अनजान राह पर चलने से दुनिया डरती है इसलिए उन्हें हमसफ़र न बनाएं

कई हजार साल पुरानी बात है | एक गाँव में एक किसान रहता था | वह गाँव में सबसे अधिक धनवान तो था ही लेकिन सभी के साथ मित्रता थी उसकी | कोई भेद भाव नहीं रखता था | वह चोर उचक्कों से भी उतने ही प्रेम से मिलता था जितने की संत-महंतों से मिलता था | हिन्दू हो या मुस्लिम सभी उसके लिए समान थे | कोई भी काम करता था तो सभी की सलाह व सहयोग अवश्य लेता था |

एक दिन उसने सपने में एक सुन्दर मकान देखा तो सुबह आँख खुलते ही उस मकान को बनवाने की ठान ली | गाँव के सबसे मशहूर आर्किटेक्ट को बुलवाया जो कभी स्कूल ही नहीं गया था लेकिन मकान एक से बढ़कर एक बनवा देता था | किसान ने उसे सपने में देखे मकान की रूप रेखा समझाई तो उस आर्किटेक्ट ने उसे कागज़ पर उतारा | किसान ने जब वह ड्राइंग देखी तो झूम उठा क्योंकि जैसा उसने सपने में देखा था उससे भी सुन्दर वह ड्राइंग थी |

फिर उसने सभी परिचितों को बुलवाया और सभी से सलाह मशविरा किया | लोगों ने ड्राइंग देखी तो सभी ने अपनी अपनी पसंद से उसमें फेरबदल करवाना शुरू कर दिया | शाम होते तक जब सभी अपनी अपनी सलाह देकर चले गए तो किसान ने नए फ़ाइनल हुए ड्राइंग को देखा | उसने अपना सर पीट लिया क्योंकि उसके सपने का मकान तो वहाँ था ही नहीं और जो था वह कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था |

किसान ने तय किया कि वह अब किसी की सलाह नहीं लेगा और वही करेगा जो उसे ठीक लगेगा | उसने फिर से नया ड्राइंग बनवाया और वही सपने वाला मकान फिर से सामने आ गया | उसने काम शुरू करवा दिया | अब गाँव के सलाहकार सारे नाराज हो गये क्योंकि उनकी सलाह को किसान ने कोई मान्यता नहीं दी | किसान ने कोई परवाह नहीं की और धीरे धीरे जब मकान बनकर तैयार हो गया तब उसने फिर गाँव के लोगों को बुलवाया | सभी ने दिल खोल कर प्रशंसा की लेकिन तब भी कुछ लोगों ने मीन-मेख निकाल ही दिया |

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कथा सार यह कि आप चाहते क्या हैं वह आपको पता होना चाहिए | सलाहकारों को आपकी पसंद व उद्देश्य में कोई रूचि नहीं होती इसलिए उनपर पूरी तरह से विश्वास नहीं करना चाहिए | यदि आपने कोई उद्देश्य चुना है तो वह आपका निजी है और दुनिया उससे अनजान | अनजान राह पर चलने से दुनिया डरती है इसलिए उन्हें हमसफ़र न बनाएं | क्योंकि वो आपको कहीं भी नहीं पहुँचने देगी | जो व्यक्ति यह कहता है कि वह सभी के साथ मिलजुलकर रहता है तो तय है वह खुश होगा क्योंकि उसका उद्देश्य समाज के दकियानूसी विचारों को प्रभावित नहीं कर रहे | लेकिन यदि उसे कुछ नवीन करना है तो समाज के सभी लोग उससे खुश नहीं रह सकते | उसे विरोध सहना ही होगा | लेकिन विरोधियों को चिपकाकर वह अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकता | उसे एक सुरक्षा चक्र बनाना ही होगा और केवल चुने हुए लोगों को ही उसके भीतर रखना होगा | ताकि वे सहयोगी बने उद्देश्य की पूर्ति के लिए न कि नकारात्मक उर्जा उत्पन्न करें | और यदि कोई आपकी अपनी विचारधारा से सहमत व्यक्ति नहीं मिलता, तो अकेले ही चलना उचित है | राह में कोई न कोई मिल ही जाता है जो आपको आवश्यक संसाधन से सहयोग करता है | चिंता इस बात की कभी भी न करें कि आपको समझने वाले लोग क्यों नहीं मिले, चिंता इस बात की करें कि आप स्वयं को समझने में कोई गलती तो नहीं कर रहे | – विशुद्ध चैतन्य

Originaly posted on Facebook 06/08/1014

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