सनातन धर्म एक अनपढ़ मुर्ख की समझ से

आज मन किया कि सनातन धर्म के ऊपर कुछ लिखा जाये | लेकिन कैसे लिखूं समझ में नहीं आ रहा…चलिए अब सोच ही लिया है कि कुछ लिखना है तो लिखूंगा ही क्योंकि पढ़ना तो आपको है, मुझे तो पढ़ना भी नहीं आता |

मैं जानता हूँ कि जो कुछ मैं लिखूंगा उससे धर्मों के जानकार बिलकुल भी सहमत नहीं होंगे | क्योंकि मैं अनपढ़ हूँ और कभी किसी वेदाचार्य या धर्माचार्य से कोई शास्त्र या धर्म का ज्ञान भी नहीं लिया | जो कुछ भी मैंने धर्म के विषय में जाना वह प्रकृति और भाग्य ने ही ठोकरों से सिखाया | तो आइये समझते हैं की सनातन धर्म का पालन सम्पूर्ण सृष्टि बिना शास्त्र या धर्मगुरु के मार्गदर्शन के कैसे करती है, जबकि जिनको शास्त्रों का ज्ञान है वे सनातन धर्म से बहुत दूर हो चुके हैं |

पहली बात तो यह कि सनातन धर्म कोई वैसा धर्म नहीं है जिसे धारण किया जा सके या फिर कोई आपको धार्मिक बना दे, जैसा कि अन्य धर्मों, सम्प्रदायों व पंथों के साथ है | सनातन धर्म का अर्थ आर्यसमाजी धर्म भी नहीं है कि हवन करो और मूर्तिपूजकों की निंदा करो, माँसाहारियों की निंदा करो तो ही सनातनी कहलाओगे | सनातन धर्म और वर्तमान हिन्दू धर्म में भी जमीन आसमान का अंतर हो गया है, जबकि पहले शायद न रहा हो | क्योंकि भारतीय धर्म सनातन धर्म पर ही आधारित था और यह सब ऋषियों ने घने जंगल और पहाड़ों के एकांत में रहकर ही समझा था | हिन्दू तो केवल एक देश के नागरिकों के समूह को कहा जाता है जैसे कि अमरीकन, जर्मन…… आदि | इन हिन्दुओं में सभी समाहित थे, आदिवासी भी थे और राजा और व्यापारी भी, शैव भी थे और वैष्णव भी, आस्तिक भी थे और नास्तिक भी… और इन सभी के समूह जो सिन्धु नदी के तट से कन्याकुमारी तक फैले हुए थे सभी हिन्दू ही कहलाते थे | इनमें आपस में झगड़े भी हुआ करते थे, लेकिन वे घरेलु झगड़े ही होते थे और बाद में सभी मिल भी जाते थे |

तब तक हम शिक्षित नहीं हो पाए थे और केवल पंडित पुरोहित और उच्च वर्ग के लोग ही शिक्षित हो पाते थे | बाकी लोगों में शिक्षा के प्रति इतना उत्साह नहीं था या और भी कई कारण रहे होंगे | तो धीरे धीरे भारत ने तरक्की की और लोग शिक्षित होने लगे | मुगलों और अंग्रेजों की गुलामी के बाद भारतीयों ने जाना कि हमारा भी कोई ऐसा धर्म होना चाहिए जो मुगलों की तरह ही हो, ताकि उस धर्म के नाम पर सभी को संगठित किया जा सके | तब उन्होंने हिन्दू धर्म की स्थापना की और माँसाहारियों को कोसना, मूर्तिपूजकों को कोसना….आदि आरम्भ कर दिया | जबकि पहले यह सब नहीं रहा होगा शायद | भैरव पूजकों को भी सम्मान था तो काली पूजकों को भी, सरस्वती पूजकों का भी सम्मान था तो लक्ष्मी पूजकों का भी….

