गुरु अर्थात अँधेरे से निकालकर प्रकाश में लाने वाला व्यक्ति

पूजा-पाठ, कर्मकांड, ईश्वर की भक्ति सिखाने वाला या गीता-पाठ करने वाला, रामायण बाँचने वाला, तंत्र-मन्त्र, वशीकरण करने वाला, कुंडली बनाने वाला गुरु नहीं होता वे या तो पंडित होते हैं, पुरोहित होते हैं, या फिर व्यापारी होते हैं |

गुरु अर्थात अँधेरे से निकालकर प्रकाश में लाने वाला व्यक्ति | जिस प्रकार प्रकाश का न होना ही अँधेरा है, ठीक उसी प्रकार ज्ञान का न होना ही अज्ञान है | ज्ञान दो प्रकार के होते हैं, बाह्य ज्ञान और आत्मिक ज्ञान | बाह्य ज्ञान वह हैं जो बाहर से थोपे जाते हैं जैसे, भारत का प्रधानमन्त्री कौन है, इनकम टैक्स ऑफिसर का नाम बताएं, ओबामा पहली बार बाथरूम में कब गिरे थे ?, मोनिका लेविंस्की का किसके साथ चक्कर था, सलमान की शादी क्यों नहीं हुई….. आदि जनरल नॉलेज की बातें | यह आप पर थोपी जाती हैं और इनका आपके जीवन के उत्थान से कोई लेना देना नहीं होता |

हेनरी फोर्ड से एक बार पूछा गया कि अमेरिका के वित्त मंत्री का नाम क्या है ? तो उन्होंने छूटते ही कहा,”I don’t know.” प्रश्नकर्ता ने कहा कि आपका इतना बड़ा व्यापार है और देश विदेश में फैला हुआ है, आपको वित्तमंत्री का ही नाम नहीं पता ?

हेनरी फोर्ड बोले, “मैंने इतने सारे एमबीए किये हुए मैनेजरों को इतनी भारी सेलरी देकर किसलिए रखा हुआ है ? मैं यदि यही सब याद रखने के चक्कर में रहता तो मैं इतना बड़ा बिजनेस नहीं संभाल रहा होता, मैं भी किसी कंपनी में मैनेजर ही होता, कंपनी का मालिक नहीं |

तो आपको लोग रामायण रटाते हैं, गीता रटाते हैं, क़ुरान रटाते हैं, बाइबल रटाते है…. उन सब को रटने से कोई लाभ होना होता, ईश्वर की प्राप्ति होनी होती तो उन्हें क्यों नहीं हुई जो आपको यह सब रटाते हैं ? यदि इन सब को रटने से भाई चारा, प्रेम और सौहार्द बढ़ता है तो जरा शीर्ष पर बैठे इनके विद्वानों को देख लो, कभी नसबंदी का ब्यान देते हैं, कभी कब्र से निकालकर महिलाओं का बलात्कार करने वाले बयान देते हैं, कभी…. तो इन ग्रंथो को रटने से कोई ज्ञान प्राप्त नहीं होता | ज्ञान प्राप्त होता तो लोग आज इस देश को समृद्ध बनाने के लिए काम कर रहे होते, न कि आपस में फूट डलवा कर राजनीति करने में लगे होते | इनको पढ़ने से ज्ञान प्राप्त होता तो आइसिस क़त्ल-ए-आम नहीं कर रही हॉट, नक्सली इस देश में अपना आस्तित्व नहीं जमाये होते, जनता हाथ पर हाथ धरे सरकार को नहीं कोस रही होती, नए नए कानून बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, रिश्ते व्यापार और धन पर आधारित नहीं होते….. ये सब बातें समझिये |

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रटने से काम नहीं चलेगा, समझ कर पढ़िए, एक एक शब्दों को समझिये फिर आगे बढिए |

तो गुरु वह नहीं जो आपको रटी-रटाई बातें रटाये, गुरु वह जो आपको आपसे मिलवाये | ~विशुद्ध चैतन्य

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