लेकिन हम (हिन्दू-मुस्लिम) लोग कर क्या रहे हैं ?

जिन लोगों ने कुछ नीच मानसिकता के लोगों के साथ मिलकर नफरत के बीज बोने का कारोबार चला रखा है, वे चाहे हिन्दू हों या मुस्लिम, राष्ट्र में उतना ही योगदान दे रहे हैं, जितना की दीमक किसी के घर में देते हैं | जो नफरत के बीज बोने वाले संगठन स्वयं को राष्ट्रहितैषी कह रहे हैं, वे राष्ट्र के हितैषी होते तो सबसे पहले अपने लोगों की शिक्षा व स्वास्थ्य की सुविधा के साथ रोजगार की व्यवस्था करते | नार्थ ईस्ट में ये लोग नहीं पहुँचे, लेकिन इसाई पहुँच गये | ईसाई वहां भी पहुँच गये जहाँ कोई हिन्दू-मुस्लिम वे जाँबाज नहीं पहुँच पाए जो निर्दोषों, मासूमों की हत्या करने में कोई संकोच नहीं करते, सड़क से लड़कियां उठा ले जाते हैं धर्म के नाम पर उनका बलात्कार करते हैं…. | लेकिन ईसाईयों ने ग्रामीणों और आदिवासियों को न केवल शिक्षा उपलब्ध करवाया, रोजगार की भी व्यवस्था की | उन्हें आपस में सहयोगी होना सिखाया |
लेकिन हम (हिन्दू-मुस्लिम) लोग कर क्या रहे हैं ? नफरत फैला रहे हैं क्योंकि अपने ही भीतर नफरत भरा हुआ है | प्रेम है ही नहीं तो बाटेंगे क्या ? नफरत के बीज बोकर राष्ट्र को समृद्ध और उन्नत नहीं बना सकेंगे कभी भी |

एक बात और ध्यान में रख लें, धर्म और सम्प्रदाय दोनों एक ही नहीं है | सम्प्रदाय केवल भेड़ों के बाड़े हैं और धर्म सनातन शाश्वत है | किसी भी समप्रदाय का व्यक्ति यदि धार्मिक हो जाए तो वह मानवता की बात करेगा और जब तक धर्म से अपरिचित रहेगा, भेड़ियों के इशारे पर काम करेगा, दंगे करेगा, बलात्कार करेगा, हत्याएं करेगा….क्योंकि वह न केवल धर्म से अनभिज्ञ है, वह स्वयं से भी अनभिज्ञ है | इसलिए यदि आप नफरत की पोटली लिए घूम रहें हैं तो समझ जाइए कि धर्म से बहुत दूर हैं और ईश्वर से कोई लेना देना नहीं है | फिर चाहे आप कितने ही ढोंग करें, पूजा पाठ, कर्मकांड, या नमाज का… आप न तो ईश्वर के प्रिय हो पाएंगे और न ही स्वर्ग या जन्नत के हकदार को पायेंगे |

आज यदि धर्म को सही तरीके से समझना है तो धर्मगुरुओं से नहीं, बल्कि बच्चों और पशु-पक्षियों से समझिये | उन्हें अपना गुरु बनाइये क्योंकि ये साम्प्रदायिक धर्मगुरु तो ले डूबेंगे सबको | ~विशुद्ध चैतन्य

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