लीजिये आ गये एक और नए भगवान…


कल केजरी और अन्ना भगवान् भी आ जायेंगे और फिर उसके बाद भी न जाने कितने और भगवान इसी प्रकार के आते रहेंगे | पिछले सभी भगवान् अब आउटडेटेड हो चुके हैं और आधुनिक समाज में उनके लिए अब कोई स्थान भी नहीं बचा है | वे अब अन्धविश्वास और कपोल कल्पना मात्र रह गये हैं |

पढ़े-लिखे आधुनिक वैज्ञानिक सोच के लोग तो गर्व से कहते हैं कि वे ईश्वर को मानते ही नहीं है वे तो नास्तिक हैं | जो कुछ दुनिया में होता है वह या तो वैज्ञानिक या पढ़े-लिखे लोग करते हैं या फिर भौतिक विज्ञान के नियमानुसार स्वतः होता है | इसमें किसी ईश्वर का कोई लेना देना नहीं होता और फिर हमारे वैज्ञानिक तो अंतरिक्ष में दूर दूर तक खंगाल आये लेकिन ईश्वर जैसी कोई चीज नहीं मिली |

अब यही पढ़े-लिखे लोग हैं जो बहुत ही प्रेक्टिकल होते हैं इसलिए मोदी, रजनीकांत, सचिन जैसे भगवानों की मूर्तियाँ सथापित करते हैं | फिर कल लोगों पर थोपेंगे इन्हीं भगवानों को जैसे कि आज आईसीस और  अलकायदा थोप रहे हैं हथियारों के दम पर और पहले मुगलों ने थोपा था हम पर | फिर किस्से कहानियाँ गढ़ी जायेंगी कि कैसे मोदी मंदिर में चढ़ावा चढ़ाने वाले को टिकट मिल गया और कैसे वह चाय की रेहड़ी लगाते लगाते विधायक बन गया | फिर किस्से सुनाये जायेंगे कि कैसे एक लड़की को बदमाश बियाबान में उठाकर ले गये और उसने मोदी-मंत्र का जाप किया तो मोदी जी स्वयम प्रकट हो गये और इम्पोर्टेड नौलखा सूट से उसका शरीर को इतना ढक दिया कि बदमाश डर कर भाग गये और फिर लड़की उस सूट को बेचकर शादी के लिए दहेज़ का इंतजाम कर लिया…..

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अब राम-कृष्ण आदि केवल डराने और दंगा करवाने वाले नाम ही रह गये हैं और विष्णु, ब्रम्हा, महेश भूले-बिसरे भगवान हो गये | भगवानों से न तो कोई नेता डरता है अब न ही कोई अपराधी डरता है | न कोई घोटालेबाज डरता है और न ही कोई बलात्कारी डरता है | डरता है तो केवल वह जो दो वक्त की रोटी और अपने परिवार की खुशियों के लिए यही भूल जाता है कि उसकी अपनी भी कुछ खुशियाँ हैं और अपनी भी कोई ज़िन्दगी | वह भूल जाता है कि वह पैसे कमाने की मशीन नहीं मानव है और उसके अपने भी कुछ इच्छाएं हैं | भगवान् को ऐसे लोगों से कोई शिकायत नहीं होती लेकिन ये बेचारे डर के मारे इन ठेकेदारों के मंदिरों में चढ़ावा चढ़ाने पहुँच जाते हैं यह मानकर कि दुनिया में आये हैं तो इन दलालों को हफ्ता दिए बिना चैन से नहीं जी पायेंगे | यह सोचकर कि उनकी जवान होती बेटी इनके पालतू शिकारियों के शिकंजे से बची रहे…….

यदि इतिहास उठाकर देखें और वर्तमान की गतिविधियों पर ध्यान दें, तो आप पायेंगे कि मूर्तियों और मंदिरों का मूल उद्देश्य ही खो गया और अब केवल हफ्तावसूली के लिए ही इनका उपयोग होता है | मूर्तियाँ अब आदर्श के रूप में नहीं, बल्कि सड़क किनारे दान पात्र के रूप में रखे जाते हैं | अब मूर्तियाँ बना करा उनके आदर्शों को अपनाया नहीं जाता, बल्कि मूर्तियाँ बनाकर यह जताया जाता है कि आप तो भगवान् हैं और हम आपकी तरह नहीं हो
सकते | हम आपके दिखाए आदर्शों पर नहीं चलेंगे और न ही ऐसा कोई काम करेंगे जो मानवतापूर्ण हो और न ही हम आपकी तरह सहयोगी होंगे किसी असहाय के लिए | बस हमको तो धंधा करना है चाहे आपकी मूर्ती बनाकर ही हो या सड़क किनारे आपको खड़ा करके भीख मंगवाकर ही हो | यह तो हम भी जानते है कि भगवान बहुत दयालू होता है और बड़े बड़े अपराध और घोटालेबाजों को माफ़ कर देता है | यह तो हम भी जानते है कि आप इतने दयालू हैं कि आईसीस और अलकायदा जैसे आतंकियों द्वारा खुले आम निर्दोषों पर अत्याचार और हिंसा करने पर भी आप उनको मालामाल कर देते हैं | आप भोपाल गैस काण्ड के अभियुक्तों को भी कोई सजा नहीं दिलवाते और न ही दंगा करवाने वाले नेताओं और उनके दुमछल्लों पर ही कोई कार्यवाही होने देते हैं | आप घोटालेबाजों को सत्ता से नहीं हटने देते चाहे सत्ता परिवर्तन ही क्यों न हो जाए | आप उनके उपर चलाये सारे केस भी निरस्त करवा देते हैं…..क्योंकि आप तो दया के सागर हैं इसलिए अपना गुस्सा केवल गरीबों और असहायों पर ही निकालते हैं….. क्योंकि आप जानते हैं कि गरीब न तो सोने का मुकुट चढ़ा सकता है और न ही मंदिर बनवा सकता है | न ही वह आपको बेघर कर सकता है इसलिए आप उनको छोटी से छोटी गलती पर भी जेल करवा देते हो और छोटे छोटे कर्जे के लिए भी जमीन कुर्क करवा लेते हो… जो गरीब किसान कर्जा नहीं चुका सकता उसे आत्महत्या के लिए विवश कर देते हो, वहीं करोड़ों रूपये का टैक्स माफ़ करवा देते हो पूंजीपतियों के….|

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सचमुच मजाक बनाकर रख दिया भक्ति श्रद्धा और भगवानों का और मजाक बना दिया आध्यात्म और धर्म-ग्रंथों और पुराणों का | उसपर उन धर्मभीरुओं ने सोने पे सुहागा कर दिया जो चले जाते हैं ऐसे मंदिरों में शीश झुकाने और वे धार्मिक लोग जो विरोध नहीं कर पाते डर और अज्ञानता के कारण | -विशुद्ध चैतन्य

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