आग लगा दो इन सबको..

मैं किसी गेराज के पास खड़ा था और पास ही कई ढाबे भी थे । बड़ी बड़ी ट्रक और लारियाँ वहाँ आकर रुक रही थी और लोग अलग-अलग ढाबे में खाने के लिए जा रहे । कई कारें भी रुकी हुई। थी और उनसे पढ़े-लिखे से दिखने वाले सजे-धजे लोग भी उतर कर ढाबों की ओर जा रहे थे तो कुछ खुले घास के मैदान की में जा कर बैठ रहे थे चटाई बिछाकर । कुछ परिवार बड़े बड़े विलायती टिफिन लेकर बैअग्नि नठे थे वहाँ । शायद खाना घर से ही बनाकर लाये थे । छोटे-छोटे बच्चे आपस में खेलने में मगन थे ।

“बचाओss…बचाओss…कोई मुझे बचाओ…” किसी बच्ची के चिल्लाने की आवाज सुनकर पीछे मुड़ा तो देखता हूँ कि दो-तीन क्लीनर और ब्लूलाइन बस कंडक्टरों जैसे दिखने वाले 15-16साल के लड़के एक बच्ची को उठाकर ले जा रहें हैं । इतने सारे लोग खड़े हुए हैं वहाँ लेकिन किसी को उसकी आवाज सुनाई नहीं पड़ रही ।

कुछ लड़के और आ जाते हैं वहाँ और उन लड़कों की तारीफ़ करते हैं कि बहुत बढ़िया माल है यार…फिर वे भी जाकर कुछ बच्चियों को उठाकर ले आते हैं । पीछे गेराज के अंदर से कुछ बाहर फेंकते हुए देखता हूँ कुछ बुजुर्गों को… ध्यान से देखता हूँ तो एक लड़की हैं बेहोश है या मर चुकी है । बदन में कोई कपडा नहीं था…. अचानक थोड़ी दूर और देखता हूँ तो वह कूड़ा डालने की जगह थी और वहाँ ढेरों मरी या अधमरी लड़कियाँ पड़ी हुई थी ।

कुछ लोग पार्कों में खेल रही छोटी छोटी बच्चियाँ उठाकर ला रहे थे । और किसी को उनकी आवाज सुनाई नहीं दे रही थी । इस बीच एक बड़ा सा जुलुस वहाँ से गुजरता है “धर्म खतरे में है…धर्म को बचाना है…” के नारे लगा रहे थे । बच्चियां उनके पैर पकड़ती है लेकिन किसी को देखने तक की फुरसत नहीं थी । शायद समय पर रामलीला मैदान नहीं पहुँचे तो धर्म नहीं बचेगा और इनको खाली हाथ बिना धर्म लिए ही लौटना पड़ेगा । जब वे चले गए तो थोड़ी देर में कुछ और लोग गुजरे, “इस्लाम खतरे में है….इस्लाम को बचाना है…” के नारे लगाते पार्को में बैठे लोगों पर बम फेंकते, गोलियां चलाते, औरतों बच्चों को उठाते चले जा रहे थे ।

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अब तो मेरी सहनशक्ति जवाब दे गई थी क्योंकि इतना कुछ हो रहा था और लोगों को कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था । लोग पार्टी ‘ऑल नाईट’ गाने पर डांस कर रहे थे तो कुछ लो पटियाला पैग का मजा ले रहे थे । मैं दौड़ कर गया और उन लड़कों को पकड़ने की कोशिश की जो बच्चियों को उठाकर ला रहे थे । लेकिन मैंने देखा कि मैं उन्हें पकड़ ही नहीं पा रहा । मैं इस्लाम के रक्षकों से राइफल छीनना चाहा और मानवता के दुश्मन इन राक्षसों को मारने का प्रयास किया लेकिन वह भी व्यर्थ…. क्योंकि मैं न तो किसी को छू पा रहा था और न ही कोई मुझे देख पा रहा था । मैंने देखा थोड़ी दूर कुछ सिद्ध महात्मा लोग बैठे ध्यान कर रहें हैं । मैं भाग कर एक महात्मा के पास पहुँचा और बोला “महाराज मैं कुछ कर क्यों नहीं पा रहा हूँ… “

वे मुस्कुराये और बोले “महाराज आप अब कलियुग में नहीं हैं कलियुग तो समाप्त हो गया और ईश्वर ने इस युग में आपको शरीर ही नहीं दिया तो आप कुछ कर ही कैसे सकते हैं ?”

“लेकिन क्यों ??? मुझे शरीर नहीं मिला तो न सही, आप को तो मिला है ? आप कुछ क्यों नहीं कर रहे ? शर्म नहीं आती वहाँ बच्चियाँ सहायता के लिए पुकार रहीं हैं और आप लोग यहाँ धूनी रमाये बैठे हैं ?” मैंने हताश व व क्रोध से चिल्लाते हुए पूछा ।

“आपके पाखण्ड के कारण ही आपको इस युग में शरीर नहीं मिला । क्योंकि कलयुग में आप सन्यासी होकर भी देवी देवताओं की तस्वीरें पोस्ट नहीं करते थे, आप शास्त्रों के श्लोक पोस्ट नहीं करते थे, आप भजन कीर्तन नहीं करते थे, खुद को संत समझते थे और बाकी सभी को पाखंडी कहते थे…. सारे दिन संसारिक विषयों पर पोस्ट करते रहते थे इसलिए ईश्वर ने इस युग में आपको शरीर नहीं दिया । अगर आपने हमारी बात मानी होती कि जगत मिथ्या है और ईश्वर सत्य, तो आपको इस युग में भी शरीर
मिल जाता । अगर हमारी ही तरह आपने भी ईश्वर की चापलूसी और प्रशंसा की होती तो आपको भी….”

