाँव में तेज हवाएं और घनेकाले बादल मानसून की सुचना देते हैं | विज्ञान और प्रकृति में बस वही अंतर है…

अब कश्मीर हिंसा पर केंद्र ने नया प्लान बना लिया है। आतंक विरोधी कानून के तहत अलगाववादियों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जाएगी। इसकी मॉनिटरिंग एनएसए अजीत डोभाल करेंगे।

एक शाम रेलवे स्टेशन पर एक स्वामीजी के दर्शन हो गए। ऊँचे, गोरे और तगड़े साधु थे। चेहरा लाल। गेरुए रेशमी कपड़े पहने थे। साथ एक छोटे साइज़ का किशोर संन्यासी था। उसके हाथ में ट्रांजिस्टर था और वह गुरु को रफ़ी के गाने के…

कई हज़ार साल पुरानी बात है एक महान देश के महान सम्राट का महान दरबार लगा हुआ था | पूरे देश के महान लोग वहाँ मंत्रणा कर रहे थे | विषय बहुत ही गंभीर था, एक मौलवी ने एक हिन्दू लड़की का बलात्कार करके उसका…

भारतीयों की जो संस्कृति है यानि गुंडागर्दी, छिछोरे बयान बाजी करने वालों को ही सम्मान और वोट मिलता है, उसी के अनुरूप चला जाए

जो मेरे पोस्ट पढ़ते हैं उनमें से अधिकाँश चुनमुन परदेसी से तो परिचित ही होंगे, क्योंकि इनकी कई बड़े बड़े कारनामे आपने मेरे पोस्ट में पढ़े होंगे | चुनमुन परदेसी जब विलायत से लौट कर आये विलायती डिग्री लेकर, तो कोई नौकरी इन्हें जमी ही…