पैसे हैं तो पानी पियो नहीं तो दफा हो जाओ |

एक दिन चुनमुन परदेसी भटकता हुआ एक जंगल में पहुँच गया | उसे एक झरना दिखाई दिया तो पानी पीने वहाँ पहुँचा | लेकिन इससे पहले कि वह पानी पीता एक भेड़िया गुर्राता हुआ चला आया | चुनमुन दर के मारे काँपने लगा | भेड़िया बोला, “डरो मत लेकिन पानी मुफ्त का नहीं है, पानी पीने के दस रूपये, नहाने धोने के लिए पचास रूपये चुकाने होंगे |”


चुनमुन बोला, “मेरे पास तो रूपये क्या फूटी कौड़ी भी नहीं है | और फिर झरने का पानी तो सब के लिए होता है, ईश्वर ने सभी के लिए फ्री में दिया है |”

“अरे भाई अगर ऐसे ही हर कोई फ्री में पानी पीता रहा था एक दिन झरना ही सुख जायेगा | इसलिए जंगल की सरकार ने पानी के दाम तय कर दिए हैं |” भेड़िया ने उसे समझाया

“अरे ऐसे कैसे दाम फिक्स कर दिए ?” चुनमुन थोडा गुस्से में बोला

“देखो गर्मी खाने की जरूरत नहीं है | पैसे हैं तो पानी पियो वरना चलते बनो | हमारे राजा बहुत ही दयालु हैं इसलिए उन्होंने कहा है जो फ्री में पानी पीने की कोशिश करे उसे उठाकर जंगल से बाहर फेंक दो |” भेड़िया बहुत ही प्रेम से बोला |

लेकिन चुनमुन का प्यास के मारे बुरा हाल था सो वह राजा को भला बुरा कहने लगा | भेड़िया को गुस्सा आ गया कि उसके राजा के लिए कोई भला बुरा कह रहा है | वह बोला, “हमारे राजा को भला बुरा कहने से पहले जान लोग हमारे राजा के बारे में | वे शुद्ध शाकाहारी हैं और बहुत ही शरीफ भेड़ की संतान है | वे जब भी अपने महल में जाते हैं तो चौखट को प्रणाम करते हैं फिर अंदर पैर रखते हैं | वे भेड़ और भेड़ियों में कोई भेद नहीं करते……”

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“अरे भाई यह सब मुझे क्यों सुना रहे हो ? यहाँ प्यास के मारे बुरा हाल हो रखा है और आप बेमतलब की बातें किये जा रहे हो ?” चुनमुन गुस्से में बोला क्योंकि प्यास ने उसका डर बाहर निकाल दिया था |

“बोला तो… पैसे हैं तो पानी पियो नहीं तो दफा हो जाओ |”

बहुत बहस करने के बाद भी भेड़िये ने उसे पानी नहीं पीने दिया आखिर चुनमुन यह सोचता हुआ वहाँ से निकल गया कि ऐसे महान राजा से तो वह शेर ही भला था, कम से कम सभी को पानी तो पीने मिल जाता था |

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