अब लोग नेता और बाबा लीला देखना चाहते हैं आधुनिक होना चाहते हैं, तो होने दीजिये…

आज स्वप्न में किसी जंगल में भटक गया था | अचानक एक गाँव दिखाई दिया और मैं उस ओर बढ़ गया | जाकर देखा तो बहुत ही गरीब और जर्जर अवस्था में लोग पड़े हुए थे और एक टूटे-फूटे ट्रांजिस्टर को घेरे कुछ लोग बैठे हुए थे | पास गया तो कोई गीत बज रहा था, “अच्छे दिन आयेंगे…अच्छे दिन आयेंगे…”

कोई व्यक्ति मुझे वहाँ के सबसे विद्वान व्यक्ति से मिलवाने ले गया | जब मैं उनकी झोंपड़ी में पहुँचा तो देखा कि वे सम्पूर्ण रामायण की मोटी सी किताब के सामने बैठे हुए हैं और जो जोर से रामायण की चौपाई पढ़ रहे हैं |

इससे पहले कि मैं नमस्ते करता या कुछ कहता, उन्होंने मुझे देखते ही प्रश्न किया, “रामायण पढ़ी है कभी ?”

मैं अपनी स्वाभाविक आदतानुसार न में सर हिला दिया |

“हम्म…”

फिर उठे और एक और रामायण निकाली जो किसी और भाषा में थी और बोले बैठो | मैं बैठ गया वह दूसरी भाषा वाली किताब दिखाकर बोले कि यह…….. रामायण है | (अब मैं नाम भूल गया कि वह कौन सी रामायण है और उसके लेखक का नाम भी बताया था… हाँ इतना याद है कि दक्षिण भारत के किसी लेखक ने लिखी थी वह….और वह भी बहुत ही प्रसिद्ध थी उनके हिसाब से किसी जमाने में)

फिर वे बोले, “दोनों रामायण में एक बात जो बहुत ही महत्वपूर्ण है, वह यह कि ये दोनों ही यह बताती है कि जो मनुष्य धरती को, अपने खेतों को महत्व देते हैं, वे ईश्वरतुल्य हो जाते हैं | लेकिन हमारे गाँव की हालत तो देख ही ली आपने…. डिजिटल हो गया है !!! और लोग अपने अपने खेतों को बेचकर, ट्रांस्जिस्टर में गाने सुनते रहते हैं | सुबह से लेकर शाम तक उसमें एक ही गाना बजता रहता है, “अच्छे दिन आयेंगे…” अरे इतना यदि इन लोगों ने राम का नाम लिया होता मोक्ष मिल गया होता….

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मैंने कहा कि छोड़िये आप भी, आप जैसे विद्वानों को ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए… आधुनिकता का जमाना है अब | लोग भी कब तक रामलीला और कृष्ण लीला देखते रहेंगे…. बोरियत हो ही जाती है | अब लोग नेता और बाबा लीला देखना चाहते हैं आधुनिक होना चाहते हैं, तो होने दीजिये… अब कोई उन्हें रोक थोड़े ही सकता है ? फिर डिजिटल का ज़माना है, अब खेती भी फार्मविले में होती है और फसल भी डिजिटल ही होती है…. तो कोई क्यों…. ? छोड़िये जाने दीजिये… आप रामायण के बारे में कुछ बता रहे थे |

“आपको पता है सीता कौन थी ?” उन बुजुर्ग पंडित ने प्रश्न किया |

मैंने कहा, ” हाँ देवी थीं और राम की पत्नी…..”

“अरे वह सब ठीक है, जरा दिमाग लगाओ, पूरी रामायण ही कृषि और किसान के महत्व को लेकर लिखी गई है… जैसे धरती से उत्पन हुई सीता | यानि हर वह चीज जो धरती से उत्पन्न होती है वह सीता है | राम को सीता सौंपी जाती है अर्थात वह संपत्ति सौंपी गई राम को जो भूमि से उत्पन्न हुई | रावण ने संपत्ति चोरी की और राम रावण संग्राम हुआ……. अब आ जाइए वर्त्तमान में…. हमारी भू सम्पदा हमारी सीता है | हर वह व्यक्ति राम है जिसके पास भूसम्पदा है और उससे वह फसल, खनिज, तेल, जल आदि प्राप्त करता है | रावण हैं वे लोग जो बाहर से आते हैं शुभचिन्तक, नेता, बनकर यानि भेस बदलकर और लूट कर ले जाते हैं हमारी सम्पदाएँ | बस तब और अब में फर्क यह है कि तब का जमाना डिजिटल नहीं था और राम को हर हाल मैं अपनी भूसम्पदा वापस लेनी थी…. लेकिन आज लोग भूसंपदा खुद ही रावण को सौंप देते हैं और ट्रांसिस्टर में गाने सुनते हैं, “अच्छे दिन आयेंगे….”

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झटके से मेरी आँख खुली देखा कि सेवक आवाज दे रहा है कि कोई फोन पर बात करना चाहता है… मैंने कहा कि अरे अभी सोने दो बाद में फोन करने के लिए बोल दो…. और मैं फिर दोबारा सोने की कोशिश करने लगा ताकि रामायण को और गहराई से समझ सकूँ…. लेकिन फिर दोबारा नींद नहीं आयी | ~©विशुद्ध चैतन्य

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