आधुनिक हिन्दू धर्म मुस्लिम धर्म की नकल पर ही आधारित है और अपने मूल सिद्धांत से पुर्णतः विमुख | जिस प्रकार मुस्लिम अपने से कमजोरों के लिए सहयोगी नहीं होते, वैसे ही इन्होने भी सहयोग व परोपकार का मार्ग छोड़ दिया | पहले व्यापारी सड़कों के किनारे पानी व ठहरने की निःशुल्क व्यवस्था किया करते थे, आज पियाऊ तोड़ कर मिनरल वाटर की रेहड़ी लगाते हैं | निःशुल्क ठहरने की व्यव्यस्था तो सड़कों के किनारे अब समाप्त ही हो चुकी है, लेकिन रेस्त्राँ और होटल अवश्य खुलते चले जा रहें हैं | पहले राजा दरबार लगाया करता था और वहाँ न्याय हुआ करता था | आज न्यायालय में न्याय का व्यवसाय होता है | पहले राजा भेस बदलकर प्रजा की स्थिति जानने के लिए निकलता था आज राजा विदेशों की स्थिति जानने निकलता है | पहले एक देश किसी दूसरे देश का कर्जदार नहीं हुआ करता था, लेकिन आपस में व्यापार खूब होता था, जबकि आज जो देश कर्जा नहीं लेता लोग उसके राजा को राजा ही नहीं मानते | पहले राजा अपनी प्र
जा के हित को सर्वोपरी रखता था आज के राजा विदेशियों के हित को सर्वोपरि रखते हैं…..इसका अर्थ यह नहीं की उस समय कोई गरीब नहीं होता था या अत्याचारी नहीं हुआ करते थे…. वे भी होते थे लेकिन वह सब अपवाद थे | तो इस प्रकार आज जो धर्म भारत में चल रहा है, वह शुद्ध राजनैतिक और व्यापारिक धर्म है बिलकुल विदेशी धर्मों की तरह | जबकि भारतीय धर्म सनातन धर्म पर आधारित था | मेरे कई मुस्लिम मित्र भी रहे और मेरा उनके घर भी आना जाना रहा कभी….तब मुझे आश्चर्य होता था कि वे लोग बिलकुल हम लोगों की तरह ही थे | हमें कभी नहीं लगा कि हम किसी और धर्म के लोगों के घर गए हैं… कारण यही था कि वे भारतीय संस्कृति में पले-बढ़े थे तो सनातन संस्कृति स्वतः ही उनके व्यवहार में आ जानी थी | क्योंकि सनातन तो शाश्वत है किसी भी भी भेदभाव से मुक्त |

READ  रोना धोना मच गया चारों ओर कि धर्म खो गया...

अब प्रश्न की सनातन धर्म के लोग तो आज भी हैं, वे कौन सा बड़ा काम कर रहें हैं ? वे भी तो वही कर रहें हैं जो बाकी धर्मों के लोग कर रहें हैं ? बहुत हुआ तो सामूहिक शादियाँ करवा दी जैनियों की तरह या भंडारे करवा दिया पंजाबियों की तरह….बाकि तो वे भी ‘परधर्म निंदा परम सुखं’ पर ही जीवन यापन करते हैं ?

मेरा उत्तर होगा बिलकुल ठीक… ऐसा ही हो रहा है | ये लोग सच्चे गौ रक्षक होते हैं लेकिन गौ किसी दूसरे धर्म वालों के पास होगी तभी या फिर दुधारू हो और अपने गौशाला में हो | दुधारू न हो, बाँझ हो, तो मार पीट कर भगा दिया जाता है | यह पूछो कि अब वह कहाँ जायेगी तो कहते हैं कि रात में कसाई अपनी गाड़ी लेकर निकलते हैं, वे उठा लेंगे | मैंने पूछा कि क्या यह पाप नहीं होगा ? वे बोले कि नहीं हमने तो उसे मुक्त कर दिया अब ईश्वर की मर्जी और उसका भाग्य… हम भला दोषी कहाँ से हुए और हमें पाप क्यों लगेगा ? वैसे भी हम सुबह हवन करके पाप मुक्त हो जायेंगे यदि आपको ऐसा लगता है कि पाप लगेगा | (यह मेरी आँखों देखी घटना है जब मैं लगभग एक वर्ष के एक आर्यसमाजी धर्मोपदेशक के घर ठहरा था )

कारण एक ही है की सनातन धर्म का मूल भी नहीं समझ पाए और सनातनी हो गये लोग |

तो अब आइये समझते हैं कि सनातन धर्म है क्या:

 सनातन का अर्थ है जो शाश्वत हो, सदा के लिए सत्य हो। जिन बातों का शाश्वत महत्व हो वही सनातन कही गई है। जैसे सत्य सनातन है। तो अब सभी धर्मों के पास किस्से कहानियाँ हैं कहने के लिए कि उन्हीं के ईश्वर ने यह धर्म की किताब लिखी है | हिन्दू और मुस्लिमों की कहानियां तो कई बार इतनी मिलती है कि लगता है कि दोनों जुड़वां हैं | ईसाई, बौद्ध व अन्य पन्थ तो फिर भी ईमानदार हैं… जैसे ईसाई लिखते हैं ईसा पूर्व… अर्थात ईसा से पहले भी मानवों का अस्तित्व रहा |

