नैतिकता के ठेकेदारों में अंश मात्र भी नैतिकता नहीं होती

बचपन से मैं धर्म और नैतिकता जैसे शब्दों को समझने का प्रयास करता रहा लेकिन मुझे न तो नैतिकता समझ में आई और न ही धर्मों के ठेकेदारों द्वारा परिभाषित धर्म ही समझ में आया | जो काम एक जगह अनैतिक है, वही दूसरी जगह नैतिक हो जाता है, जो एक जगह अपराध है, वही दूसरी जगह पुण्य हो जाता है, जो एक जगह अधर्म है वही दूसरी जगह पुण्य हो जाता है |

विस्तार से….

उदाहरण के लिए एक जगह चाचा, ताया या मामा के बच्चों का आपस में विवाह अनैतिक व अधर्म है, लेकिन वही दूसरी जगह नैतिक व धर्म हो जाता है | रिश्वत लेना, गबन करना, हेरा-फेरी, घोटाले यदि कोई गरीब या साधारण व्यक्ति करता है तो अनैतिक व अधर्म है, लेकिन कोई नेता, मंत्री, जज या उच्चाधिकारी करे तो नैतिक व समाजसेवा हो जाता है | किसी अपमान का बदला लेने के लिए या अपनी इज्ज़त बचाने के लिए कोई हत्या करे तो अनैतिक हो जाता है, लेकिन धर्म व संस्कार के नाम पर हत्या करे तो पुण्य व सम्मानीय हो जाता है |

तो मैं बहुत ही उलझ गया था और मेरी उलझन कोई सुलझा भी नहीं पा रहा था | फिर मैंने दूसरों से पूछना ही बंद कर दिया और स्वयं ही चिंतन मनन करने लगा | जब उत्तर मिला तो मन हल्का हुआ और यह भी जाना कि समाज वास्तव में दोहरा चरित्र जीता है और न उसे ईश्वर से कोई भय है और नहीं धर्म से कुछ लेना देना होता है | इसी का एक उदाहरण यहाँ प्रस्तुत है:

बिहार के गया जिले के वजीरगंज में नाक के लिए एक प्रेमी जोड़े को पीट-पीटकर अधमरा किया और फिर एक ही चिता में डालकर जिंदा जला दिया गया। बताया जा रहा है कि बिरादरी की पंचायत ने प्रेमी जोड़े को जिंदा जलाने का फरमान सुनाया था।

पंचायत के फरमान सुनाने के बाद दोनों को पहले लाठियों से पीटा गया। जब दोनों बेसुध हो गए तो उन्हें एक ही चिता पर डाल कर जिंदा जला दिया गया। वारदात गया जिले के वजीरगंज थाना के अमैठा गांव की है। मारे गए युवक जयराम की ससुराल अमैठा गांव में थी। मरनेवाली लड़की (16) भी अमैठा गांव की थी। प्रेमी जोड़े को जिंदा जलाने का फरमान सुनाने वाली पंचायत में लड़की के घरवाले भी शामिल थे। जयराम की पत्नी और उसके घरवाले भी मौके पर थे, लेकिन वो कुछ नहीं कर सके।

नीचे कुछ और लिंक दे रहा हूँ जिससे आप लोग समझ सकें कि धर्म और नैतिकता के ठेकेदारों के पास ये दोनों ही चीजें नहीं होतीं और समाज चुपचाप खड़ा तमाशा देखता रहता है | बाद में पुलिस आती भी है तो खाना पूरी करके निकल जाती है | अपराधियों को पकड़ती भी है तो सजा होते होते उनकी उम्र ही गुजर चुकी होती है और यह भी नहीं पता चल पाता कि सजा हुई भी थी कि नहीं |

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