जब तक आप उनके हाथों की कठपुतली हैं, तभी तक मान-सम्मान है

एक दिन मैंने एक पोस्ट लिखा था कि, मान-सम्मान आपके अपने कभी नहीं होते, वह केवल उसी का होता है जो देता है | यानि मान-सम्मान के आप मालिक नहीं है, मालिक देनेवाला ही रहता है आजीवन और मालिक आपको लीज़ पर देता है मान-सम्मान | जब तक आप उनके हाथों की कठपुतली हैं, जब तक आप उसके इशारों पर नाच रहे हैं, तभी तक मान-सम्मान है और जिस दिन आपने उसके इशारों पर नाचना बंद कर दिया, आपसे आपका सम्मान छीन लेगा वह और अपमान थमा देगा आपके हाथ पर | जिस मान-सम्मान के लिए लोग लालायित रहते हैं, कभी वह उसका होता ही नहीं, आजीवन वह उस मान-सम्मान का मालिक नहीं बन सकता |

इसलिए ही लोग किसी अपने को खोजते हैं, ऐसा जीवन साथी खोजते हैं जो उसे उसी के रूप में स्वीकारे, समय के साथ बदल न जाये | इसी लिए लोग माँ, मित्र, पत्नी या शिष्य को अधिक महत्व देते हैं, क्योंकि इनमें सम्भावना अधिक रहती है कि ये समय के साथ नहीं बदलेंगे | हालाँकि ये भी कोई गारन्टी नहीं होती कि ये लोग वफादार ही निकलेंगे, फिर भी बाहरी लोगों के मुकाबले ये लोग अधिक विश्वसनीय होते हैं |

लेकिन दुमछल्ले विश्वसनीय नहीं होते क्योंकि उनकी स्थिति उस लोमड़ी की तरह होती है, जो शेर के पीछे पीछे चलती है | शेर बूढ़ा हो जाए या बीमार हो जाए और शिकार करने में असमर्थ हो जाए तो उसके मरने का इंतज़ार करती है ताकि उसका माँस खा सके |

  इसी प्रकार धर्म और जाति की राजनीती करने वालों के साथ भी ऐसे ही लोग जुड़ते हैं जिनका अपना स्वार्थ उससे सिद्ध होता हो | वे शिखर तक पहुँचाने के लिए पूरा जोर तो लगा देते हैं, लेकिन बदले में यह अपेक्षा रखते हैं कि उनके उपद्रवों पर आँख मूंद कर धृतराष्ट्र बना बैठा रहे | उसका मान सम्मान तभी तक है, जब तक वह मौनी-मन्नू बना बैठा है, जैसे ही उसने मुँह खोला तो उसकी इज्जत दो कौड़ी की नहीं रखेंगे ये लोग | यही लोग लोगों को कहते फिरते थे कि प्रधानमंत्री की इज्जत होनी चाहिए, उसके लिए कोई अशोभनीय बातें नहीं कहनी चाहिए और यही लोग मनमोहन सिंह को दिल खोलकर गालियाँ देते थे, आज अपने ही भगवान को गालियाँ देने लगे | क्योंकि ये धर्म और नैतिकता के ठेकेदारों को न धर्म का कोई ज्ञान है और न ही नैतिकता का | इसलिए इन लोगों की संगत रखने वाले उन पशुओं की संगत में रहते हैं जो समय आने पर अपने ही प्रजाति को खाने लगते हैं |

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जिन लोगों ने ऐसे लोगों को पाकिस्तान और इस्लामिक देशों से सबक नहीं लिया उन्हें इस घटना से सबक ले लेना चाहिए कि ये लोग न राष्ट्र के सगे हैं और न ही नागरिकों के और न ही अपने नेता के… ये लोग केवल अधर्म के साथ हैं और शैतानों के सगे हैं | इनको कभी भी अच्छी बातें न समझाई जा सकतीं हैं और न सिखाई जा सकतीं हैं.. जैसे आईसीस, अलकायदा और इस्लामिक चरमपंथी हैं हैं ये लोग भी उसी नस्ल के हैं | इनसे दूरी रखें या सावधान रहें… यही लोग दंगा भड़काकर अपने ही पड़ोसी को लूटने में देर नहीं लगायेंगे | ~विशुद्ध चैतन्य

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