क्या यह देवी-देवताओ का सम्मान है ?


वाराणसी में गणपति विसर्जन को लेकर छिड़े विवाद पर शंकराचार्य स्वरूपनानंद जी के प्रतिनिधि व अन्य गणमान्यों का कहना है, “गणपति सड़क पर हैं तब हम मठों पर कैसे बैठ सकते हैं ?”

मैं भी इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ । इन गणमान्यों को कोई सड़कों के किनारे, चौराहों पर खड़े चन्दा बटोरते देवी देवताओं के दर्शन भी करवा दो ताकि ये उन्हें भी विसर्जित करवाकर ही अपने मठों में जाएँ । कम से इन देवी देवताओं को मुक्ति तो मिलेगी वसूली एजेंट की नौकरी से ! ~विशुद्ध चैतन्य ।

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