सिवाय किताबी धार्मिकों व धर्मगुरुओं के सभी दार्शनिक व अध्यात्मिक गुरु यही कहते हैं, कि “स्वयं को जानो”, “स्वयं को समझो”, “स्वयं के विवेकानुसार निर्णय लो” | लेकिन कम ही लोग दुनिया में ऐसे होते हैं जो स्वयं की सुनते हैं | जानने समझने की…

संन्यास की अवधारणा पश्चिम में विकसित नहीं हो पायी, क्योंकि संन्यास को समझने के लिए जिस उच्च मानसिक स्थिति की आवश्यकता होती है, जिस मुक्तता व स्वतंत्रता के भाव की आवश्यकता होती है, वह विकसित नहीं हो पायी थी पश्चिम में तब तक | लेकिन…

बड़े गर्व से कहते सुनता हूँ लोगों से, “हम तो फलाने के भक्त हैं…..हम तो फलाने के अनुयायी हैं….!” लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आप वास्तव में भक्त या अनुयायी हैं भी या नहीं ?? चलिए मान लेते हैं कि आप किसी नेता…

अधिकांश गरीब अपने भाग्य को दोष देते हैं, सरकार और समाज को कोसते हैं और रोते-कलपते जीवन गुजारते हैं या फिर किसी नेता-बाबा का दुमछल्ला बन जाते हैं या फिर अपराध जगत में कदम रख देते है |

सभी मत-मान्यताओं, कर्मकांडों, रहन-सहन, ईष्टों और आराध्यों से मिलकर जो धर्म बना वही हिन्दू धर्म कहलाया और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड जिन नियमों और धर्मों को अपनाकर सहजता से आपसी समन्वय बनाये हुए हैं, उसे हम सनातन के नाम से जानते हैं |

Beauty of nature

स्वार्थी लोगों की जेब से पैसे ऐंठने के लिए मंदिर से बेहतर कोई और उपाय शायद नहीं दिखता इन धर्मों के ठेकेदारों को

सनातनी या धर्म निरपेक्ष होने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि साम्प्रदायिकता को यहाँ स्वीकार नहीं किया जायेगा | जो भी साम्प्रदायिकता फैलाएगा, उसके विरुद्ध आवश्यक कदम उठाये जायेंगे

डिग्रियाँ प्राप्त कर लेने मात्र से कोई शिक्षित नहीं हो जाता, शिक्षित होने के लिए गुरु की आवश्यकता होती है | और गुरु का डिग्रीधारी होना अनिवार्य नहीं होता, क्योंकि जीवन की शिक्षा डिग्रियों से नहीं, अनुभवों से प्राप्त होती है |

किसी की नजर में मुफ्तखोर तो किसी की नजर में हरामखोर तो किसी की नजर में समाज और देश पर बोझ होते हैं संन्यासी

यदि आपकी मान्यताओं व धारणाओं के विरुद्ध कोई हो, तब उसके विचार या व्यक्तित्व कितने ही अच्छे क्यों न हों, कितने ही कल्याणकारी क्यों न हों, आपको प्रभावित नहीं कर पाएंगे

ये नेता तो अपने ही सम्प्रदायों के शोषितों पीड़ितों की कोई सहायता नहीं कर पाते तो राष्ट्र की चिंता भला कहाँ से कर पाएंगे ?

सनातनी होने का आनन्द तो अब आ रहा है जब देखता हूँ कि शाकाहारी समाज, माँसाहारी समाज, हिन्दू समाज, मुस्लिम समाज, संघी समाज, मुसंघी समाज, मोदीवादी समाज, अम्बेडकरवादी समाज, गोडसे उपासक, मोदी उपासक, अम्बेडकर उपासक, साकार उपासक, निराकार उपासक….है भगवान अनगिनत समाज हैं दुनिया में…