विलायत रिटर्न चुनमुन परदेसी

Chunmun Pardesi
जो मेरे पोस्ट पढ़ते हैं उनमें से अधिकाँश चुनमुन परदेसी से तो परिचित ही होंगे, क्योंकि इनकी कई बड़े बड़े कारनामे आपने मेरे पोस्ट में पढ़े होंगे |

चुनमुन परदेसी जब विलायत से लौट कर आये विलायती डिग्री लेकर, तो कोई नौकरी इन्हें जमी ही नहीं | तो सड़क में आवारागर्दी करने लगे जैसे कि हमारे यह का कल्चर है | डिग्री हो या न हो, यदि बेरोजगार है तो कोई स्वरोजगार नहीं करना, बल्कि रोजगार दफ्तर में अपना नाम लिखा कर, रोज सुबह अखबार में नौकरी खोजना और फिर दिन भर दोस्तों के साथ लडकियाँ ताड़ने के लिए पान या चाय की दूकान में बैठे रहना या फिर बस स्टैंड या पार्क में भटकना | ऐसे में यदि कोई सड़कछाप नेता का हाथ उनके सर पर पड़ जाए तो गौरक्षा और धर्मरक्षा के लिए लाठीयां, तलवार, त्रिशूल लिए माथे पर तिलक लगाए जय श्री राम का नारा लगाकर निकल पड़ना | गली मोहल्लों में कुत्तों की तरह गौमाँस सूंघते फिरेंगे, लेकिन कभी किसी बड़े नेता या व्यापारी के पशुवधशाला में झाँकने की भी हिम्मत नहीं करेंगे |

तो चुनमुन भी ऐसे ही राष्ट्रभक्त, राष्ट्रवादी बेरोजगारों की तरह सड़कों पर भटकते रहता था | धीरे धीरे उसे समझ में आने लगा कि अगर बड़ा आदमी, नेता या धन्ना सेठ बनना है तो समाजसेवा करके तो कोई बात नहीं बनेगी और न ही ये डिग्री ही किसी काम में आएगी | भारतीयों की जो संस्कृति है यानि गुंडागर्दी, छिछोरे बयान बाजी करने वालों को ही सम्मान और वोट मिलता है, उसी के अनुरूप चला जाए | बस फिर क्या था ! निकल पड़ा चुनमुन एक नए मिशन के साथ !

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आज चुनमुन सड़क पर खड़े होकर गौमांस के साथ साथ सड़क से गुजरनी वाली खुबसूरत कन्याओं को भी दूर से ही सूंघ रहा है | एक बड़े नेता ने चुनमुन के सर पर हाथ रखा हुआ है, इसलिए पुलिस और कानून इन्हें देख कर दूर से ही सलाम करते हैं | ये कह दें बकरी को गाय तो कानून हाँ में हाँ मिलाएगा, ये कह दें, पनीर को गौमांस तो फोरेंसिक लेब प्रमाणपत्र दे देगा कि चुनमुन की योग्यता पर संदेह नहीं किया जा सकता | ये जब चाहें किसी को पीट दें, जब चाहें किसी की जान लें… सब कानूनी रूप से वैध… क्योंकि ये खुद ही कानून हैं | ~विशुद्ध चैतन्य

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