तालिबानी मुसलमानों को इस्लाम से खारिज करने का एलान किया


यह एक अच्छी पहल कही जा सकती है मुस्लिम धर्मगुरुओं की तरफ से | आशा है ये धर्मगुरु इसी प्रकार जनता को जागरूक करते रहेंगे और आतंकवाद के विरुद्ध अभियान में विश्व का साथ देंगे |

ब्रिटेन के कुछ प्रमुख इमामों ने देश के उन मुस्लिम चरमपंथियों के खिलाफ फतवा जारी किया है ,जो इस्लामिक स्टेट में शामिल होने के लिए सीरिया और इराक जा रहे हैं। ‘धार्मिक प्रतिबंध’ फतवे में ब्रिटिश जिहादियों को दमनकारी और अत्याचारी इस्लामिक स्टेट में शामिल होने से मना किया गया है। इमामों ने सभी मुस्लिमों से इस्लामिक स्टेट की जहरीली विचारधारा का विरोध करने का आदेश दिया है। फतवा देने वालों में मेनचेस्टर, लीड्स, बर्मिघम, लीसेस्टर और लंदन के छह वरिष्ठ मुस्लिम विद्वान शामिल हैं। इस फतवे में कहा गया है, ‘ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन के सभी नागरिक मुस्लिम विचारधारा और धर्मशास्त्र के हिसाब से मातृभूमि के प्रति क‌र्त्तव्य से बंधे हैं। इसलिए उनके लिए सीरिया जाकर किसी पक्ष की तरफ से लड़ना प्रतिबंधित है।’ फतवे को पूर्वी लंदन की मस्जिद अल तावहिद के पूर्व इमाम शेख उसमा हसन ने लिखा है।

केरल के एक प्रसिद्ध मुस्लिम धर्मगुरु ने शनिवार को फतवा जारी कर अपने समुदाय के लोगों से इन दिनों कहर का पर्याय बने आइएस और अन्य आतंकी संगठनों का बहिष्कार करने को कहा है।

ऑल इंडिया सुन्नी जाम-ए-यातुल के उलेमा शेख अबु बकर अहमद ने कहा कि आतंकी संगठनों का समर्थन करना इस्लामी शरियत के खिलाफ है। फतवा में कहा गया है कि आइएस और उसके स्वघोषित खलीफा किसी तरह से इस्लाम का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। वे न सिर्फ इस्लाम विरोधी, बल्कि संपूर्ण मानव जाति के शत्रु हैं। इराक और सीरिया में आम जनता के साथ उनके क्रूर व्यवहार से इस्लाम की बदनामी हो रही है। अहमद ने कहा कि मुस्लिम जगत के लिए गैर इस्लामी संगठनों की ओर से उत्पन्न खतरों का संज्ञान लेना बहुत जरूरी हो गया है। इस्लामवादियों के छद्म वेश में बनाए जा रहे मुस्लिम आतंकियों के संगठनों से खुद इस्लाम को खतरा उत्पन्न हो गया है। साथ ही अतिवादियों या आतंकी संगठनों को किसी तरह का समर्थन शरियत के खिलाफ है।

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दरगाह आला हजरत के उर्स में आए उलमा ने पाकिस्तान के पेशावर में मासूम बच्चों के कत्लेआम पर सख्त एतराज जताया। उन्होंने तालिबानी मुसलमानों को इस्लाम से खारिज करने का एलान किया और कहा कि उनकी सोच और नजरिया मजहब से मेल नहीं खाती है। उन्होंने गोलीबारी का निशाना बने बच्चों के घरवालों के लिए सब्र की दुआ की गई।

तकरीर करते हुए मारहरा की खानकाहे बरकातिया नूरिया के सज्जादानशीन सैयद नजीब मियां ने कहा कि पेशावर में जो कुछ भी हुआ, वह इस्लाम नहीं है, दीन नहीं है। मासूम बच्चों पर गोलियां चलाने की वारदात से दिली तकलीफ पहुंची है। उसकी जितनी मुखालफत की जाए कम होगी। दुआ करते हुए कहा कि अल्लाह मासूम बच्चों का कत्लेआम करने वालों को बर्बाद कर दे। उन्होंने कहा कि तालिबान मुसलमान नहीं हैं। उनका एक भी काम इस्लाम से मेल नहीं खाता। वे उस तालीम के मुखालिफ हैं, जिसके लिए पैगंबर-ए-इस्लाम ने चौदह सौ साल पहले कहा कि तालीम हासिल करने के लिए चीन जाना पड़े तो जाओ। लिहाजा तालिबान मुसलमान नहीं हैं। उनकी इस बात की ताईद (समर्थन) मंच पर बैठे सभी उलमा ने की। इससे पहले तड़के तकरीर की महफिल में उलमा ने तालिबान पर कुफ्र का फतवा लागू किया। तहरीक तहफ्फुज-ए-सुन्नियत के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना मुफ्ती मुहम्मद सलीम नूरी ने कहा कि तालिबान काफिर हैं। मीडिया से आह
्वान किया कि तालिबान को इस्लामी तालिबान नहीं लिखा जाए। उधर, मदरसा जामियातुर्रजा इस्लामी स्टडी सेंटर की इमाम अहमद रजा इंटरनेशनल कांफ्रेंस में अल्लामा जियाउल मुस्तफा और इंग्लैंड से आए मौलाना फरोग उल कादरी ने कहा कि आइएसआइएस संगठन गैर इस्लामी है। उसे इस्लाम का हिस्सा नहीं कहा जा सकता। दोनों कार्यक्रमों में तालिबान के हाथों मारे गए बच्चों के घरवालों के लिए सब्र की दुआ की गई।

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Courtesy: http://www.jagran.com

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