अध्यात्मिक गुरुओं को खोजिये मत, क्योंकि वे खोजने से नहीं मिलते

यह एक भ्रान्ति ही है कि आध्यात्मिक जगत की यात्रा के लिए किसी को गुरु बनाना आवश्यक है | यह हमेशा ध्यान रखें कि गुरु बनाये नहीं जाते, बन जाते हैं । बनाये गए गुरु और तनखा या फीस देकर पाले गए शिक्षक या ट्यूटर में कोई अंतर नहीं होता । बनाये गये जितने भी सम्बन्ध होते हैं, वे सभी केवल समझौते होते हैं और लाभ हानि पर आधारित होते हैं |

फिर गुरु बनाने का अर्थ होता है कि आप गुरु से अधिक बुद्धिमान हैं और पहचान सकते हैं कि कोई गुरु बनने योग्य है या नहीं | आप जब गुरु चुनते हैं, तब आप अपनी वर्तमान मनः स्थिति व सराउंडिंग के आधार पर ही चुनते हैं | ऐसे चुने गये गुरुओं से आप कोई हुनर सीख सकते हैं, कोई कला सीख सकते हैं, कोई अन्य विद्या सीख सकते हैं, लेकिन अध्यात्म नहीं | ऐसे अध्यात्मिक गुरुओं से आप शास्त्रों का अध्ययन सीख सकते हैं, कर्मकाण्ड सीख सकते हैं, पूजा पाठ की विधि सीख सकते हैं, ध्यान-साधना सीख सकते हैं और किसी अच्छे आध्यात्मिक संस्थान के अध्यक्ष भी बन सकते हैं, आप अपनी योग्यता के दम पर शंकराचार्य भी बन सकते हैं… लेकिन अध्यात्मिक ज्ञान नहीं प्राप्त कर सकते और न ही अध्यात्मिक यात्रा ही कर सकते हैं… शंकराचार्य स्वरूपानंद जी जैसे धर्मगुरु इस सत्य के प्रमाणिक उदाहरण हैं | जैसे वे कहीं नहीं पहुँचे, वैसे ही आप भी कहीं नहीं पहुँचेंगे चाहे सारी दुनिया ही आपकी जय जयकार क्यों न कर रही हो | चाहे सारा कुबेर का खजाना ही ऐसे गुरुओं को प्राप्त हो जाए, लेकिन वे अध्यात्मिक गुरु तो क्या, अध्यात्मिक भी कहलाने योग्य नहीं होते |

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इसलिए अध्यात्मिक गुरुओं को खोजिये मत, क्योंकि वे खोजने से नहीं मिलते | आध्यात्मिक गुरुओं से भेंट करने के लिए आध्यत्मिक यात्रा शुरू करनी पड़ेगी, क्योंकि वे उसी मार्ग पर मिलेंगे | भौतिक मानसिकता के साथ, भौतिकता में लिप्त लोगों को आध्यात्मिक गुरु खोजना भी नहीं चाहिए क्योंकि वे अपने गुरुओं को भी अपने इशारों पर नचाना चाहेंगे | और जो अध्यात्मिक गुरु दूसरों को खुश करने में लगा रहता है, दूसरों के इशारों पर नाचता है, दूसरों को बर्बाद करने के सपने संजोता है, वह अध्यात्मिक गुरु हो ही नहीं सकता | यह और बात है कि दुनिया ऐसे ही गुरुओं को महत्व देती है क्योंकि दुनिया अपनी ही मानसिकता के गुरुओं को ही नमन करती है | क्योंकि दुनिया आगे बढ़ना नहीं चाहती, क्योंकि दुनिया भेड़चाल से मुक्त होना नहीं चाहती, क्योंकि दुनिया आध्यात्मिक रूप से उन्नत होना नहीं चाहती |

अध्यात्मिक गुरुओं से कुछ भी आप तभी प्राप्त कर सकते हैं जब सम्पूर्ण समर्पण का भाव हो, जब पूरी निष्ठा हो | अध्यात्मिक गुरु कभी भी गुंडों-मवालियों की सेनायें नहीं बनाएगा, उदाहरण हैं गौतम बुद्ध, साईं बाबा, ओशो….. ये अध्यात्मिक गुरु थे उनके लिए, जो अध्यात्मिक यात्रा पर निकले, बाकियों के लिए इनको समझ पाना असंभव ही रहा | ~विशुद्ध चैतन्य

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