धर्म की रक्षा तो करेंगे, लेकिन धर्म मिलेगा कहाँ ?


गुल्लू ढोलकिया अपने दोस्तों के साथ दिन भर आवारा गर्दी करता या गाँव के बाहर कि पुलिया में बैठे गप्पे मारता रहता अपने दोस्तों के साथ | सभी गाँव वाले परेशान थे उनसे और समझा समझा कर थक गये कि कभी स्कूल चले जाया करो या कुछ काम धंधा ही कर लो….. लेकिन उनके कानों में जूँ भी न रेंगती | लेकिन भीतर ही भीतर गुल्लू और उसके दोस्तों को यह भी अहसास होने लगा था कि गाँव में उनकी कोई इज्जत नहीं है और कोई भी अब उनसे सीधे मुँह बात करना भी पसंद नहीं करता |

एक दिन गुल्लू अपने दोस्तों से बोला कि ऐसे जिन्दगी खराब करने से अच्छा है कि सेना में भर्ती हो जाते हैं और देश की सेवा करते हैं | सभी को बात जंच गयी और वे सभी एक दिन चले गये सेना में भर्ती होने के लिए | लेकिन फिटनेस टेस्ट में ही फेल हो गये क्योंकि सभी इतने दुबले पतले थे कि राइफल उनसे अधिक सेहतमंद दिखाई पड़ रही थी | तो निराश होकर उन्हें वापस आना पड़ा |

लेकिन उन्हें यह अपमान बर्दाश्त भी नहीं हो रहा था तो सभी ने मिलकर तय किया कि हम अपनी ही सेना बनायेंगे और देश की न सही, धर्म की रक्षा करेंगे | बस फिर किया था नाम सोचा जाने लगा कि नाम क्या रखा जाये | कई नामों के सुझाव मिले लेकिन गुल्लू को पसंद आया ‘सीताराम सेना’ | एक दोस्त ने पूछा कि राम-सेना तो ठीक नाम है, श्रीकृष्ण-सेना भी ठीक है, बजरंग-सेना भी ठीक है…. यह सीताराम सेना नाम ही क्यों ? हमारी मंडली में कोई लड़की तो है ही नहीं, और हमारी तरह आवारा लड़की कहाँ से मिलेगी ? गाँव में लड़कियां आवारगर्दी करती फिरतीं नहीं है…हाँ शहर में तो फिर भी मिल सकती हैं |

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गुल्लू मुस्कुराकर बोला कि अरे यह नाम लड़की की वजह से नहीं केवल इसलिए कि यह तो सभी की जबान पर रहता है गाँव में | सभी जय सीताराम कहते ही हैं…. हमारा प्रचार मुफ्त में हो जाएगा | सारे दोस्त वाह वाह कर उठे….. तो सीताराम सेना की स्थापना हो गई | वहीँ एक पीपल के पेड़ के नीचे रखे बड़े से पत्थर को उन्होंने अपना मंच बना लिया और उसे ही अपना मुख्यालय | सबने पेड़ की डाल काटी और डंडे तैयार कर लिए और पेड़ के आसपास परेड करके अपनी सेना का कार्य शुरू किया |

लेकिन अब समस्या फिर खड़ी हुई कि धर्म की रक्षा तो करेंगे, लेकिन धर्म मिलेगा कहाँ ? गाँव के लोगों को कैसे बताएँगे कि धर्म हमारे पास है और हम उसकी रक्षा कर रहे हैं ? एक ने पूछा कि धर्म होता कैसा है अगर कुछ आइडिया दो तो मैं खोजकर ले आऊँ और यहीं पेड़ के पास रख लेते हैं और उसकी पहरे दारी करेंगे बारी बारी से | गुल्लू उनमें सबसे तेज दिमाग का था इसलिए वह उनका नेता भी था | तो सब उसकी ओर देखने लगे | काफी देर तक चिंतन-मनन करने के बाद भी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि धर्म मिलेगा कहाँ | अब कभी कोई धार्मिक ग्रन्थ तो उसने पढ़ी नहीं थी…..तो उसने कहा कि चिंता मत करो हमें केवल कहना है कि हम धर्म की रक्षा कर रहे हैं बस | और आते जाते किसी के भी लट्ठ बजा देना है…. बस ! कोई नहीं पूछने आएगा कि धर्म क्या है….और गाँव के जाहिलों ने तो आज तक धर्म कभी देखा ही नहीं तो फिर चिंता की बात ही क्या है ?

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तो उस दिन से सीताराम सेना धर्म की रक्षा करती आ रही है और आज तक कर रही है | सारा गाँव उनपर जान छिडकता है और उनकी गुंडागर्दी सहता है, क्योंकि वे मानते हैं कि यदि सीताराम सेना न होती तो धर्म नाम की चीज भी न होती | आज पूरे विश्व में जो धर्म नाम की चीज है वह सीताराम सेना की वजह से ही है…उन्होंने धर्म को इतनी हिफाजत से पीपल के पेड़ के नीचे छुपा कर रखा हुआ है कि उनके रहते, कोई धर्म को न चुरा सकता है और नहीं नष्ट कर सकता है |

बस सभी लोग दुआ कीजिये कि धर्म पीपल के पेड़ के नीचे सुरक्षित रहे कभी कोई दीमक आदि न लगे उसपर ! ~विशुद्ध चैतन्य

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