पहले अपने समाज को बदलिए… नेताओं, पार्टियों को बदलने से कुछ नहीं होने वाला…

रुसी राष्ट्रपति ब्लादिमीरपुतिन जिसने अपने राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाया

अक्सर लोग प्रश्न करते हैं…. और आश्चर्य तो तब होता है जब मेरे जैसे अनपढ़ से प्रश्न करते हैं कि भाजपा भी चोर है, कांग्रेस तो थी ही चोर, केजरीवाल भी चोर है… अब किसी पर विश्वास ही नहीं है और कोई विकल्प भी नहीं दिख रहा क्योंकि सभी राजनैतिक पार्टियाँ एक जैसी ही हैं और नेता सभी मिले हुए ही होते हैं | तो आपके पास कोई विकल्प है जो इस देश को अपराधियों और भ्रष्टाचारियों से मुक्त करवाकर एक स्वस्थ राष्ट्र बनाया जा सके ? क्या कोई ऐसा नेता है आपकी नजर में, जो केवल राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्ध रहे न कि विदेशों में हवा-हवाई बना घूमता रहे ?

मैं जानता हूँ कि यह प्रश्न लगभग हर संवेदनशील भारतीय के मन में उठता ही रहता है और आये दिन कोई न कोई ऐसा प्रश्न उठाता ही रहता है | हाँ उनकी बात मैं नहीं कर रहा जो कूपमंडूक हैं, जो अंग्रेजों की निक्कर में घुमते हुए भी राष्ट्रभक्त कहलाते हैं और वह भी बिना कोई स्वतंत्रता संग्राम लड़े | अंग्रेजों को एक पत्थर भी न मार सके लेकिन निहत्थे गांधी को गोली मार कर भी गौरवान्वित होते हैं | मैं उनकी भी बात नहीं कर रहा जो भगवा डाले घूमते रहे, दान और भीख में जिन्दा रहे लेकिन न राष्ट्र के नागरिकों को सही मार्ग दिखाया और न ही देश में छुआ-छूत, जात-पात को मिटाने में कोई योगदान दिया | उलटे लोगों को मूर्ख बनाकर मंदिरों में खजाना जमा करवाते रहे या अपने एयरकंडिशंड आश्रमों में रंगरलियाँ मनाते रहे | मैं उनकी भी बात नहीं कर रहा जो खुद को अल्पसंख्यक बता कर रोनी सूरत बनाये आज तक पड़े हुए हैं, लेकिन खुद को आत्मनिर्भर करने का कोई उपाय नहीं खोज पाए |

मैं किसी हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, सवर्ण, दलित, आदिवासी की बात भी नही कर रहा…. मैं केवल भारतीयों की बात कर रहा हूँ | क्योंकि एक भारतीय ही यह समझ सकता है कि नेताओं और धर्मों के ठेकेदारों ने ही बेडा गर्क किया हुआ है | एक इन्सान ही यह समझ समझ सकता है कि हम अपने ही देश को बिना विदेशी सहयोग के भी समृद्ध कर सकते हैं यदि हमें एक भी न बिकने वाला नेता मिल जाए | लेकिन भरोसा किया जाये तो किसपर…? हैं तो सभी एक ही थैली के चट्टे-बट्टे |

तो जो भी ऐसा प्रश्न उठा रहे हैं, उन्हें सबसे पहले तो यह सोचना चाहिए कि क्या हमारा समाज स्वयं भ्रष्टाचार से मुक्त है ? क्या हम स्वयं इतने साहसी हैं कि जघन्य अपराधों में लिप्त नेताओं का बहिष्कार कर सकें ? क्या हम अपनी कायरता से मुक्त हो पाएंगे कभी ?

