आदमखोर भीड़ का आतंक

आज से कुछ वर्ष पहले कभी कभार सुनने मिलता था कि किसी आदमखोर तेंदुआ, बाघ ने आतंक फैलाया हुआ है और आदमियों का शिकार कर रहा है | लेकिन अब पिछले तीन चार वर्षों में आदमखोर भीड़ के आतंक से देश दहला हुआ है | आदमियों की भीड़ ही आदमियों का शिकार कर रही है | आये दिन कोई न कोई निर्दोष व्यक्ति इस भीड़ का शिकार बन रहा है लेकिन कोई एयरटेल के सिम का बहिष्कार करने में व्यस्त है, कोई मोदी स्तुति में व्यस्त है, या फिर कोई अपने-अपने नेताओं, पार्टियों की चाटुकारिता में व्यस्त है | समाज कभी भी ऐसे गंभीर विषयों पर ध्यान नहीं देता, जब भी ध्यान देता है तो कोई टुच्चे विषयों पर ही ध्यान देता है |

ये भीड़ आदमखोर कैसे ??

मैं मोबलिंचिंग करने वाली भीड़ को ही आदमखोर भीड़ कह रहा हूँ | ये उन लोगों की भीड़ है जो असंतुष्ट हैं खुद से, जो उलझे हुए अपने ही घरेलू झगड़ों में, जो उलझे हुए हैं रिश्वतखोर अधिकारीयों और भ्रष्टाचार से ग्रस्त प्रशासनिक सेवाओं से | जो अपनी आर्थिक हालत से परेशान हैं, जो अपनी बेरोजगारी से परेशान हैं……अपना क्रोध वे प्रशासनिक अधिकारीयों और सरकारों पर व्यक्त नहीं कर पाते क्योंकि नक्सली या आतंकी घोषित कर दिए जायेंगे | और फिर सरकार के पालतू शिकारी उन्हें चुन चुनकर मारेंगे | और क्रोध ऐसी चीज है जो भीतर दबाये रखने पर अधिक घातक बन जाती है |

यही भीतर ही भीतर घुटने वालों की संख्या जब बढ़ जाती है, तब एक ऐसी भीड़ तैयार होती है जो आदमखोर बन जाती है | चाहे ये लोग आपको आदमियों का मांस खाते हुए न दिखते हों, लेकिन ये लोग वही कर रहे हैं जो एक माँसाहारी करता है | यानि अपनी भूख मिटाने के लिए किसी की हत्या | ये भीड़ किसी भी मांसाहारी से अधिक क्रूर व अमानवीय होती है | इनमें न तो विवेक होता है और न ही बुद्धि, क्योकि सबकुछ स्वाहा हो चुका होता है क्रोध में | और ऐसी भीड़ का न कोई जात होता है, न कोई धर्म होता है, न कोई चेहरा होता है | बस एक हवस होती है इनमें और वह है खून की होली खेलने की | बस हवस होती है इनमें वह है किसी पर अत्याचार करने की, भीतर छुपी पूरी पाशविकता को बाहर निकाल देने की |

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ये आदमखोर भीड़ कहीं आसमान से टपके हैं या फिर पड़ोसी देशों से घुसपैठ करवाए गये हैं ?

न तो ये आदमखोर आसमान से टपके हैं और न ही विदेशियों ने घुसपैठ करवाए हैं | ये भीड़ हमारे ही नेताओं के बोये जहर की फसल है | ये भीड़ तैयार हुए हैं हमारे ही अपने नेताओं के जहरीले भाषणों से | ये भीड़ तैयार हुए हैं हमारे ही नेताओं के संरक्षण पर और हमने ही उन नेताओं को इतनी छूट दी कि वे देश को साम्प्रदायिकता की आग में झोंक दें | हम ऐसे जहरीले नेताओं को सर आँखों पर बैठाते हैं और उसी का परिणाम है कि आज इन आदमखोर भीड़ का ताण्डव आये दिन देखने मिल रहा है |

ये तांडव अभी और बढ़ेगा क्योंकि देश के नेता और जनता ही यह चाहती है | क्योंकि न तो नेताओं ने कभी इन आतंकियों पर कोई कठोर कार्यवाही की और न ही देश की जनता ने | बस इनके अत्याचारों को देखते रहे और फिर आगे बढ़ गये | जिसकी जान गयी, जिसका परिवार उजड़ा वे ही रह गये अपने में सिमट कर अपने दुखों को सहने के लिए | समाज अपने में मस्त हो गया और नेता लोग योगासन करने लगे |

और शायद यह केवल आरम्भ है, अभी सारा देश ही एक जलेगा | हर कोई एक दूसरे का खून पिएगा और हर घर से लाशें गिरेंगी, तब जो बच जायेंगे वे अहिंसा का पाठ पढ़ाएंगे और बताएँगे कि हिसा बुरी चीज है | बाकी तब तक देश के सभ्य व धार्मिक कहे जाने वाले लोग तमाशा देखेंगे, नेता लोग तमाशा देखेंगे, नेताओं के चाटुकार तमाशा देखेंगे | बहुत हुआ तो कह देंगे कि इसमें अमेरिका का हाथ था या पाकिस्तान का हाथ था | लेकिन रोका कैसे जाये, इस विषय पर कोई भी चिंतन मनन नहीं करेगा और न ही कोई उचित कदम उठाने की पहल करेगा |

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~विशुद्ध चैतन्य

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