सनातन धर्म समझिये अनपढ़ से >भाग-१

जैसा कि मैंने कहा था कि मैं आज से राजनैतिक पोस्ट नहीं डालूँगा और न ही कोई धार्मिक पोस्ट डालूँगा | केवल सनातन धर्म पर ही चर्चा करूँगा तो यह पोस्ट लिख रहा हूँ | वैसे तो सनातन के विषय में हिन्दू धर्म ग्रंथों से भी बहुत कुछ ले सकते हैं हम, लेकिन रहने देते हैं | काहे को झगडा मोल लें हिन्दू संगठनों से ? वे कहेंगे कि हमारी दुकानदारी खराब कर रहे हो… अभी वे पुस्तकें उनके राजनैतिक व आर्थिक उद्देश्यों को पूरा कर रहीं है, इसलिए वे नहीं चाहेंगे कि मैं उनमें से कुछ लेकर यह कहूँ कि यह सनातन धर्म है | तो बेहतर है उन पुस्तकों को हम भूल ही जाएँ और हिन्दुओं के ही नाम रहने दें |

फिर सनातनियों को हिन्दू, मुस्लिम, आदि की पुस्तकों से क्या काम ? हमारे लिए तो सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड ही उपस्थित है शिक्षक के रूप में | हम तो जहाँ भी नजर डालें हमें शिक्षक, गुरु मार्गदर्शक मिल जाते हैं | जैसे कछुए से हमें सीख मिलती है मौन, धैर्य व हमेशा ध्यानमग्न रहना | कौए से हम सीखते हैं, हमेशा सतर्क रहना….. तो इस प्रकार हमे किसी भी पुस्तक की आवश्यकता ही नहीं है | वैसे भी सनातन धर्म किसी पुस्तक में सीमित हो ही नहीं सकता | सनातन धर्म को आप कहीं बाँध नहीं सकते क्योंकि वह तो जीवन है | आप चलते फिरते हर समय प्रार्थना में रत रह सकते हो… जैसे राह चलते किसी गरीब को रिक्शा खींचते देखा और आपने सहयोग कर दिया उसे थोड़ी दूर तक धक्का देकर | जैसे राह चलते किसी अंधे को रास्ता पार करवा दिया…. बस हो गयी आपकी प्रार्थना ! यही तो प्रार्थना है, साधना है सनातन धर्म की !

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है न कितना सहज हमारा सनातन धर्म ?

कोई नौटंकी करने की आवश्यकता नहीं है | कोई विरोध या निषेध नहीं है बस इस बात का ध्यान रहना चाहिए कि आपके कारण कोई कष्ट में न पड़े, आपके कारण किसी को कोई असुविधा न हो, आपके द्वारा किसी का शोषण न हो, आप किसी पर अत्याचार न करें और न ही किसी को यह आधिकार दें कि वह आपका दुरूपयोग करे या आप पर अत्याचार करे |

सनातन विद्या के अंतर्गत निम्न प्रकार की विद्याएँ आती हैं:

१- व्यवहारिक विद्या; वह शिक्षा जो आपके जीवन में हमेशा हर समय काम आये उसे ही व्यावहारिक शिक्षा कहते हैं | जैसे कृषि-विज्ञान, गृह-विज्ञान, बागबानी, ड्राइविंग, स्विमिंग, खेल-कूद…. आदि |

२- अध्यात्मिक विद्या: वह शिक्षा जो आपके स्वयं के अध्ययन में सहयोगी हो | जो आपको स्वयं से परिचय करवाता हो | जैसे; ध्यान यानि मैडिटेशन, योग, मार्शल-आर्ट्स आदि |

३- बौद्धिक विद्या: वह ज्ञान जिसमें बुद्धि का महत्व अधिक होता है उसे बौद्धिक शिक्षा कहते हैं | जैसे; भूगोल, विज्ञान, गणित, साहित्य, कला आदि |

४- कंठस्थी शिक्षा: यह वह शिक्षा है जिसका सनातन धर्म में कोई स्थान नहीं है, लेकिन बाकी सभी धर्मों में बहुत महत्व दिया जाता है | इसके अंतर्गत केवल रटना होता है तोते की तरह और मार्क्स लाने होते हैं | इसमें व्यावहारिक ज्ञान का कोई महत्व नहीं होता, केवल डिग्री या डिप्लोमा ही महत्व रखत है | यहाँ सभी कुछ निर्भर करता है नंबरों पर इसलिए आप नंबर कैसे भी लेकर आयें बस नंबर अधिक होने चाहिए | फिर आप रिश्वत देकर नंबर बढ़वायें, फर्रे चलाकर, नकल करके, सिफारिश से… जो भी अपनाएं सब जायज है | चाहे आपको लिखना न भी आता हो, लेकिन आपके पास ऑक्सफ़ोर्ड की डिग्री है तो आपकी जय जय |

तो सनातन धर्म में इस शिक्षा का कभी महत्व नहीं रहा | आज भी कोई चिड़िया उड़ना न सीखे तो फिर उसको आप ऑक्सफ़ोर्ड का गोल्ड मेडल भी दे दो कि दुनिया की सबसे तेज उड़ने वाली चिड़िया है, चिड़ियों के समाज में उसकी कोई अहमियत नहीं होगी | क्योंकि सनातन धर्म किताबों कागजों पर आधारित धर्म नहीं
है |

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तो आज यह पहला पाठ था सनातन पर | आशा है आप लोगों को पसंद आया होगा | हाँ यह बात हमेशा ध्यान रखिये कि सनातन धर्म मानने का धर्म नहीं जानने, समझने और खोज करते रहने का धर्म है | इसलिए मेरी बातों को मानिए मत, स्वयं खोज कीजिये, समझिये और तब लाइक का बटन दबाइए जब समझ में आ जाये | और जब समझ में आ जाये तब आपसे अनुरोध है कि अपने बच्चों के स्कूल से एक निवेदन अवश्य कीजिये कि वे अपने स्कूल में सनातन धर्म की शिक्षा यानि कृषि विज्ञान, गृह विज्ञान, योग व ध्यान, और मार्शल आर्ट्स (आत्म-रक्षा व युद्ध कौशल) अवश्य शुरू करवाएं | आप देखियेगा कि जिस दिन बच्चे सनातन धर्म की शिक्षा लेना शुरू कर देंगे, उसी दिन से उनके जीवन में ही नहीं, आप सभी के जीवन में परिवर्तन आना शुरू हो जायेगा | ~विशुद्ध चैतन्य

नोट: सनातन धर्म की कोई आधिकारिक पुस्तक नहीं है अतः यदि मेरे विचार किसी पुस्तक से नाम मेल खाती हो तो मुझसे लड़ने के लिए न आयें | बल्कि मेरा पेज विशुद्धब्लॉग में जाकर गाली दे आयें |

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