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“धिक्कार है ऐसा युग, तुम्हारे शरीर और तुम्हारे ईश्वर को । आग लगा दो इन सबको.. ” जोर से चिल्लाता हुआ वहाँ से भागा । भागते हुए मैं एक बियाबान जंगल में पहुँचा और जोर से ईश्वर को आवाज लगाईं “हे ईश्वर तूने मेरे साथ विश्वासघात किया, मुझे शरीर ही नहीं दिया ?”

“मैंने तुम्हे शरीर इसलिए नहीं दिया क्योंकि पिछले युग में मैंने तुमसे सबकुछ छीन लिया था ताकि तुम स्वयं से परिचित हो सको । तुम्हे ऐसी जगह ले जाकर रखा जहां कमाई का कोई साधन न हो और तुम एकांत में रह सको । लेकिन तुमने अपनी दिव्यशक्ति शक्ति का दुरूपयोग किया और वहाँ भी कंप्यूटर और फेसबुक का जुगाड़ कर लिया । तुम वहाँ से ही उलटे सीधे पोस्ट लिखने लगे….अरे पहले थोड़ी और ऊंचाई तो पकड़ते ? दो चार जन्म और इन्तजार कर लेते तो क्या बिगड़ जाता ? जो कुछ हुआ तुम्हारी अपनी गलती से…. इसलिए तुमसे इस युग में शरीर भी छीन लिया । अब देखना चाहता हूँ कि तुम इन पढ़े-लिखों और धार्मिकों की तन्द्रा कैसे भंग करते हो । मैं जानता हूँ कि ये लोग मेरे दिखाए मार्ग पर नहीं, स्वघोषित धर्म के ठेकेदारों और स्वार्थी नेताओं के दिखाए मार्ग पर चल रहे हैं । इसलिये दुःख भी इन्हीं लोगों को भोगना पड़ रहा है । मैं यह भी जानता हूँ कि तुमको मैंने अनपढ़ रखा ताकि कम से कम तुम तो मेरे दिखाए मार्ग पर चलो…लेकिन तुमने जरा जल्दी कर दी । वैसे तुम्हारी बातें इन पढ़े-लिखे विद्वानों की समझ में नहीं आएँगी और धार्मिक लोग तो तुम्हे देखते ही भगा देंगे…देखते हैं अब तुम क्या और कैसे करते हो…” ईश्वर यह कहते हुए मुस्कुराते हुए सामने प्रकट हुए ।

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“हे ईश्वर ! यदि तुझे चापलूसों और चमचों से इतना ही लगाव है तो उन्हें नीचे क्यों भेजता है, वहीँ गले से लगाकर क्यों नहीं रखता ? न दे शरीर मुझे, मैं खुद कोई न कोई जुगाड़ लगा लूँगा लोगों को जगाने के लिए । कलियुग में नहीं जगा पाया तो न सही, इस युग में….अरे…ये कौन सा युग है ?” मैंने गुस्से से ईश्वर की ओर देखकर पूछा ।

“नेता युग !” इतना कहकर ईश्वर अंतर्ध्यान हो गए । मैं इधर उधर पागलों की तरह भागने लगा और भागते-भागते एक बहुत बड़े मैदान में पहुँचा । वहाँ देखता हूँ कि कई अलग टीमें अलग अलग रंग की टोपियाँ और गमछा लटकाये दूसरी टीमों पर पत्थर और कीचड फेंक रहे हैं और नारे लगा रहे हैं, “हमरा नेता को जिताओ, देश को बचाओ…” कोई कह रहा था, “हमरा नेता आएगा रामराज लाएगा… अग्नि परीक्षा की आजादी दिलवाएगा ताकि दहेज़ हत्या रोकी जा सके । जिस को भी अपनी पत्नी पर शक हो वह उस को आग लगा कर देख सकेगा की पत्नी सही है या गलत…इसके लिए उनकी सरकार पेट्रोल आधी कीमत में देगी…” कोई कह रहा था हमरा नेता आएगा तो बम बनाने का कुटीर उद्दोग शुरू करवाएगा और लड़कियों की नीलामी के लिए सरकारी नीलामी-घर हर मोहल्ले में खुलवायेगा….” अचानक एक पत्थर मेरी ओर आया और मैं बचने के लिए पीछे हटा तो एक गड्ढे में जा गिरा…. मेरी आँख खुल गई और पता चला कि मैं पलंग से नीचे गिरा पड़ा हूँ । साँस बहुत तेज चल रही है और पसीने से तरबतर हूँ ।

कोई घटना किसी के सपने में कितना गहरा प्रभाव डालती है उसका अनुभव मिला । दरअसल कल रात हल्द्वानी में एक बच्ची के साथ घटी एक दुर्घटना की खबर ने मुझे अंदर तक हिला दिया था । उस घटना से सम्बंधित तस्वीर यहां दे रहा हूँ । ~ विशुद्ध चैतन्य

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