समाज नई राह पर चलने वालों को सहन नहीं कर पाता

समाज हर संभव प्रयास करता है व्यक्ति को भेड़ बनाने में | लेकिन जब वह व्यक्ति समाज के थोपे मान्यताओं और कायरता को नकार देता है और अंतर्मन की सुनने लगता है तब वह समाज में परिवर्तन लाता है | वह नई दिशा दिखा पाता है लेकिन स्वयं का बलिदान देकर | क्योंकि समाज नई राह पर चलने वालों को सहन नहीं कर पाता |

शहीद भगतसिंह नास्तिक थे और उस समय जब संघी अंग्रेजों की जी हुजूरी कर रहे थे और साथ ही कई तथाकथित सभ्य भारतीय भी उनकी जय जयकार कर रहे थे, तब भगतसिंह ने अन्याय व अत्याचार के विरोध में स्वर उठाया | तब लोगों ने उसे आतंकवादी कहा…. लेकिन आज लोग उसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि वह आये और देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करवाए | कोई माँ नहीं चाहती कि उसका बेटा भगतसिंह बने, अन्याय व अत्याचार के विरुद्ध लड़े, बल्कि हर माँ-बाप का सपना होता है कि उनका बेटा डॉक्टर बने, इंजिनियर बने, सरकारी नौकर बने….और राष्ट्र व नागरिकों की चिंता करना छोड़ दे | अच्छे नोट छापे और ऐश की जिंदगी जिए, न कि दूसरों के दुःख-दर्द को अपना कर उन्हें दूर करने का प्रयास करे | यदि समाज सेवा भी करे तो डॉक्टरों की तरह करे ताकि सेवा का सेवा हो जाए और मोटी कमाई भी होती रहे | डॉक्टरों को तो मुर्दों से भी कमाने मिल जाता है… इसलिए डॉक्टर से बेहतर सेवा का क्षेत्र तो और कोई हो नहीं सकता |

कुछ लोग सेवा करने के नाम पर नेता बन जाते हैं या बाबा बन जाते हैं | दोनों ही प्रोफेशन में मोटी कमाई है, लाखों की हेरा-फेरी है, पनामा जैसे महान कांडों में नाम रोशन होने की सम्भावना भी अधिक होती है | वैसे भी घोटालों, हेरा-फेरी में नाम आना आजकल गर्व व सम्मान की बात होती है | जो जितना बड़ा घोटालेबाज उतना अधिक सम्मान |

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अब भला ऐसे में कोई माँ अपने बच्चे को भगतसिंह क्यों बनाना चाहेगी ?

लक्ष्मीबाई, रानीदुर्गावती, झलकारीबाई, राणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, और न जाने कितने स्वतंत्रता सेनानी जो धर्म और जाति के भेदभाव से ऊपर उठकर अंग्रेजों के अत्यचार के विरुद्ध आवाज ही नहीं उठाये, बल्कि ईंट का जवाब पत्थर से दिया | लेकिन आज हमारे नौजवान, भारत माँ की जय के नारे लगाकर आपस में ही सरफुटव्वल कर रहे हैं | जिन के विरुद्ध संगठित होना चाहिए, उनके विरुद्ध कोई ध्यान नहीं दे रहा | किसी का ध्यान नहीं है सुखाग्रस्त क्षेत्रों पर, किसी का ध्यान नहीं है भूमाफियाओं पर, किसी का ध्यान नहीं है, जल व वायु प्रदुषण व अल्पता पर | कोई इंजिनियर या वैज्ञानिक यह शोध नहीं कर रहा कि सागर के पानी को मीठा बनाकर कैसे सदुपयोग किया जाए | कोई शोध नहीं कर रहा कि भूमि में घटता जल स्तर कैसे रोका जाए | कोई नहीं कह रहा कि बोतल बंद पानी की फैक्टरियों को निर्देश दें कि वे सागर से जल को संशोधित करके पीने लायक बनाने की तकनिकी को अपनाकर वहाँ से पानी की लें, न कि रिहायशी या कृषि क्षेत्रों से |

जनता बैठी है भगतसिंह के इंतजार में यह नहीं कि खुद ही भगतसिंह बन जाएँ | सरकार बैठी है रामभरोसे, कि जब राम मंदिर बनेगा और राम जी आयेंगे, तभी आम जन की समस्या सुधरेगी, तब तक अम्बानी अदानी की गरीबी दूर करेंगे | किसान बैठे हैं रामराज्य के इंतजार में, यह नहीं कि आपस में मिलकर ही समस्या का समाधान खोजें, बनिस्बत इसके कि सरकार और भगवान् भरोसे हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें | हर कोई बैठा है चमत्कार के इंतजार में और नेता-अभिनेता और बाबा लगे हैं जनता को मुर्ख बनाने में | ~विशुद्ध चैतन्य

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