जब हम मुक्त नहीं हो सकते, तो फिर हमारे ही बीच से निकला इसी संस्कारों में पला बढ़ा बच्चा कल जब नेता बनेगा, तब आप उससे ईमानदारी, निष्पक्षता की आशा कैसे रख सकते हैं | हमारा ही समाज विदेशियों के गुणगान करने वाली औलादें देश को सौंपती है और फिर नेताओं को कोसती है ? क्या यह सही है ? हमारा समाज धर्म के नाम पर, जाति के नाम पर घटिया से घटिया नेता को वोट दे देती है, एक दूसरे को नीचा दिखाने में उलझी रहती है…. तो क्या निष्पक्ष नेता हम खोज पाएंगे कभी ?

नेता समाज का चेहरा होता है और जैसा समाज होगा उसका नेता भी वैसा ही होगा | यदि नेता धर्म और जाति के नाम पर अराजकता फैला रहा है, तो उसे मत कोसिये, अपने समाज को कोसिये जिसने उसे नफरत भरी परवरिश दी | समाज को समझना है तो सोशल मीडिया पर बैठे लोगों के विचारों को पढ़े… पता चलेगा कि ये कल के पैदा हुए छोकरे जिनको अभी ढंग
से चलना भी नहीं आया… यहाँ माँ बहन की गालियाँ देते फिर रहे हैं | ये हैं हमारे भविष्य के नेता | हम इतना कायर हो चुके हैं कि हम इनका ही बहिष्कार नहीं कर पाते और वह भी सोशल मीडिया में…. तो बाहर क्या ख़ाक करेंगे ?

फिर आ जाते हैं बहुत बड़े दार्शनिक और विद्वान की शक्ल बनाकर विकल्प की बात करने… .आसमान से उतारें विकल्प या विदेश से इम्पोर्ट करें विकल्प ? हमारी तो शिक्षा पद्धति तक विदेशी है तो हम राष्ट्रभक्त नेता कहाँ से लेकर आयें ? ये अंग्रेजी नस्ल की औलादें बड़े होकर यदि नेता बन भी गये तो क्या करेंगे ? खेतों को मिटाकर मॉल बनायेंगे, डिजिटल सिटी बनायेंगे, विदेशियों को बुलायेंगे… देश का पैसा विदेशों में दफन करवाएंगे…. .

फिर यह भी सोचिये कि जो नेता करोड़ों रूपये प्रचार करने में खर्च करता हो, गुंडे-मवालियों कि फ़ौज पालता हो… वह अपने उन मालिकों के लिए मेहनत करेगा जिसने उसे जिताने के लिए दिल खोलकर खर्च किया, या उस जनता के लिए जिसने केवल उसे वोट दिया है और वह भी दुनिया भर के झूठे वादे करने के बाद ? वह बिका हुआ नेता जनता के लिए, राष्ट्र के लिए कैसे कुछ सोच सकता है या कर सकता है ? और क्या यह सम्भव है वर्तमान परिस्थिति में कि कोई निर्धन चुनाव जीत जाए वह भी बिना गुंडागर्दी किये या झूठ बोले ? क्या आप ऐसे किसी नेता को जिता पायेंगे ? शायद नहीं…क्योंकि आज जीतने के लिए एक नेता के पास इतना पैसा तो होना ही चाहिए कि वह मीडिया खरीद सके |

तो पहले अपने समाज को बदलिए… नेताओं, पार्टियों को बदलने से कुछ नहीं होने वाला… ये लोग हमें ही आपस में लड़वाते रहेंगे, धर्म जाति और ऊँच नीच के नाम पर और खुद बैठकर मलाई खाते रहेंगे | ~विशुद्ध चैतन्य

नोट: यह तस्वीर राष्ट्रपति पुतिन की है और यह वह राष्ट्रपति है, जिसने बिखरे सोवियत रूस को न केवल आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि राष्ट्र को आर्थिक सामरिक रूप से सशक्त बनाया | और वह भी बिना अमेरिका के सामने झुके |

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आपां नहीं तो कुण! आज नहीं तो कद!