माँ कितना ही नाराज क्यों न हों, लेकिन माँ तो आखिर माँ ही होती है !

Sundhara (Spouts)

प्रकृति का अपना ही तरीका है व्यवस्था बनाये रखने का | मानवों ने तो केवल दोहन ही किया है, लौटाया कुछ नहीं पृथ्वी को |  जमीन से पानी निकाले लेकिन लौटाए नहीं, खनिज निकाले, लेकिन लौटाए नहीं, हीरे जवाहरात निकाले लेकिन लौटाए नहीं और न उस के बदले उस कुछ दिया |

लेकिन फिर भी प्रकृति को इस बात की चिंता अवश्य है कि जल की आपूर्ति न होगी तो जीवन संकट में आज जायेगा…और शायद इसलिए ही इस साल भूकंप से चीजें इधर उधर की और जल स्त्रोत खुल गये |

समाचार पत्र ‘हिमालयन टाइम्स’ के मुताबिक, कई सालों बाद महादेवस्थान गांव और माता तीर्थ गांव में जल स्रोतों से पानी का सोता स्वत: ही शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, इन स्रोतों से पानी निकल रहा है और अब ग्रामीणों के पास पीने के लिए, सफाई के लिए, नहाने और खाना पकाने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी है।

अधिकतर ग्रामीणों का कहना है कि नवनिर्मित घरों की वजह से अवरुद्ध हो चुके जमीन के नीचे मौजूद पानी के स्रोत भूकंप की वजह से फिर से खुल गए हैं और अब लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी की आपूर्ति हो रहा है। ठीक इसी तरह, महादेवस्थान के पास सुनधरा में भी जल स्रोत से पानी निकलने लगा है।

क्या हम अब भी नहीं सुधरेंगे ? क्या हम अब वृक्ष व वनों को बचायेंगे ? क्या हम जल स्त्रोतों का दुरूपयोग बंद करेंगे ?

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Publish Date:Thu, 03 Nov 2011

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