यह शुरुआत है अर्थात स्वप्न का पहला भाग…

लोग कहते हैं कि स्वप्न का कोई अर्थ नहीं होता | लेकिन मेरे जीवन में स्वप्न ने हमेशा आने वाले खतरों के प्रति सचेत किया है | पंद्रह मई को जो स्वप्न देखा था, उसका परिणाम आज सामने आ गया |

स्वप्न का लिंक नीचे दे रहा हूँ और अर्थ इस प्रकार हैं…

1- To see a wild alligator or a crocodile in your dream foretells a new beginning or changes in your waking life. This dream can also indicate danger in some way. If you do not kill the alligator, then this dream may not be favorable, but it is rather a caution. The alligator or crocodile within your dream can also highlight your intuition, your spiritual insights, and the spiritual steps you need to take in the forthcoming future. Because of its association with religion, the alligator can mean that negative aspects signify a danger which will shortly come into your life.

2. .यदि सपने में पानी में मगरमच्छ दिखाई दें तो समझना चाहिए की आपके जीवन में कोई आपका गुप्त शत्रु आपके विरुद्ध षड़यंत्र रच रहा है जिसमें आप बुरी तरह फंस जायेंगे परन्तु वह शत्रु सुरक्षित रहेगा। यह धर्म के मार्ग पर आपकी कठिन परीक्षा का भी संकेत है।

मेरी अपनी व्याख्या: स्वप्न की यदि व्याख्या किया जाए तो यह मगर हो है वह हम दोनों भाइयों पर हमला नहीं करता, बल्कि हमसे तो उसको कोई मतलब ही नहीं था…. वह स्त्री अर्थात लक्ष्मी अर्थ मान सम्मान को चोट पहुँचाना चाहता था | जिसे हमें बाद में बांध दिया अर्थात वह अपने प्रयास में असफल हुआ |

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रोहिणी नक्षत्र और मकर लग्न की जो बात कही गयी है वह इसी पखवाड़े शुरू हो जायेगी | इसी समय आश्रम में उत्सव भी है जिसमें आश्रम से सम्बंधित सभी लोग जुड़े होंगे | और वही समय रहेगा मेरे विरोधी कोई चाल चलेंगे |
इस स्वप्न में जो बात मुझे महत्वपूर्ण दिख रही है वह है…. रोहिणी नक्षत्र और मकर लग्न….कुछ बातें स्पष्ट हो रही हैं जैसे की मेरा नाम रोहिणी नक्षत्र से जुड़ा हुआ है

रोहिणी नक्षत्र आकाश मंडल में चौथा नक्षत्र है। यह वृषभ राशि में चारों चरणों में रहता है। उसके चारों चरणों में बनने वाले नाम ओ, वा, वी, व है। राशि स्वामी शुक्र है और नक्षत्र स्वामी चंद्रमा है। रोहिणी चंद्रमा की सुंदर पत्नी का नाम है। रोहिणी नक्षत्र को वृष राशि का मस्तक कहा गया है। इस नक्षत्र में तारों की संख्या पाँच है। किसी भी वर्ष की 26 मई से 8 जून तक के 14 दिनों में इस नक्षत्र से सूर्य गुजरता है। इस प्रकार रोहिणी के प्रत्येक चरण में सूर्य लगभग साढ़े तीन दिन रहता है।

फलीभूत हुआ इस प्रकार:

26 तारिख तक सभी मेहमान और ट्रस्टी वगैरह चले गये थे और इस बीच मैं उनमें से किसी से भी मिलने नहीं गया | क्योंकि मेरे लिए वे कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति नहीं थे, केवल एक टूरिस्ट थे जो साल में एक या दो बार पूजा के नाम पर पिकनिक मनाने आते हैं | वे खुद को आश्रम नाम के इस पर्सनल फार्म हाउस का मालिक समझते हैं और यहाँ सन्यासी के नाम पर अपने लिए नौकर रखते हैं | मैंने वह परम्परा तोड़ दी थी | और इस बार भी जब वे आये और मैं उनकी खातिर दारी के लिए नहीं पहुँचा तब उन्हें बुरा लगा कि एक नौकर कि मालिक के आने पर भी नहीं आया…. तो उनहोंने आश्रम एक अध्यक्ष को कहा कि मुझे तुरंत आश्रम से बाहर निकाल दो.. इतने सारे लोग आये और वे मुझसे सीधे बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए आश्चर्य की बात थी |

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तो अभी अध्यक्ष महोदय ने मुझे बुलाया और कहा कि तुम पूरी वाले आश्रम में चले जाओ, तुम्हारे कारण मुझे बहुत भला-बुरा सुनना पड़ा | मैंने कहा कि वे हैं कौन जो आपको भला बुरा कहा गए ? मुझे बुलाया क्यों नहीं, वहीँ उनको समझा देता ढंग से… अब वे चले गये तो आप मुझे बता रहे हो ? खैर आप क्या चाहते हैं चला जाऊं ?

वे बोले देखो हमको किसी से लड़ाई झगड़ा नहीं करना है…. मैंने कहा कि पहले आप मुझे यह बताये कि वे किस अधिकार से कह रहे हैं मुझे निकालने के लिए ? इतने साल में तो उनकी आवाज नहीं निकली और अब…. खैर ठीक है मैं चला जाता हूँ लेकिन आपके पूरी वाले आश्रम में नहीं
| मैं स्वतंत्र व्यक्तित्व हूँ और ईश्वर आज तक मेरी देख रेख करता आया है, आगे भी करेगा | हरिद्वार से निकलना था तो आपको भेजा था, और मेरा आपसे परिचय केवल एक दिन का ही हुआ था उस समय | इसी प्रकार अब यदि ईश्वर ने चाहा तो मेरे व्यवस्था हो जाएगी लेकिन मैं आप लोगों से हमेशा के लिए सम्बन्ध समाप्त कर लूँगा, जैसा कि मैं आज तक करता आया हूँ | मैं जिस जगह को छोड़ देता हूँ, फिर उस जगह से सम्बन्ध नहीं रखता |

तो इस प्रकार आपने देखा कि कैसे स्वप्न का महत्व है मेरे जीवन में | लेकिन यह शुरुआत है अर्थात स्वप्न का पहला भाग… आगे क्या होता है वह भी आपको बताऊंगा | ~विशुद्ध
चैतन्य

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