मेरा मानना है कि शक्ति दो हैं और दोनों ही समान रूप से प्रभावी हैं

विद्वान मानते हैं कि शक्ति एक ही जिसे हम ब्रम्ह कहते हैं | लेकिन मेरी अनपढ़ बुद्धि कहती है कि शक्ति मूलतः दो हैं | बिद्वान कहते है कि परमाणु मूल शक्ति है और एक ही है, लेकिन परमाणु भी केवल नाम ही है दो शक्तियों का इलेक्ट्रोन और न्युट्रोन का ऐसा मैं मानता हूँ | हो सकता है मैं गलत भी होऊं क्योंकि अनपढ़ हूँ |

आज सोच रहा था कि अपनी अनपढ़ बुद्धि से शक्ति पर कोई पोस्ट लिखी जाय | यह तो जानता हूँ कि पढ़े-लिखे व विद्वान लोग मुझसे असहमत होंगे ही, लेकिन क्या फर्क पड़ता है | कौन सा मुझे मार्क्स लाने हैं या डिग्री या डिप्लोमा लेना है ?

मेरा मानना है कि शक्ति दो हैं और दोनों ही समान रूप से प्रभावी हैं | दोनों ही शक्तियाँ एक दूसरे की पूरक हैं और कोई भी एक शक्ति दूसरे के बिना निष्क्रिय, अप्रभावी रहती है | विद्वान् कहते है कि शक्ति के कई रूप हैं, लेकिन शक्ति तो एक ही है | लेकिन मेरा मानना है कि शक्ति दो ही हैं और संयुक्त रूप में हैं इसलिए उसे एक मान लेते हैं |

अर्धनारीश्वर की बात करें तो वह मुझे अधिक सार्थक लगता है | स्त्री और पुरुष दो शक्तियाँ हैं जिन्हें हम अर्धनारीश्वर के रूप में जानते हैं | इन दो शक्तियों का संगम ही सृजन है, संचालन व विनाश के कारक हैं जिन्हें ऋषियों ने ब्रम्हा, विष्णु व महेश नाम दिया | यदि हम शुन्य की भी बात करें, तो भी आकाश फिर भी है अर्थात शुन्य को भी आकाश की आवश्यकता है | बिना आकाश के शून्य भी नहीं है | हम कितने ही सूक्ष्म रूप में चले जाएँ, रहेंगे दो शक्ति ही |

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विद्वान कहते हैं कि सूर्य एक शक्ति है, जबकि मैं मानता हूँ कि सूर्य शक्तियों का समूह है | उस पर एक साथ कई शक्तियाँ काम कर रहीं है, इसलिए वह प्रकाश मान है | विद्वान कहते हैं कि प्रकाश एक शक्ति शक्ति है, लेकिन मेरा मानना है कि प्रकाश भी कई शक्तियों का समूह है | उदाहरण के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल से प्रकाश के माध्यम से सन्देश भेजा जाता है और एक ही केबल में कई सन्देश एक साथ भेजा जा सकता है… अर्थात प्रकाश भी एक शक्ति नहीं है |

तो यह उथल पुथल कई वर्षों से चल रही थी मेरे मन में, कि शक्ति को एक कहा जाता है और मुझे दो ही दिखती हैं, तो क्या केवल इसलिए कि मैं अनपढ़ हूँ ?

इस तस्वीर में माँ काली के क्रोध को शांत करने के लिए शिव के पुरुष रूप को सामने आना पड़ा | स्त्री शक्ति के वेग को पुरुष शक्ति द्वारा ही शांत किया जा सकता है | हम सामान्य जीवन में, अपने ही घरों में देखते हैं कि जब पुरुष बहुत क्रोध में हो, तब कोई स्त्री जाकर उसे शांत करे, चाहे वह माँ हो, बहन हो, पत्नी हो…… सामान्यतः पुरुष का क्रोध शांत हो ही जाता है | क्योंकि दोनों शक्तियाँ एक दूसरे की पूरक हैं और भौतिक जगत में दो रूपों में हैं जबकि अध्यात्मिक या परा जगत में संयुक्त रूप में |

यह तो थी मेरी अनपढ़ बुद्धि से शक्ति की व्याख्या…. विद्वानों, पढ़े-लिखों से निवेदन हैं कि अपने प्रकाश से मुझे अनपढ़ को भी प्रकाशित करें | ~विशुद्ध चैतन्य

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