क्या सीखा इतिहास से हमने नफरत के सिवा ?

कहते हैं इतिहास से हमें शिक्षा मिलती है, लेकिन कैसी शिक्षा ली हमने ?

पाकिस्तान ने आतंकवादियों को पाला-पोसा और आज वही उसका शिकार हो रहा है | वहाँ भी शिया-सुन्नी के आपसी झगड़े के कारण तालिबान अपनी शैतानी हरकतों में कामयाब हो रहा है | निर्दोष मासूमों को मारकर उन्होंने सिद्ध कर दिया कि उनमें मानवता नाम की चीज नहीं है | वे या तो पशु हैं या दानव, लेकिन मानव तो बिलकुल भी नहीं है | फिर उनका किसी भी मानवीय धर्म से कोई लेना देना भी नहीं है | यह भी पता चलता है कि उनके हथियार निहत्थों पर ही उठ सकते हैं, हथियारबंद सैनिकों के सामने उनके होश उड़ जाते हैं | ऐसे कायरों को यदि मुस्लिम समाज मूक समर्थन दे रहा है तो यह उनके लिए ही घातक हो रहा है | कम से कम भारत के सभी मुस्लिमों को एकजुट होकर उनको धर्म से बहिष्कृत कर देना चाहिए ताकि चीन की तरह मुस्लिमों पर प्रतिबन्ध न लगे और विश्वभर में प्रतिबंधित धर्म के अनुयायी के रूप में न जीना पड़े | आज इनकी हरकतों के कारण मुस्लिम समाज कलंकित हो रहा है क्या अब भी ख़ामोशी ठीक रहेगी ?

यह नफरत ही है जो आज आतंक के रूप में सामने आ रही है लेकिन हम यह सोच कर खुश हो रहे हैं कि हम सुरक्षित हैं | हम भी सुरक्षित नहीं रहेंगे यदि हमने भी पेशावर की तरह ख़ामोशी रखी जब स्वातघाटी में तालिबानियों ने कब्जा किया था | यदि तभी पाकिस्तान समेत विश्व भर के मुस्लिम उनके विरोध में संघटित हो जाते | यदि आईसीस और अलकायदा को मुस्लिम समाज बहिष्कृत कर देता तो यह दिन तो न देखना पड़ता पकिस्तान को आज ?

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यदि हम आज पाकिस्तान में हुए विस्फोट पर ताली बजाएं तो अमानवीयता होगी | यह भारतीय संस्कृति व धर्म के विरुद्ध होगा | यह और बात है कि हम स्वयं कभी अपनी ही संस्कृति व धर्म के साथ नहीं चले | हम बार बार शत्रुओं के अधीन हुए लेकिन बार बार वही गलती करते रहे | परिवार बढ़ा, कई मत और सम्प्रदाय बढ़े, कई बाहर से आये भी आये और भारत का अंग बने | लेकिन तब हम शैव, वैष्णव और अन्य मतावलंबी लड़ते रहे और फिर लड़ते रहे वर्ण और जाति भेद की लड़ाई | आज तक हम एक नहीं हो पाए और आज भी हम वही कर रहे हैं | क्योंकि इतिहास से हमने कोई सीख नहीं ली |

अभी शाम को गाँव के दो बच्चे आये थे मुझे यह बताने के लिए कि यहाँ से सौ किलोमीटर दूर के गाँव से नक्सली बन्दूक की नोक पर हर घर से एक एक सदस्य को उठा कर ले गये अपने दल में शामिल करने के लिए | परिवार को धमकी दी गयी कि यदि एक सदस्य नहीं दिया तो पूरे परिवार को मार दिया जाएगा | अब कल वे मासूम पुलिस के मुठभेड़ में मारे जायेंगे और नाम होगा कि नक्सली मारे गए | जरा उन परिवार के विषय में सोचिये कि उनके दिल पर क्या बीत रही होगी | आज सौ किलोमीटर दूर हुई, कल हमारे अपने ही गाँव में हो सकती है यह घटना | इसलिए यह सोचकर बैठना कि पड़ोस की घटना है और हम सुरक्षित तो यह मुर्खता है |

इतिहास में हमने आपस में बहुत भेदभाव कर लिए कम से कम आतंकवादियों के विरुद्ध तो एकजुट हो जाओ भारतीयों !!!

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 ~विशुद्ध चैतन्य

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