महान होने की शर्ते हैं और कुछ कीमतें हैं जो चुकानी पड़ती है

हमारा समाज महान लोगों की जय-जयकार करता है और महान लोग महान बने रहने के लिए रिमोट कंट्रोल से चलने वाला एक पुतला बन जाता है | और रिमोट कंट्रोल उनके हाथ में होता है जिनको महान बनने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हो पाता |

अब महान होने की शर्ते हैं और कुछ कीमतें हैं जो चुकानी पड़ती है जैसे;

>नंगे रहना और किसी स्त्री को देख कर भी शरीर में कोई उत्तेजना का उत्पन्न न होना |
(इसके लिए लिंग भंग जैसे अमानवीय कर्मकांड भी सहने पड़ते हैं )

> भूखे, नंगे पैर रहना, भीख माँगना |

> आश्रम आदि बनवाकर विधवाओं सा जीवन जीना

> महान क्रान्ति का नायक होने के बाद भी सत्ता का नेतृत्व लम्पटों को सौंप देना |

> धर्म के नाम पर देश के विभाजन को स्वीकार कर लेना केवल कुछ नेताओं के स्वार्थ की पूर्ति के लिए |

और बाकी हर वह काम जिसके पीछे दुनिया पडी हुई फिर चाहे वह प्राकृतिक ही क्यों न हो, उससे दूरी बना लेना….. व्यक्ति को महान बनाता है | और महानता का अर्थ होता है कुछ मूर्खों की भीड़ द्वारा जयकारा लगाना | कुछ लोग आकर पैर छू लेते हैं और दो चार रूपये प्रणामी के फेंक देते है महानता के नाम पर… बस !

समझ में नहीं आता कि ऐसी महानता के लिए लोग इतने लालायित क्यों हैं ? न तो इससे लोग निंदा करना छोड़ते हैं, न ही इससे ईश्वर की रचनाओं का सम्मान होता है, न तो इससे स्वर्ग या मोक्ष मिलता है और न ही इससे किसी प्रकार की आत्मिक शांति मिलती है | महावीर ने जो मार्ग चुना वह उनके लिए ठीक था लेकिन उनकी नक़ल करना कुछ वैसी ही बात है जैसे महात्मा गांधी की ड्रेस पहनकर, हाथ में लाठी लेकर कोई महात्मा गांधी रोड पर चलने लगे | जरा ऐसा करके तो देखिये… क्या आप महात्मा गांधी का स्थान पा सकेंगे ?

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लेकिन इन कठपुतलियों की आढ़ में ना जाने कितने अधर्मी अपनी तिजोरियां भरने में लगे हुए हैं | महानता की परिभाषा ही बदल दी समाज ने | जो नकल कर रहे हैं, एक्टिंग कर रहे हैं वे महान हो गये और जो वास्तविक रूप से हकदार हैं महानता के वे ठोकरों पर पड़े हुए हैं | जैसे सलमान के केस में सलमान महान हो गये, जबकि जिन्होंने निर्भीकता से सच्चाई बयान की उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं | जो भ्रष्टाचारी हैं, दंगाई हैं, नफरत व द्वेष के ज़हर उगलते रहते हैं वे महान हैं, जो भाईचारा और प्रेम की बात करते हैं उन्हें तिरस्कार मिलता है | जो ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ हैं उन्हें तबादले और दुत्कार मिलता है, जो चापलूसी और मक्कारी में लिप्त हैं उन्हें जय जयकार मिल रहा है…. | अर्थात समाज स्वयं यह सिद्ध कर रहा है कि वह कितना नीचे गिर चुका है लेकिन यही समाज आदर्शवादिता का पाठ पढाता है | नियम और कानून बनाता है वह भी केवल इसलिए कि कानून की आढ़ में अपराधियों को सुरक्षा दिलवाई जा सके और निर्दोषों और गरीबों को प्रताड़ित किया जा सके |

मुझे नहीं लगता कि मुझे इन महान लोगों की भीड़ में शामिल होने की कोई आवश्यकता है और न ही ऐसे समाज द्वारा मिली महानता का कोई महत्व है | ~विशुद्ध चैतन्य

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