READ  आज रात मैंने बहुत ही भयानक स्वप्न देखा |

वैदिक काल में भारतीय धर्म को सनातन धर्म ही कहा जाता था क्योंकि वह सनातन पर ही आधारित था | और सनातन वह धर्म है जो शाश्वत है सत्य है | जैसे सूर्य सत्य है, ग्रह सत्य है, तारे सत्य हैं… सूर्य से जो उर्जा प्राप्त होती है उसी से जीवनचक्र निर्मित होता है यह सत्य है |

सनातन धर्म वह धर्म है जिस पर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड गति व विस्तार करता है | जैसे पृथ्वी अपनी धुरी पर परिक्रमा करती हुई सूर्य की परिक्रमा करती है | लेकिन पृथ्वी का अपना एक अस्तित्व है और सूर्य का अपना एक आस्तित्व है | पृथ्वी अपना नियम नहीं तोड़ती और सूर्य अपनी मर्यादा नहीं तोड़ता | पृथ्वी चंद्रमा पर अत्याचार नहीं करती और चंद्रमा पृथिवी पर शीतल प्रकाश से रात्री में भी उजाला कर देता है | यह परस्पर विनिमय का सिद्धांत है और यही सनातन है | एक की कमी को दूसरा पूरा कर दे वह धर्म सनातन है | जैसे स्त्री और पुरुष का सम्बन्ध सनातन है | यहाँ विनिमय है प्रेम का सुख का सहयोग
का…यही सनातन धर्म है | लेकिन जब यह सहयोग शुद्ध व्यापार हो जाए (जैसे कि आज दहेज़ कम मिला तो जला दिया दुल्हन को ) तो वर्तमान हिन्दू धर्म हो जायेगा | इसलिए आज तक कभी हिन्दू धर्म के ठेकेदारों ने कभी इस प्रथा के नाम पर अपराध करने वालों के विरुद्ध कोई अभियान नहीं चलाया क्योंकि यही वर्तमान हिन्दू धर्म है | जैसे कि आज श्राद्ध करने से लेकर मोक्ष तक के लिए आपको फीस देनी पड़ती है और जो फीस न चुका पाए न तो उसका श्राद्ध हो पाता है और न ही मोक्ष मिल पायेगा |

जब तक  सहयोग मर्यादित है, बिना किसी तनाव या दबाव के है तो सनातन धर्म कहलायेगा | जैसे वृक्ष और हमारे बीच ऑक्सीजन और कार्बनडाई ऑक्साइड का आदान-प्रदान होता है, बिना किसी तनाव या दबाव के, कोई मोलभाव नहीं होता, बस हो रहा है | दोनों को सुख मिल रहा है… बस यही सनातन है |

मुझे आशा है कि इस अनपढ़ की अज्ञानता भरी ज्ञान से आपको कोई लाभ नहीं हुआ होगा | क्योंकि यह ज्ञान किसी शास्त्र को पढ़कर नहीं कह रहा यह तो वही ज्ञान है जो सभी अनपढ़ पशु-पक्षी, सूरज और चाँद स्वाभाविक रूप से व्यवहार में लाते हैं या यह कह सकते हैं कि उनको किसी ने शास्त्र व धर्म की किताबें नहीं पढ़ाई इसलिए वे ऐसी अधार्मिक कर्मों में लिप्त है | किसी दिन उनका भी कोई धर्म गुरु हो जाएगा और वह भी उनको धर्म के विषय में समझाएगा तब वे भी मानवों की तरह धर्म की रक्षा के लिए तलवार और कटार लेकर निकल पड़ेंगे | सूर्य को अभी अपनी कीमत का पता नहीं है, लेकिन जिस दिन वह धार्मिक हो जायेगा पृथ्वी से मोलभाव करना शुरू कर देगा | अभी चिड़ियाँ वृक्षों पर निःशुल्क अपना घोंसला बना लेती हैं. लेकिन जब धर्म के जानकार गुरु वृक्षों को भी धर्म सिखा देंगे तो वह भी चिड़ियों से किराया लेना शुरू कर देगा | हर पेड़ में एक टोकन बॉक्स लटका होगा और जो भी सुबह मोर्निग वाक् के लिए जाते हैं उन्हें जितने ग्राम ऑक्सीजन लेना होगा, उतना पैसा उसमें डालना होगा | कार्बनडाई ऑक्साइड वह होलसेल में कहीं और से ले लिया करेगा….. छोड़िये ये सब बातें… मैं भी के क्या क्या लिखता रहता हूँ…..आप सभी के पास अपने अपने धर्मगुरु और धर्मग्रन्थ हैं उनपर ध्यान लगायें या फिर अपनी अक्ल लगाएँ… मेरी मूर्खतापूर्ण अनपढ़ वाली बातों पर न जाएँ |

