फिर लोग कहते हैं कि धर्म रक्षा करता है

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कोई हिन्दू राष्ट्र चाहता है, कोई मुस्लिम राष्ट्र चाहता है तो कोई इसाई राष्ट्र चाहता है, कोई सारी मानव जाति को इसाई बनाना चाहता है तो कोई, हिन्दू तो कोई मुस्लिम…. लेकिन कोई मानव को मानव नहीं बने रहने देना चाहता |

जब इसाई और मुस्लिम नहीं आये थे भारत में तब भारतीय शैव और वैष्णव थे और एक दूसरे को मिटाने के सपने देखा करते थे | तब भी वही अस्तित्व की लड़ाई चलती थी और आज भी चल रही है | कोई दूसरे को सहन करने को न तो तब तैयार था और न ही आज तैयार है | भेड़ों की भीड़ तब भी तमाशा देखती थी और आज भी देख रही है | तब भी वे भगवान् शान्ति से सब कुछ देखते रहते थे आज भी देख रहे हैं जिनके नाम पर लोग अपनी जाने दे रहे हैं | न तब वह बचाने आता था और न ही आज आता है.. क्योंकि वह जानता है कि मूर्ख आपस में लड़ मरें इसी में सृष्टि का कल्याण है | सृष्टि को उन्नति ये धार्मिक अंधभक्त नहीं दे सकते, क्योंकि ये आगे गति नहीं करते, बल्कि पीछे की ओर गति करते हैं, जिसे ज्योतिषशास्त्र में वक्री गति कहा जाता है |

और फिर लोग कहते हैं कि धर्म प्रेम सिखाता है | फिर लोग कहते हैं कि धर्म रक्षा करता है | फिर लोग कहते हैं धर्म समृद्धि व सुख देता है |

यह फिल्म वैसे तो केवल तकनीकी और कला का बलात्कार ही है और मुझे सिवाय फूहड़ कॉमेडी शो से अधिक नहीं लगा… लेकिन शैव और वैष्णव पर आधारित लघुकथा मेरे पोस्ट से सम्बंधित है इसलिए चाहता हूँ कि केवल फिल्म के शुरू का आठ सौ साल पुरानी कहानी अवश्य देखें | ~विशुद्ध चैतन्य

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