"देखा कितना महान था वह तलवार एक की भी जान नहीं जाने दी !!!"


गुल्लू ढोलकिया को इतिहास में बहुत ही रूचि थी इसलिए वह बचपन से ड्रैगन, डायनासौर आदि के कॉमिक्स पढ़ता रहता था | जब भी कहीं इतिहास से सम्बंधित कोई बात होती वह बहुत ही ध्यान से सुना करता था | उसके घर में एक पुरानी तलवार थी उसका इतिहास भी इतनी पुरानी थी कि बहुत ही मोटा ग्रन्थ बन चुका था अब तक | क्योंकि बचपन से लेकर अब तक जो कुछ उसने सुना था उस तलवार के विषय में गाँव के बुजुर्गों से, वह सब वह लिखता आ रहा था |

गाँव में उसका बहुत ही सम्मान था विशेष कर उस चमत्कारी तलवार की वजह से जो उसके पूर्वजों के पास शुरू से रही और आज तक कोई उनके वंश से छीन नहीं पाया था | बुजुर्ग बताते थे कि यह तलवार डायनासौर के ज़माने से ही गुल्लू के पूर्वजों के पास रही है | इसी तलवार से गुल्लू के पूर्वजों ने डायनासौर से लड़ाई लड़ी थी, रामायण से लेकर महाभारत और मुगलों और अंग्रेजों से इसी तलवार से लड़ाई लड़ी गयी थी | अंग्रेजों ने जाने से पहले गुल्लू के पिताजी से बहुत जिद की थी कि यह तलवार उनको बेच दें, लेकिन गुल्लू के पिताजी ने नहीं बेचीं और घर में ही एक मंदिर बनाकर उसे स्थापित कर दिया | तब से सारा गाँव ही उस तलवार की पूजा करता था |

गुल्लू भी बचपन से अपने पिताजी की तरह ही उस तलवार की पूजा करने के बाद ही अन्न जल ग्रहण करता तभी दूकान पर निकलता था | नुक्कड़ पर ही उसकी पान की दूकान थी, जिसके सामने ही दो चारपाई पड़ी रहती थी और गाँव की सारे राजनैतिज्ञ दिन भर वहीँ बैठ कर राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं का निवारण किया करते थे ।

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एक दिन कुछ डाकुओं ने गाँव में हमला कर दिया | सभी अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे | गाँव के लोग भाग कर गुल्लू के पास आये और बोले कि अपनी ऐतिहासिक तलवार निकालो और चलो डाकुओं से मुकाबला करने | गुल्लू बोला कि आपलोग निश्चिन्त रहिये और तुरंत पुरोहित को बुलाकर यहाँ अखंड जाप करते शुरू करते हैं, इससे यह तलवार हमारी रक्षा करेगी | सारा गाँव वहीँ मंदिर में जमा हो गया और अखंड जाप शुरू हो गया | आधी रात को डाकुओं ने मंदिर को घेर लिया और उनका मुखिया मंदिर में आकर वह प्राचीन तलवार निकाल लिया और सभी को जाप जारी रखने का आदेश देकर चला गया |

रात भर अखंड जाप चला और सुबह जब लोग गाँव में गये तो पता चला कि सारा गाँव लुट चुका है, एक भी घर नहीं छोड़ा डाकुओं ने |

बुजुर्गों के मुँह से निकला, “देखा कितना महान था वह तलवार एक की भी जान नहीं जाने दी !!!” जान है तो जहान है !” -विशुद्ध चैतन्य

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