पुराणों में बताया गया है कि कुछ ऐसे लोग और घर हैं जिनके यहां भोजन नहीं खाना चाहिए

अन्न और मन का आपस में घनिष्ठ संबंध है तभी तो कहा जाता है, जैसा खाएं अन्न, वैसा बने मन। अन्न के प्रभाव से ही मन की सोचने समझने की शक्ति विकसित होती है। प्राचीन काल से ही आपसी रिश्तों में घनिष्ठता और प्रेम बढ़ाने के लिए लोग रिश्तेदारों और मित्रों को अपने घर खाने पर आमंत्रित करते आए हैं और यह परंपरा आज भी निभाई जाती है पर क्या आप जानते हैं हमें किन लोगों के घर का भोजन करना चाहिए और किनका नहीं पुराणों में बताया गया है कि कुछ ऐसे लोग और घर हैं जिनके यहां भोजन नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे पाप तो बढ़ते ही हैं साथ ही पुण्य भी नष्ट होते हैं

  • किसी भी महिला की पहचान उसके चरित्र से होती है। चरित्रवान महिला ही अपने गुणों से घर को स्वर्ग बनाती है। ऐसी स्त्री के घर में अन्नपूर्णा मां स्वयं निवास करती हैंं। उसकी रसोई में पका भोजन प्रशाद समान होता है। इसके विपरित चरित्रहीन महिला के घर का भोजन खाया जाए तो पाप कर्म बढ़ते हैं।
  • जो लोग दूसरों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं, सही और गलत का भेद भुलकर धन कमाने को प्रथामिकता देते हैं ऐसे लोगों के घर मेहमान बन कर जाएंगे और उनके घर का भोजन ग्रहण करेंगे तो आप पर भी उनके चरित्र में बसी नकारात्मकता का संचार होने लगेगा।
  • किसी रोगी के घर उसकी खबर लेने जाएं तो कदापि उस घर का अन्न और जल ग्रहण न करें क्योंकि अस्वस्थ व्यक्ति के घर के वातावरण में भी रोग के कीटाणु हो सकते हैं जो कि निरोगी व्यक्ति को भी रोगी बना सकते हैं।
  • जब कोई व्यक्ति खाना बनाता है तो उस खाने में उस व्यक्ति के व्यक्तित्व के गुण भी आ जाते हैं। अत जो व्यक्ति स्वभाव से गुस्सेल हो उसके हाथ का बना भोजन न खाएं अन्यथा उसके गुस्से का अवगुण आपके भीतर भी प्रवेश कर जाएगा।
  • धर्म शास्त्रों में किन्नरों को दान देने का अत्यधिक महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इन्हें खुश करने से असीम सुखों की प्राप्ति की जा सकती है। किन्नरों को दान देने वालों में अच्छे-बुरे, दोनों प्रकार के लोग होते हैं कौन किस भाव से दान दे रहा है यह कोई नहीं जानता इसलिए उनके घर भोजन नहीं खाना चाहिए।
  • जो लोग अपने घर के नौकरों का ठीक ढ़ग से ध्यान न रखते हों, उन्हें बेवजह परेशान करत हों उनके यहां भोजन नहीं खाना चाहिए क्योंकि नौकरों द्वारा दि गई हाय आपको भी लग सकती है। जब भी किसी के घर भोजन के लिए जाए तो वापसी पर उस घर के नौकरों को कुछ इनाम या रूपए पैसे अवश्य दें। इससे वो खुश होकर आपको आशीर्वाद देंगे।
  • निंदा और चुगली से अच्छे खासे रिश्तों में दरार आ जाती है। कुछ लोग अपने घर में दावत इसी प्रयोजन से रखते हैं की दूसरे लोगों की निंदा और चुगली करके आनंद उठाएं। ऐसे लोगों के घर भोजन न करें अन्यथा आप भी अनजाने में पाप के भागी बन जाएंगे।
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