READ  सभी भारतीयों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

मैं यह भी मानता हूँ कि अनजाने में ही सही सनातन धर्म मानवों में पूरी तरह विलुप्त नहीं हुआ है | जैसे कि गूगल, फेसबुक, ट्विटर…. सभी सनातन धर्म पर ही आधारित व्यापार कर रहे हैं | हमें आपको कोई शुल्क नहीं देना पड़ रहा, लेकिन उनका व्यापार बढ़ता जा रहा है, वे सुखी व समृद्ध हुए चले जा रहें हैं | जबकि हम तो एक रूपये भी उनको नहीं दे रहे | ठीक इसी प्रकार हम चाहते तो अपने ही देश के गरीब किसानो और आदिवासियों के लिए भी योजना चला सकते थे, ताकि वे भी हमारी तरह आपनी सीमित आवश्यकताएं पूरी कर सकें और अनैतिक राह पर जाने को विवश न हों….लेकिन हम चूँकि धार्मिक और पढ़े-लिखे हैं तो ऐसी योजनाओं पर क्यों काम करें | यह तो नरकगामी हो जाएगा, अधर्म हो जाएगा | हम धार्मिक लोगों का कर्तव्य है कि गरीब को नकली दवाएँ दें ताकि वे और  बीमार पड़ें या कोई महामारी फैला दो ताकि मुसीबत टले और नई-नई दवाओं का प्रयोग भी हो जाए…क्योंकि हम तो धर्मशास्त्रों पर आधारित धार्मिक हैं !!

सारी दुनिया जानती है कि भारत की जनसँख्या के अनुसार और बौद्धिक क्षमता के कारण वे भारत पर अपना राज स्थापित नहीं कर सकते, इसलिए ही वे भारत को धर्म और जाति के नाम पर बाँट कर रखे हुए हैं | क्योंकि जब तक हम आपस में बंटे रहेंगे धूर्त नेता और उनके चमचों की दाल रोटी सिंकती रहेगी | धर्मगुरुओं की दुकाने चलती रहेंगी और गोदामों में सोना बढ़ता रहेगा | जब भी कभी क
ोई लोगों को एक करने का प्रयास करता है, सबसे पहले धर्म और जाति ही आड़े आती है | दो लोग यदि हाथ आगे भी बढाते हैं तो चार लोग पैर खींचने भी आगे आ जाते हैं | कुछ लोग भेस बदल कर सद्भाव व मैत्री पूर्ण ग्रुप में घुस जाते हैं और उपद्रव करना शुरू कर देते हैं…क्योंकि धर्म का इनको  कोई ज्ञान तो होता नहीं (माफ़ कीजिये का मेरा मतलब प्राचीन कालीन अनपढ़ों के धर्म के ज्ञान से था )

मैं जानता हूँ कि इतनी लम्बी बकवास और बे-सर पैर की शुद्ध मूर्खतापूर्ण बातें पढ़कर आप थक गए होंगे | जरा घर से बाहर निकलिए इस समय (पोस्ट में टाइम देख लीजिये) और देखिये कि क्या चाँद निकला है ? यदि निकला है तो थोड़ी देर के लिए उसे निहारिये और आप थोड़ी ही देर में पायेंगे कि वह अजनबी नहीं है, वह आपका अपना है | वह प्रेम और अपनापन उससे मिलेगा जो शायद पहले कभी नहीं मिला…क्योंकि यही सनातन है | -विशुद्ध चैतन्य

लेख से सम्बंधित अपने विचार अवश्य रखें

1
लेख से सम्बन्धित आपके विचार

avatar
1 Comment threads
0 Thread replies
0 Followers
 
Most reacted comment
Hottest comment thread
1 Comment authors
Chetan Jadhav Recent comment authors
  Subscribe  
newest oldest most voted
Notify of
Chetan Jadhav
Guest
Chetan Jadhav

IT is good for young people and future generations. We always save our satya santam dharm. IT WHOLE WORLD IS A FAMILY