बड़ा गर्व हैं न अपने धर्मों पर ?


जरा गिरेबान पर झाँक लो एक बार पता चल जाएगा कि अपनी ही उन धार्मिक सिद्धांतों, गुरुओं के दिखाए आदर्शों के विरुद्ध हो गये हो सभी, जिनके नाम पर इतना इतरा रहे हो |

याकूब दोषी था या निर्दोष, यह तो अदालत ही जानती है | आज लोग उसके बेगुनाह होने की बात कर रहे हैं, हो सकता है बेगुनाह हो | सरबजीत भी बेगुनाह था… कितनों ने साथ दिया था सरबजीत का पकिस्तान में ? याकूब को जो लोग आज निर्दोष बता रहे हैं, वे बाईस साल से भैंस चरा रहे थे ?

ऊपर से याकूब के जनाजे में उमड़ी भीड़ क्या जताना चाहती थी कि जिसे कई तरह की अपीलों के बाद भी, आधी रात को अदालत खुलवाने के बाद भी नहीं बचा सके वह निर्दोष था ? या फिर यह जताना चाहते हैं कि वे आतंकियों के साथ हैं | इतना शोक तो उन २५७ लोगों के परिवारों के लिए भी नहीं किया होगा इस देश ने जितना याकूब के लिए कर रहा है | वे २५७ लोग किस जुर्म में मारे गये थे ? उनको तो इतनी अपील करने की मोहलत देना तो दूर, पता भी नहीं चलने दिया गया कि उनकी मौत तय कर दी गयी है | सोचा कभी किसी ने कि उनकी अंतिम इच्छा भी नहीं पूछी गयी थी |

अब रहे ये हिंदुत्व के ठेकेदार बने छिछोरे और दोगले दुमछल्ले | याकूब की मौत हुई, उनके परिवार में पहले ही मातम है, लोग वहां पहले ही दुःख और नाइंसाफी मानकर भड़के हुए हैं | ये हिंदुत्व के सड़क छाप ठेकेदार घटिया और भड़काऊ पोस्ट बना कर उनको और उकसा रहे हैं | कल उनमें से कोई फिर आतंकवादी बनेगा और उसके दोषी होंगे हम हिन्दू ही | क्योंकि हमारी छिछोरी और सड़कछाप हरकतों के कारण कोई और गलत रास्ता चुन लेगा |

READ  देश का सबसे गरीब मुख्यमंत्री

अब आइये धर्म और बताइए कि धर्म किसी को क्या इतना छिछोरा बना देता है कि मानवीयता ही मिट जाती ? क्या सीखा था अब तक स्कूलों में और धार्मिक गुरुओं से, यही छिछोरापन करना ? मैंने कई ऐसे लोगों के पोस्ट देखे जो जिनकी उम्र आधी से अधिक है, लेकिन याकूब या मुस्लिमों को लेकर उनके पोस्ट देखो तो लगता है कि ये आदमी इतनी उम्र किन मूर्खों की संगत में गुजार गया | ये आदमी ही है या केवल शक्ल आदमियों जैसी है | नौ दस साल का बच्चा इन जैसे बुजुर्गों से लाख गुना अधिक समझदार होगा | इनको तो जाकर किसी बच्चे के पैर पकड़ लेने चाहिए और उनकी सेवा करके ज्ञान प्राप्त करना चाहिए | ऐसे लोग समाज के लिए ही नहीं, राष्ट्र के लिए भी घातक हैं |

