यह सब घटिया राजनीति है और कुछ नहीं

भिलाई में बेघर हुए लोगों का धरना प्रदर्शन

शामली की घटना को लेकर हिंदुत्व के ठेकेदारों का बड़ा दबाव था कि मैं उस विषय को उठाऊं तो मैंने शामली की घटना को जानने का प्रयास किया | जो जानकारी मिली उससे यही निष्कर्ष निकला कि उत्तरप्रदेश में चुनाव होने वाले हैं और भाजपाई राजनीति अपने पुराने फार्मूले को ही अपना रही है | मेरी समझ में नहीं आया कि तीन सौ से अधिक हिन्दू पलायन कर गये और प्रशासन को खबर ही नहीं हुई यह कैसे संभव हुआ ? दूसरी बात जब हिन्दुओं पर मुस्लिम अत्याचार कर रहे थे, तब सपा की मजबूत सरकार खामोश क्यों बैठी रही ? तीसरी बात वहां की पुलिस व प्रशानिक अधिकारी सोते क्यों रहे ? बात हज़म नहीं हो रही मुझे | और मुझे साफ यही समझ में आ रहा है कि यह सब सुनियोजित राजनैतिक षड्यंत्र है | हर चुनाव से पहले दंगे और इसी तरह की घटनाएँ एक आम बात हो चुकी हैं |

अब भाजपा यदि कह रही है कि यह घटना सपा सरकार की लापरवाही है तो गुजरात में जो मुस्लिम परिवार बेघर हुए वह किस सरकार की लापरवाही है ? फरीदाबाद में जो मुस्लिम परिवार बेघर हुए थे, जिनके घर जला दिए गये थे…. वह किस सरकार की लापरवाही है ? छत्तीसगढ़ में जो सात सौ परिवार बेघर हुए वह किस सरकार की लापरवाही है ?

तो यह सब घटिया राजनीति है और कुछ नहीं, लेकिन परेशान जनता होती है, मारी जाती जनता ही है | राजनेताओं के लिए राजनैतिक दांव पेंच है यह सब, राजनैतिक खेल है यह सब…..लेकिन यह खेल उस क्रूर खेल की तरह है, जिसमें छोटे बच्चे को ऊँट की पीठ पर बाँध कर दौड़ाया जाता है | लोग दांव लगाते हैं उस दौड़ पर कि कौन सा ऊंट जीतेगा ठीक इसी प्रकार इस खेल में भी निर्दोष नागरिकों को चुनावी ऊँटों में बांधकर दौड़ाया जाता है | दांव लगाये जाते हैं और फिर हार जीत तय होती है चुनावी मैदान में राजनैतिक ऊँटों का | चुनाव हो जाने के बाद कोई नहीं पूछता कि उन पीड़ितों का क्या हुआ, जिन्दा भी हैं या मर-खप गये…बस एक दूसरे को बधाईयाँ देने में व्यस्त हो जाते हैं | अच्छे नस्ल के ऊँटों (नेताओं) की खरीद-फरोख्त शुरू हो जाती है | चुनाव से पहले जो जानी दुश्मन बने दिखाई दे रहे थे वे आपस में गले मिलते नजर आते हैं | जो चुनाव से पहले किसी एक पार्टी से चुनाव लड़ रहा था, वह अब दूसरी पार्टी में नजर आने लगता है….. और जनता मुर्ख बन जाती है | अभी दो साल पहले हुए चुनाव से भी जनता ने कोई सबक नहीं लिया होगा… कांग्रेस मुक्त, भ्रष्टाचार मुक्त भारत की बात कही गयी और घोटालेबाज कांग्रेसी भाजपा में दिखाई दिए यानि भ्रष्टाचार से किसी भी पार्टी को कोई आपत्ति नहीं है | और सबसे बड़ी बात तो यह कि समाज में जो धर्म और जाति के नाम पर नफरत फैलाते हैं, धर्म और जाति के आधार पर जनता को आपस में लड़ाते हैं, वे सम्मानित नेता माने जाते हैं… यानि जो संविधान के विरुद्ध कार्य करे वह सबसे अच्छा नेता… वाह ! और जनता ऐसे नेताओं के पीछे जयकारा लगाती घुमती फिरती है | फिर कहते हैं कि हम भारतीय हैं हम सनातनी हैं, अनेकता में एकता हमारी संस्कृति है | मुझे नहीं पता था कि एकता के अंतर्गत नेता, अपराधी और भूमाफियाओं की आपसी गठबंधन भी शामिल है |

मैं अपने ही गाँव में देखता हूँ कि मुखिया ही भूमाफियाओं से मिला हुआ है और यहाँ भूमि बेचने में पूर्ण प्रतिबन्ध होने के बाद भी धड़ल्ले से भूमि बेचीं और खरीदी जा रही है | गरीब किसानों की विवशता का लाभ उठाकर मुखिया उनसे औने-पौने दामों में जमीन खरीद लेता है और फिर बाहरी लोगों को बेच देता है | फर्जी दस्तावेज तैयार करवा लिए जाते है और सारे प्रशासनिक अधिकारी थोड़े से पैसों के लालच में सबकुछ अनदेखा कर जाते हैं | शिकायत करने पर भी कोई कार्यवाही नहीं होती | आम जनों की बात तो छोडिये, स्वयं एसडीओ को त्राहिमाम लेटर लिखना पड़ा क्योंकि जिस जमीन पर अवैध अधिग्रहण को उन्होंने निरस्त कर दिया था, उसे उच्चअधिकारी ने पास कर दिया कुछ रूपये लेकर | और उच्चअधिकारी भी ऐसा कि ऑफिस में ही शराब के नशे में धुत्त मिलता है | तो जनता शिकायत के लिए जाए तो जाये कहाँ ?

