फिर हम जाते हैं मंदिरों-मस्जिदों में भगवान् और अल्लाह को मस्का लगाने…

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार महाभारत काल तक सभी देवी- देवता पृथ्वी पर निवास करते थे। महाभारत के बाद सभी अपने-अपने धाम चले गए। कलयुग के प्रारंभ होने पर देवता विग्रह रूप ( अदृश्य) में ही रह गए अत: उनके विग्रहों की पूजा की जाती है।

सतयुग में विशालकाय मानव हुआ करते थे। बाद में त्रेतायुग में इनकी प्रजाति नष्ट हो गई। पुराणों के अनुसार भारत में दैत्य, दानव, राक्षस और असुरों की जाति का अस्तित्व था, जो इतनी ही विशालकाय हुआ करती थी।

भारत में प्राचीन काल के ऐसे कई कंकाल के साथ एक शिलालेख भी मिला है। यह उस काल की ब्राह्मी लिपि का शिलालेख है। इसमें लिखा है कि ब्रह्मा ने मनुष्यों में शांति स्थापित करने के लिए विशेष आकार के मनुष्यों की रचना की थी। विशेष आकार के मनुष्यों की रचना एक ही बार हुई थी। ये लोग काफी शक्तिशाली होते थे और पेड़ तक को अपनी भुजाओं से उखाड़ सकते थे। इन लोगों ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया और आपस में लड़ने के बाद देवताओं को ही चुनौती देने लगे। अंत में भगवान शंकर ने सभी को मार डाला और उसके बाद ऐसे लोगों की रचना फिर नहीं की गई।

देवताओं ने सबक ले लिया, लेकिन मानवों ने सबक नहीं लिया | वे कभी अलकायदा, कभी आइसिस जैसी सेनाओं का समर्थन करते हैं, तो कभी देवी-देवताओं के नाम पर बनाई गयी सडकछाप गुंडों की सेनाओं का | फिर यही गुंडे मवाली कानून का मजाक उड़ाते हैं, प्रार्थना व सभा स्थलों में तोड़फोड़ मचाते हैं, अपने से भिन्न मतों के लोगों से दुर्व्यवहार करते हैं… और हम कहते कि धर्म की रक्षा कर रहे हैं ये लोग | हम लोग इनकी जयजयकार करते हैं | ये लोग खुद को भगवान् समझने लगते हैं क्योंकि देवी-देवताओं ने तो महाभारत काल के बाद से पृथ्वीलोक का त्याग कर दिया था | यही कारण है कि अब मंदिरों में देवी-देवता नहीं स्थाई रूप से नहीं रहते | केवल दफ्तर के बाबू की तरह निश्चित समय या तिथि पर ही उपलब्ध होते हैं और उस पर भी भिखमंगों की लाइन देखकर सबकी फ़ाइल कोने में डाल कर निकल जाते हैं | केवल जो कुछ खास ख़ास लोग होते हैं, जैसे अम्बानी, अदानी, कोई बड़ा घोटालेबाज नेता-अभिनेता या कोई बड़ा अपराधी….आदि की ही सुनवाई करते हैं | क्योंकि उनसे रिश्वत में मोटी रकम मिल जाती है | बाकी चिल्ल्हर देने वालों की फरियाद धरी की धरी रह जाती है |

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तो हमने पुराणों को पढ़ने के बाद भी सबक नहीं लिया कि आत्मनिर्भरता ही जीवन का आधार है, दूसरों को ताकत देने से अपना भला नहीं होने वाला और न ही ताकत पाने वाला व्यक्ति भला ही करेगा इस बात की कोई गारंटी है | इतनी सी बात पिछले छः दशकों में बनी सरकारों द्वारा दी गयी सेवा से समझ में नहीं आया किसी के | हमारी अपनी ही सरकारी सेवायें, प्राइवेट कंपनियों को खुश करने के लिए हमें परेशान करती रहीं और फिर सरकार ने घोषणा की कि प्राइवेट कंपनियों के हाथ में ही सारी सरकारी सेवायें सौंप दी जाएँ…… कुल मिलाकर सभी सरकारें प्राइवेट कंपनियों की एजेंट ही रहीं और हम भी ऐसे कपूत निकले माँ-भारती के कि एम्टीएनएल और बीएसएनएल से लेकर रेलवे तक प्राइवेट कंपनियों की मरम्मत करने के स्थान पर प्राइवेट कंपनियों की जय जयकार करने में लग गए |

फिर हम जाते हैं मंदिरों-मस्जिदों में भगवान् और अल्लाह को मस्का लगाने…

उन सेनाओं का समर्थन बंद कीजिये जो देवी-देवताओं का नाम बदनाम करते हैं अपनी सड़कछाप गुंडागर्दी से | उन संगठनों का समर्थन बंद कीजिये जो क़त्ल-ए-आम करते हैं
निर्दोषों का धर्म के नाम पर | अपने देश को समृद्ध व खुशहाल बनाने में रोड़ा बने सरकारी अधिकारियों और नेताओं का बहिष्कार करिए…. नहीं तो एक दिन माँ-भारती को खुद ही अपने हाथों से हम जैसे कपूतों को जो सबकुछ देखकर भी आँखें बंद किये बैठे हैं, मिटाने के लिए करवट लेना पड़ जाएगा | ~विशुद्ध चैतन्य

#earthquake

Darbar Square, the pride of Nepal and a UNESCO designated World Heritage Site has suffered massive damage in today’s (24/04/15) earthquake.

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