मुझे इस बात से कोई मतलब नहीं कि क्या लिखा है या क्या नहीं

बहुत गर्व है हमको कि हमारे शास्त्रों में ऐसा लिखा है और वैसा लिखा है | लेकिन शायद मुट्ठी भर भी नहीं होंगे जिन्हें समझ में आया होगा कि लिखा क्या है |

कई लोग हैं बड़े गर्व से गालियाँ देते हैं अभद्र व्यवहार करते हैं, लूट-पाट करते हैं और कहते हैं कि हम ब्राह्मण हैं | कई लोग हैं जो रोज सुबह अपने धर्मग्रंथों से पाठ करके ही घर से बाहर निकलते हैं और लोग उन्हें बहुत ही धार्मिक मानकर सम्मान भी देते हैं | लेकिन यही धार्मिक आदमी अपने पड़ोस के किसी जरुरतमंद की सहायता करना तो दूर उस ओर देखना भी पसंद नहीं करता |

कितने लोग हैं जो रोज नमाज अदा करते हैं पाँचों वक्त का, लेकिन उन्हीं में से कुछ आतंकवादियों को धन व संरक्षण भी देते हैं |

मुझे इस बात से कोई मतलब नहीं कि क्या लिखा है या क्या नहीं, मुझे मतलब है आपके सीखने से आपके व्यवहार से | आप ब्राह्मण हैं और गाली गलौज करते हैं क्योंकि आपके पास कोई तर्क नहीं है, तो फिर आपके ब्राह्मण होने का कोई अर्थ ही नहीं रह गया | मैं तो क्या ईश्वर भी आपको ब्राह्मण नहीं मानेगा |

यदि आप रोज नामाज पढ़ें, सजदा करें लेकिन आप मानवता विरोधी तत्वों के विरुद्ध आवाज बुलंद करने से परहेज करें तो बेकार हो गया आपका नमाज, आपका सजदा | अल्लाह की नजर में तो आप गिर चुके हैं तो उनकी मेहरबानी भला होगी कैसे आप पर ?

धर्म कोई भी हो, उनका पहला सबक मानवता का ही है क्योंकि यही सनातन है और कोई भी धर्म सनातन धर्म के बिना व्यर्थ हो जाएगा | क्योंकि सनातन धर्म सृष्टि के सभी जीवा जंतु निर्विरोध रूप से अपनाते हैं और पालन करते हैं और वह भी बिना शास्त्र, गीता या कुरान पढ़े | इसलिए यह मत समझाइये कि शास्त्रों में क्या लिखा है, आप किसी के साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं उसीसे पता चल जाएगा कि आपने शास्त्रों को समझा कितना है और रटा कितना है | -विशुद्ध चैतन्य

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