छतीसगढ़ की ही घटना लें तो पायेंगे कि कुछ उद्योगपति या बिल्डर्स को खुश करने के लिए सात सौ परिवारों को उजाड़ दिया गया… और वह भी खुद सरकार ही यह काम कर रही है.. तो क्या अर्थ निकाला जाये ? कि सरकार खुद ही भूमाफियाओं की सरदार है ? तो जब सरकार ही भूमाफियाओं का काम कर रही है तो फिर ये गाँव के छोटे मोटे, मुखिया क्यों नहीं करेंगे ? और कौन रोकेगा इन्हें ?

तो राजनीतिज्ञ जनता के हित में कार्य नहीं करते, केवल व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पूंजीपतियों की गुलामी करते है | और कितने आश्चर्य की बात है कि यही नेता और सरकार खुद को जनता की हितैषी प्रदर्शित करती है | सारे बिके हुए पत्रकार और मीडिया, इन सरकारों की जय जयकार करती फिरती है |

बड़ा दुःख होता है यह सब देखकर | एक वह समय था जब राणा प्रताप और लक्ष्मीबाई जैसे शासक होते थे जो अपनी जमीन और जनता के लिए, अपनी जान जोखिम में डालकर शत्रुओं से संग्राम के लिए उतरते थे और एक आज के नेता हैं जो अपनी ही प्रजा को नोच खसोंट रहें हैं | अपनी ही प्रजा को मुर्ख बना रहे हैं वोट के लालच में | अपनी ही प्रजा के हित के लिए कार्य करने के स्थान पर उनको अपनी भूमि छोड़ने के लिए विवश कर रहे हैं ताकि वह भूमि किसी और को बेचीं जा सके.. न तो ग्राम के विकास में मुखिया की कोई रूचि है, न राज्य के विकास में मुख्यमंत्री की और न ही राष्ट्र के विकास में प्रधानमंत्री की…अरे हाँ में तो भूल गया..ये तो आधुनिक नेता हैं आधुनिक शासक हैं ये आधुनिकता पर विश्वास रखते हैं | आधुनिकता यानि खेत-खलिहान, जंगल-पहाड़ मुक्त औद्योगिक विकास | इनको कारखाने चाहिए, नागरिक रहें न रहें, किसान रहें न रहें | इनको मिसाइल और हथियार खरीदने बेचने हैं….चाहे जनता महंगाई और बेरोजगारी से मर जाये | बस धंधा होना चाहिए |

तो शामली की घटना पर शोर मचाने वालो, दुनिया को मूर्ख मत बनाओ… अब हर खेल समझ में आ चुका है जनता को | अब अख़बारों और न्यूज़ चैनलों की सच्चाई भी सभी के सामने आ चुकी है… बहुत ही कम ऐसे पत्रकार और रिपोर्टर बचे हैं जो निर्भीकता से अपना दायित्व निभा रहे हैं, अधिकांश तो दुनिया में केवल बीवी बच्चे पालने और चंद रुपयों के लिए ईमान बेचने के लिए ही आये हैं | बहुत हद तक जनता अब चेत चुकी है अब और दंगे और शामली जैसी घटनाएँ हुईं तो जनता के सब्र का बांध टूट जायेगा |

मैं उन धार्मिकों से भी कहना चाहता हूँ जो हिन्दू-मुस्लिम खेलते रहते हैं कि अब भी होश में आ जाओ | अपने ही लोगों को इन नेताओं के हाथों का खिलौना मत बनाओ | ये सभी इंसान हैं कोई भेड़-बकरी नहीं कि अपने शौक के लिए इनको हलाल करते फिरो | अपना धर्म और अपनी मान्यताएं अपने घर तक ही सीमित रखें और भारतीय बन जाएँ | एक दूसरे से जब मिलें तो भारतीय बनकर ही मिलें तभी सभी का भला होगा | तभी राष्ट्र और नागरिक समृद्ध होंगे वरना धर्म और जाति के नाम पर आपस में कुत्ते बिल्लियों की तरह लड़ते मरते रहोगे और विजय माल्या लूट कर निकल जायेगा |

जापान से कुछ सबक ले लो यदि राष्ट्रभक्ति व राष्ट्र के प्रति समर्पण किसे कहते हैं नहीं पता तो | ~विशुद्ध चैतन्य

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