साहसी बनो हिम्मतवर वनों और हमेशा जीवन में विश्वास रखो

ओशो ने कहा था;

“जल्द ही मै यहाँ नही रह जाऊंगा और याद रखना विशेष रूप से मै अपने शिष्यों को याद दिलाना चाहता हूँ यदि तुम हकीकत में ही मुझे प्रेम करते हो जब मै नही रहूँ मै चाहूँगा तुम किसी ऐसे व्यक्ति को खोज लो जो अभी भी जीवित है और यह मत कहना क्योकि तुम मुझसे सम्वंधित हो क्योंकि तुम मेरे शिष्य हो इसलिए तुम किसी और वास्तविक सद्गुरु से सम्बंधित नही हो सकते। उन आखोँ में झांको तो एक बार फिर तुम वहां मेरी ही आखें पाओगे। शरीर तो वही नही होगा लेकिन आंखे वही होंगी ।

यदि मेरे यहाँ रहते हुए तुम्हारी यात्रा पूरी नही होती यदि अभी भी कुछ बाकि रह गया है तब घबराओ मत तुम मुझे छोड़ कर मेरे साथ विश्वासघात नही कर रहे हो वल्कि हकीकत तो ये है कि तुम मुझे न छोड़ कर और किसी वास्तविक सद्गुरु के पास न जाकर तुम मेरे साथ विश्वासघात कर रहे हो।

साहसी बनो हिम्मतवर वनों और हमेशा जीवन में विश्वास रखो ।तुम्हारे प्रति मेरा प्रेम अथवा मेरे प्रति तुम्हारा प्रेम कभी भी बाधा नही बनना चाहिए ।प्रेम स्वतंत्रता देता है। प्रेम तुम्हे मुक्त करता है।
 

जब तक सद्गुरु जीवित है उसका पूरा स्वाद लो ।केवल मूढ़ ही मृत्यु को पूजते हैं बुद्धिमान हमेशा ही जीवन की पूजा करते हैं।”

जो भी गुरु या धर्मग्रन्थ या सम्प्रदाय आपको स्वतंत्र रहने की अनुमति नहीं देता, जो आपसे यह आशा रखता है कि मरने के बाद भी लोग उसे पूजते रहें, वह वह मानसिक रोग से पीड़ित है ऐसा मैं मानता हूँ | जो आपको नए की खोज में बाधा बनता हो, जो आपको नए प्रयोगों से वंचित करता हो, वह आपको रोगी बनाता है | क्योंकि ठहरा हुआ जल, ठहरा हुआ धन और ठहरा हुआ जीवन रोगों को उत्पन्न करने वाले विषैले जीवाणुओं का जन्मस्थल होता है |

आपने देखा होगा मलेरिया, टायफाइड, डेंगू आदि बीमारियाँ ठहरे हुए जल के कारण ही उत्पन्न होते हैं | इसी प्रकार जिसके घर में धन ठहर जाता है, जो दान आदि में रूचि नहीं रखा और न ही अपने परिवार के लिए आवश्यक खर्च ही करता है, बल्कि अधिक से अधिक धन जमा करने में लगा रहता है, उसके घर में डकैती, हत्या जैसी वारदात हो जाती है | क्योंकि धन भी जहाँ ठहरा हुआ होगा, वह प्राणघातक बीमारियों का घर बन जाएगा | ~विशुद्ध चैतन्य

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