सनातनियों की पहचान

सभी सम्प्रदायों/पंथों की शान होते हैं चरमपंथी | उंनसे ही पहचान मिलती है किसी भी सम्प्रदाय को एक धर्म के रूप में | इसलिए अपने चरमपंथियों का विरोध कोई भी सम्प्रदाय तब तक नहीं करता, जब तक चरमपंथी अपनों का ही शिकार नहीं करने लगते, जैसे पाकिस्तान में हुआ था स्कूलों में |

लेकिन जब तक दूसरों के मासूम मारे जाते हैं, तब तक सभी को अपने चरमपंथी महान दिखाई देते हैं | तो इस आधार पर हम यह मान सकते हैं कि चरमपंथियों से ही कोई सम्प्रदाय धर्म के रूप में स्थापित रह सकता है और जिस दिन चरमपंथी मिट जायेंगे धर्म नाम का सम्प्रदाय भी मिट जाएगा | शायद यही कारण है कि चरमपंथी आये दिन किसी न किसी निहत्थे निर्दोष को मारकर या उनपर अत्याचार करके धर्म को स्थायित्व प्रदान करते रहते हैं | और जब ऐसा नही कर पाते तो चिल्लाने लगते हैं कि धर्म खतरे में है |

मुझसे काफी लोग जुड़े हुए थे पहले और काफी लम्बे समय से | लेकिन जब भी मैं किसी भी चरमपंथियों के उपद्रव के विरुद्ध पोस्ट डालता हूँ तो जिस भी सम्प्रदाय के विरुद्ध वह पोस्ट जाता है, वही चिल्लाता है हमारा धर्म यह नहीं सिखाता, वे लोग भटके हुए हैं….हमारी किताब पढ़िए… फलाने अध्याय, फलाने श्लोक में यह लिखा है और वह लिखा है…..

लेकिन मुझे इस बात का आश्चर्य होता है कि ये लोग कभी उनको अपनी धार्मिक किताबें क्यों नहीं पढ़ाते जिन्हें ये कहते हैं कि भटके हुए हैं ? कभी किसी ने अबुबकर, हाफ़िज़ सईद या आये दिन ज़हर उगलने वाले धर्मों के ठेकेदार या नेताओं, सांसदों, संतो-महंतों को ये धार्मिक पुस्तकें पढ़ने के लिए क्यों नहीं दीं ?

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क्यों सारे किताबों के विशेषज्ञ, कंठस्थ व रट्टामार विद्वानों को नहीं भेजते उनके पास ताकि उनको वहीँ खड़े खड़े ही किताबों के श्लोक सुना दिया करें ? मुझे ही सिखाने सुनाने क्यों चले आते हैं ?

चलिए अब तो बहुत हद तक सफाई हो ही चुकी है…और अब शांति भी है यहाँ | इससे यह सिद्ध हुआ कि ये रट्टामार लोग ही सर्वाधिक उपद्रव मचाते थे धर्म के नाम पर जबकि धर्म का किंचित मात्र भी ज्ञान नहीं होता इनको | मैं ईश्वर का धन्यवाद् करता हूँ कि मुझे विद्वान नहीं बनाया जिसके कारण मैं किताबी धर्म की बजाय सनातन धर्म को समझ पाया अनुभव कर पाया और जी पाया | नहीं तो मैं भी इनकी ही तरह चरमपंथियों को धर्मों का रक्षक मान लेता | मैं भी इन्ही की तरह यह मानकर चलता कि धर्म किताबों से निकला हुआ है | मैं भी यही मानकर चलता कि धर्म कोई ऐसी चीज है जो खतरे में पड़ जाता है या मिटा दिया जाने वाली कोई चीज है |

धर्म तो सनातन है उसे कोई कैसे मिटा सकता है ? यदि आप लोग सनातन धर्म से परिचित नहीं हैं, या कभी किसी किताब में पढ़ने को न मिला हो….(सनातन धर्म के विषय में किसी भी धार्मिक किताब में नहीं मिलेगा कुछ भी) तो मैं आपको सनातनधर्मियों की थोड़ी सी पहचान बता देता हूँ | जिससे कभी कोई सनातन धर्मी मिल जाए तो आपको पहचानने में कठिनाई न हो | क्योंकि वह किसी भी रूप में ड्रेस में रंग में तिलक या टोपी में मिल सकता है |

१- यदि कोई व्यक्ति आपको मिल जाये ऐसा जो जिन्दा हो, तब समझ लीजिये कि वह सनातनी है | फिर उसने तिलक लगाया हो, गेरुआ डाला हुआ हो,  जनेऊ पहना हुआ हो, जालीदार टोपी और कुरता पजामा पहना हो, क्रॉस लटकाया हुआ हो….. कोई फर्क नहीं पड़ता | बस शर्त यही है कि वह जिन्दा होना चाहिए |

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२- वह बेहोश न हो और हर गलत का विरोध करने की क्षमता रखता हो |

३- वह किसी से भी न डरता हो यहाँ तक कि मौत से भी यदि वह सामने किसी की जान पर बनी हो उसे जान बचाने का अवसर मिले |

४- सनातन धर्मी कभी भेदभाव नहीं कर सकता किसी से भी जाति वर्ण, पद प्
रतिष्ठा आदि के आधार पर | इसका मतलब यह नहीं कि वह भेदभाव करता ही नहीं, करता है बहुत करता है भेदभाव | लेकिन केवल नफरत फ़ैला कर दंगा करवाने वालों से, लोगों को झूठे वादे करके धोखा देने वालों से….

५- सनातन धर्मी पानी पीते हैं, भोजन भी करते हैं |

६ – वे जलचर, थलचर व नभचर तीनों ही रूपों में पाए जाते हैं |

जिनमें उपरोक्त गुण न हों, वे किसी भी धर्म के हों, पर सनातनी नहीं हो सकते |  आप लोग कहीं गलत अर्थ न निकाल लें, इसलिए बता दूँ फिर से कि यह मैंने सनातन धर्मियों की पहचान बताई है किसी सम्प्रदाय की नहीं | इसलिय आप लोग जिस भी सम्प्रदाय से हों, वे इसे अपमान न समझें क्योंकि यहाँ बात केवल सनातन यानि प्राकृतिक धर्म की हो रही है, किसी किताबी धर्म या सम्प्रदाय की बात नहीं हो रही है | ~विशुद्ध चैतन्य

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