कोई भी पाखण्ड, शोषण, अत्याचार, अन्याय के विरुद्ध कभी रहा ही नहीं

सरकारी अस्पतालों की जो स्थिति है उससे तो हम सभी परिचित हैं, लेकिन क्या इस १०-१२ किलोमीटर लम्बी पैदल यात्रा में इन पीड़ितों को एक भी इंसान नहीं मिला जो इनकी सहायता करता ? क्या कोई हिन्दू नहीं मिला, कोई मुस्लिम नहीं मिला, कोई कांग्रेसी नहीं मिला, कोई भाजपाई नहीं मिला, कोई दंगाई नहीं मिला, कोई दलित नहीं मिला, कोई आदिवासी नहीं मिला…. यानि इतनी लम्बी यात्रा में कोई भी नहीं मिला ?

कहाँ मर गये सारे के सारे ?


अभी धर्म/जाति के नाम पर कोई उपद्रव खड़ा करना हो, तो वही दस क्या, पचास किलोमीटर लम्बी सड़क जाम हो जायेगी | अभी किसी राजनैतिक पार्टी का केम्पेन च

लाना हो तो उसी सड़क पर पैर रखने की जगह नहीं मिलेगी…. लेकिन जब ये लोग गुजर रहे थे उस सड़क से, तो एक भी इंसान नहीं मिला उस राह पर… और लोग कहते हैं कि जनसँख्या बढ़ गयी है !

वास्तविकता यह है कि कोई भी पाखण्ड, शोषण, अत्याचार, अन्याय के विरुद्ध कभी रहा ही नहीं, बस ढोंग होता है विरोध का | आप देख लें इतिहास उठाकर, जिस काम का लोग विरोध करते रहे, वही काम जब अपनों ने किया तो सबको साँप सूंघ गया, लोग अंधे, बहरे गूंगे हो गये…लेकिन जैसे ही विपक्ष से कोई खबर आती है कि शोषण हुआ अत्यचार हुआ….. बस तुरंत सबकी जबान आपस आ जाती है, अँधेरे में भी दिखाई देने लगता है, सन्नाटे में सुनाई देने लगता है….

 यह अत्यचार का विरोध, अन्य्याय का विरोध, शोषण का विरोध…. आदि सब सिवाय नौटंकी के और कुछ नहीं है… लोग अन्याय, अत्याचार शोषण का विरोध तब तक करते हैं, जब तक बल्ला उनके हाथ नहीं आ जाता | समाज नैतिकता व मानवीयता में इतना नीचे गिर चुका है कि खड़े होकर तमाशा देख लेंगे घंटों, लेकिन सब मिलकर किसी असहाय की सहायता नहीं करेंगे | और ऐसे ही समाज के गर्भ से पैदा हुआ नेता से आप आशा करते हैं कि वह जनहित के कार्य करेगा तो यह तो उस नेता के प्रति अन्याय व हिंसा ही हुआ | जो गुण माँ-बाप में ही न हों, उस समाज में ही न हो, जिसने उसे नेता चुना, तो वह भला कैसे परोपकार व भलाई का कार्य कर सकेगा ? वह तो वही करेगा जो उसने समाज में देखा, समाज से सीखा |

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किसी और के विषय में तो कुछ नहीं कह सकता, लेकिन यदि मैं भारत का प्रधानमंत्री बन गया तो रमन सरकार की तरह आँखें मूंदकर सोता रहूँगा, शिवराज सरकार की तरह खुलकर घोटाले करूँगा, मोदी जी की तरह जुमलेबाजी करूँगा… और अमेरिका से वाह-वाही लूटूँगा | ~विशुद्ध चैतन्य

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