ब्रम्हज्ञानी

एक रेडियो या फ़ोन की समस्या यह है, उसे सारे सिग्नल सुनने पड़ते हैं । जबकि नेताओ, पूंजीपतियों, धार्मिकों और सरकारी बाबुओं को केवल अपने मतलब के सिग्नल ही सुनाई देते है ।

साधू-संत और उनके चेले भी साधना से यही शक्ति प्राप्त कर लेते हैं और ब्रम्ह सुख व शान्ति का वैसा ही आनंद प्राप्त करते हैं, जैसा कि हमारे नेताओं और उनके दुमछल्लों को प्राप्त होता है । 

यह दुनिया माया है वास्तव में दुःख, शोषण, गरीबी, बलात्कार, हत्या….जैसी कोई चीज नहीं होती । यह सब मन का भ्रम है और जब हम इस भ्रम से मुक्त हो जाते हैं, तब हम नेता या ब्रम्हज्ञानी संत हो जाते हैं । -विशुद्ध चैतन्य

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