ब्राह्मण होना कोई आसान काम नहीं है और न ही हर किसी के बस की बात है

विप्राणां यत्र पूज्यंते रमन्ते तत्र देवता ।

जिस स्थान पर ब्राह्मणों का पूजन हो वंहा देवता भी निवास करते हैं अन्यथा ब्राह्मणों के सम्मान के बिना देवालय भी शून्य हो जाते हैं । इसलिए

ब्राह्मणातिक्रमो नास्ति विप्रा वेद विवर्जिताः ।।

श्री कृष्ण ने कहा – ब्राह्मण यदि वेद से हीन भी तब पर भी उसका अपमान नही करना चाहिए । क्योंकि तुलसी का पत्ता क्या छोटा क्या बड़ा वह हर अवस्था में कल्याण ही करता है ।

ब्राह्मणोंस्य मुखमासिद्……

वेदों ने कहा है की ब्राह्मण विराट पुरुष भगवान के मुख में निवास करते हैं इनके मुख से निकले हर शब्द भगवान का ही शब्द है, जैसा की स्वयं भगवान् ने कहा है की

विप्र प्रसादात् धरणी धरोहम
विप्र प्रसादात् कमला वरोहम
विप्र प्रसादात्अजिता$जितोहम
विप्र प्रसादात् मम् राम नामम् ।।

ब्राह्मणों के आशीर्वाद से ही मैंने धरती को धारण कर रखा है अन्यथा इतना भार कोई अन्य पुरुष कैसे उठा सकता है, इन्ही के आशीर्वाद से नारायण हो कर मैंने लक्ष्मी को वरदान में प्राप्त किया है, इन्ही के आशीर्वाद से मैं हर युद्ध भी जीत गया और ब्राह्मणों के आशीर्वाद से ही मेरा नाम “राम” अमर हुआ है, अतः ब्राह्मण सर्व पूज्यनीय है । और ब्राह्मणों का अपमान ही कलियुग में पाप की वृद्धि का मुख्य कारण है ।

सारांश यह कि ब्राह्मण  यहाँ उसे कहा गया है, जो ब्रह्म में रमण करता हो, जो सुप्त समाज को जागृत करता हो, जो ज्ञान व शिक्षा का प्रकाश जलाता हो, जी अन्याय व अत्याचार का विरोध करने की प्रेरणा देता हो, जो लोभ या भयवश कोई अनैतिक कार्य न करता हो….| यहाँ ब्राह्मण की पूजा से तात्पर्य जातिगत ब्राहमण नहीं, वास्तविक ब्राह्मण की पूजा यानि उन्हें हृदय से स्वीकार करने की बात की जा रही है |

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लेकिन लोगों ने जातिगत ब्राहमणों को पूजने का चलन चला लिया और आज यही एक व्यवसाय का रूप ले लिया | जो वास्तविक ब्राह्मण हैं, वे भूखों मर रहे हैं, लोगों की उपेक्षा झेल रहे हैं | जैसे कि किसी ने मुझे बताया कि एक व्यक्ति मेडिकल कॉलेज में फैली अव्यवस्था के विरुद्ध अभियान छेड़ रखा है और चेयरमैन को नाराज कर रखा है | इसलिए जो डिग्री पाँच वर्ष में मिल जाती है, वह सात वर्ष में भी उन्हें नहीं मिली | कॉलेज में भी उसके साथी उसका मजाक उड़ा रहे हैं कि वह अपनी जिंदगी खराब कर रहा है वहाँ जबकि उनके साथ के अधिकाँश लोग निकल चुके हैं और अच्छी अच्छी  जगह सेटल हो चुके हैं |

मैंने इस व्यक्ति को ब्राह्मण मानता हूँ क्योंकि वह डिग्री लेने के लिए नहीं, शिक्षा लेने के लिए गया था कॉलेज | जो डिग्री लेने गए थे वे तो कहीं न कहीं गुलाम बन गये, किसी न किसी के नौकर बन गये…. लेकिन यह व्यक्ति ब्राह्मण बन गया | ब्राह्मण होना कोई आसान काम नहीं है और न ही हर किसी के बस की बात है | इसलिए ब्राह्मण श्रद्धेय हैं |

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