मैं तो वही कर रहा हूँ जो मुझे करना चाहिए..

कर्मणा बध्यते जन्तुर्विध्यया च विमुच्यते |तस्मात्कर्म न कुर्वन्ति यतयः पारदर्शीनः ||ज्ञानं निःश्रेयासं प्राहुर्वृद्धा …
Posted by विशुद्ध चैतन्य on Friday, April 24, 2015

READ  धार्मिक होने का भ्रम

लेख से सम्बन्धित आपके विचार

avatar
  Subscribe  
Notify of