ये सजा एक राजनैतिक षड्यंत्र था यह हर किसी को समझ जाना चाहिए | उनका उद्देश्य ही था कि मुस्लिम समुदाय भड़के और जो नहीं भड़के उनको भड़काने के लिए अपने पालतू कुत्ते छोड़ दिए सोशल मिडिया में | वे उल्टियाँ करते फिर रहे हैं इधर उधर | उनको घुट्टी पिला दी गयी है कि जितना नफरत भड़काने वाली उल्टियाँ करोगे, उतने बड़े राष्ट्रभक्त और हिंदुत्व के रक्षक माने जाओगे | और ये सब करने का उद्देश्य केवल इतना ही है कि ओवैसी को जिन्ना की तरह मुस्लिमों का भगवान् बनाना है और बाकी संघी बजरंगी तो वही अपने कामों लगे ही हुए हैं | इस प्रकार फिर एक बार १९४७ दुहराया जाएगा और ओवैसी एक नये देश का प्रधानमंत्री बनेगा | वह देश भारत के ही टुकड़े से बनेगा | इसके साथ खालिस्तान बनेगा, बोडोलैंड बनेगा और न जाने कितने चीथड़े होंगे भारत के | न जाने इस दंगे में कितने निर्दोष मारे जायेंगे…..और्वैसी और संघी-बजरंगी अलग अलग दिखते जरुर हैं, लेकिन वास्तव में मिलजुल कर ही काम कर रहे हैं | उदाहरण के लिए भाजपा में एक ऐसे व्यक्ति का शामिल होना जिसे वे दाउद का आदमी कह रहे थे कल तक | बाकि और भी बहुत उदाहरण मिल जायेंगे यदि आप लोग आंख्ने खुली रखें | राजीव गाँधी के हत्यारों को माफ़ कर देना, हिन्दू आतंकवादियों के लिए नरमी बरतना…. ये सब सोची समझी रणनीति है ताकि
मुस्लिमों को यह एहसास दिलाया जा सके कि यह देश उनके लिए अब गैर हो चूका है | सोचिये जरा ठन्डे दिमाग से क्या यही है राष्ट्रभक्ति ? क्या अपने ही देश के अपने ही लोगों को दंगों की आग में झोंक देना राष्ट्रभक्ति है ? क्या यही धर्म है ?

READ  १२ जून, १८५७ को रोहिणी (देवघर) में स्वतंत्रता का प्रथम शंखनाद गूंजा

मुस्लिमों को भी चाहिए कि वे होश में रहें, हर दुर्घटना या नाइंसाफी के लिए इस देश के निर्दोष नागरिकों को सजा न दें | निर्दोषों को बम से उड़ा देने से समस्या का हल नहीं होगा | समस्या का हल होगा यदि हम इन राजनैतिक उपद्रवियों की चालों को समझें और आपसी सौहार्द बनाए रखें |

जो लोग भी राष्ट्रवादिता के नाम जहर उगल रहे हैं, भड़का रहे हैं दूसरों को, वे वास्तव में बिच्छु की वे औलादें हैं जो अपनी ही माँ का खून तब तक चूसते हैं जब तक उनकी माँ मर नहीं जाती | क्या भारत माँ को मारने की पूरी तयारी कर ली है ?

नोट: मुझे दुःख है कि मुझे इस प्रकार से लिखना पड़ा, हो सकता है कि यह लेख मुझे किसी बड़ी मुसीबत में डाल दे | लेकिन यह सब अब लिखना आवश्यक हो गया था | क्योंकि अब स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगडती ही जा रही है, जमीन में न सही पर सोशल मिडिया में तो ऐसा ही है | और यही कारण बनेगा जमीनी स्थिति बिगाड़ने के | सरकार गांधारी बन चुकी है उसे अपने लोग्नो के उपद्रव अब दिखेंगे नहीं | एक साम्प्रदायिक प्रधानमंत्री और एक साम्प्रदायिक पार्टी से हम अब अधिक आशा कर भी नहीं सकते | इनके अपने ही नेता आये दिन कोई न कोई भड़काऊ बयान दे देंगे और फिर बाद में माफ़ी भी मांग लेंगे दिखाने के लिए | दुर्भाग्य से भारत में इस समय ऐसा को और नेता दिख भी नहीं रहा जिसे हम भारतीय सिद्धांतों व आदर्शों के संरक्षक के रूप में देखें | ऐसा भी कोई नहीं दिख रहा जो राष्ट्र को धर्म और जाति के दलदल से उठाकर आपसी सौहार्द स्थापित करे और मूल समस्याओं पर ध्यान देकर राष्ट्र को समृद्धि की और ले जाए | अधिकांश नेता तो नेता कम और नौटंकी अधिक दिखते हैं | काम में ध्यान देने से अधिक सेल्फी और नौटंकी में धयान देते हैं | ~विशुद्ध चैतन्य

READ  जातिवाद मुक्त हिन्दू एकता

लेख से सम्बन्धित आपके विचार

avatar
  Subscribe  
Notify of