सनातन और इस्लाम में अंतर है और वर्तमान हिंदुत्व इस्लाम की नकल है

इस्लाम एक सम्प्रदाय है जो यह मानता है कि जो साकार ईश्वर के उपासक हैं वे भटके हुए हैं, और जो काल्पनिक अनदेखे ईश्वर के उपासक हैं वही सच्चे धार्मिक हैं | इस्लाम दूसरों पर अपनी मान्यताएं थोपता है जबकि सनातन किसी पर अपनी मान्यताएं नहीं थोपता | क्योंकि सनातन कोई मान्यता भी नहीं है तो थोपेगा ही क्या ? आज जो आप हिंदुत्व के नाम पर उपद्रव देख रहे हैं या भगवाधारियों को नफरत के कारोबार में लिप्त देख रहे हैं, ये वास्तव में सनातन से अनभिज्ञ हैं और सनातनी नहीं, केवल हिन्दू ही हैं | हिन्दू भी एक सम्प्रदाय बन चुका है वैसे ही जैसे इस्लाम है, ईसाई हैं….| इनका आस्तित्व हमेशा खतरे में पड़ा रहता है, इसलिए ये लोग नफरत फैलाते हैं, हिंसा करते हैं, निर्दोषों, निहत्थों की हत्याएं करते हैं….लेकिन अपने ही सम्प्रदाय के हितों के लिए कोई कार्य नहीं करते | बहुत अधिक से अधिक दिखावे के लिए कोई ट्रस्ट बना लेते हैं, या कुछ स्कूल या धर्मशाला बना देते हैं… बस…. लेकिन इनका मुख्य उद्देश्य होता है अपने सम्प्रदाय की जनसँख्या बढ़ाना और दूसरे समाज का नामों निशान मिटाना |

लेकिन सनातन में अधर्म का अर्थ है परिस्थित, परिवेश व स्थान के आधार पर आचरण न करना | उदाहरण के लिए, आप हिमालय पर गये और आपने वहाँ जिद की बिना कपड़ों के रहना है, तो वह अधर्म हो जाएगा और तुरंत ही सजा भी मिल जायेगी कि आप बीमार हो जाएँ, जुकाम लग जाए 🙂 | दूसरा उदाहरण है सनातन धर्म में अधर्मी होने का कि आप जिद कर लें कि मैं सनातन से मुक्त होना चाहता हूँ और आज से साँस लेना बंद, पानी पीना बंद, भोजन लेना बंद….. तो सजा मिल जायेगी तुरंत ही क्योंकि सनातन धर्म में ये अनिवार्य शर्त है हर सनातनी के लिए कि वह साँस, भोजन और पानी नियमित रूप से ले |

READ  सनातन धर्म समझिये अनपढ़ से >भाग-१

फिर जैसा कि निराकार को पूजने वाले इस्लामिक कट्टरपंथी मानते हैं कि लोगों ने कर्मकांड को धर्म बना लिया… तो इस्लाम में भी जो कुछ हो रहा है, ईश्वरीय किताबों के नाम पर वह भी कर्मकांड ही तो है ! नमाज पढ़ना, दाढ़ी रखना, पैजामा, कुरता, टोपी….ये सब कर्मकांडों के ही तो अंग हैं | हज करना, पत्थर की मूर्ती पर पत्थर मारना… ये सब कर्मकांड ही तो हैं….. और जो यह सब न करे उसे काफिर माना जाता है या उन्हें सजा सुनाई जाती है |

आइसिस इस्लाम के नाम पर जो कुछ कर रहा है या समझा रहा है, वह धर्म विरुद्ध है यह तो मैं मानता हूँ, लेकिन यह इस्लाम विरुद्ध है तब मानता, जब इस्लामिक संगठनों व लोगों ने उसका पहले दिन से वैसा ही विरोध किया होता जैसे, इस्लाम विरुद्ध किसी फिल्म का किया जाता है, या ईश निंदा के नाम पर लोगों को जिन्दा जला दिया जाता है….. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और अभी भी आइसिस का विरोध उस स्तर पर नहीं पहुँचा, जिस स्तर पर फिल्मों और ईशनिन्दकों का विरोध होता है | तो कुछ लोगों के कहने मात्र से कि आइसिस इस्लाम के विरुद्ध काम कर रहा है वह माना नहीं जा सकता…. हाँ धर्म विरुद्ध कार्य कर रहा है वह मैं खुले दिल से स्वीकारता हूँ |

आपने देखा होगा कि कोई हिन्दू या सनातन धर्म के नाम पर उपद्रव करता है तो मैं बिना डरे उनका विरोध करता हूँ… क्योंकि मैं धर्म को जानता हूँ | लेकिन कम ही मुसलमान देखे हैं जो विरोध करने का साहस कर पाते हैं अपने स्तर पर |

READ  चैतन्यता की परिभाषा

सनातन धर्मी किसी पर यह दबाव नहीं बनाता कि किसको किसकी उपासना करनी चाहिए और किसकी नहीं | न ही वह किसी पर दबाव बनाता है कि किसे क्या खाना है, क्या पहनना है आदि के लिए | वह काल्पनिक ईश्वर के उपासना के विरुद्ध भी नहीं है और साकार ईश्वर जैसे माता-पिता, सूर्य, जल, वृक्ष…. आदि के
उपासना के विरुद्ध भी नहीं है | सनातन के अंतर्गत सभी मत सम्प्रदाय आ जाते हैं क्योंकि सनातन कोई सम्प्रदाय नहीं है | यहाँ सनातन के स्वरुप को सही रूप में यदि किसी ने अपनाया है तो प्राचीन ऋषि-मुनि, श्रीकृष्ण, गौतम बुद्ध, स्वामी विवेकानंद, ठाकुर दयानंद देव, ओशो और बहुत हद तक हिन्दुओं और वर्तमान ईसाई समाज ने | लेकिन आज हिन्दू फिर भटक गये और इस्लामिक अन्धानुकरण में उलझ गये | आज वे हर वह काम करने को तत्पर हैं जो इस्लाम के नाम पर होता आया | ~विशुद्ध चैतन्य

1
लेख से सम्बन्धित आपके विचार

avatar
1 Comment threads
0 Thread replies
0 Followers
 
Most reacted comment
Hottest comment thread
0 Comment authors
चन्द्रभान चिडार Recent comment authors
  Subscribe  
newest oldest most voted
Notify of
चन्द्रभान चिडार
Guest
चन्द्रभान चिडार

बहुत ही सुन्दर लेख है वास्तव मै ।