धर्म और इतिहास

एक बच्चे के पास कोई भूतकाल नहीं होता | उसके पास होता है वर्तमान और भविष्यकाल | उसकी यदि कोई चिंता होती है तो भविष्य की ही होती है अन्यथा वह निश्चिन्त है | जवान के पास भी भविष्य ही होता है चिंता करने के लिए लेकिन केवल वृद्ध के पास चिंता के लिए कुछ नहीं रहता | वह केवल अपने अतीत में जीता है |

शायद भारत अब वृद्ध हो चुका है इसलिए हमारे पास भविष्य की कोई योजनायें नहीं हैं | आज हम इतिहास भी पढ़ते हैं तो जो गलतियाँ की, जो मूर्खताएँ हुईं वे दोबारा न घटित हों उसके लिये कोई चिन्तन करने के स्थान पर राष्ट्र में कैसे वैमनस्यता बढ़ाई जाये उसके उपाए खोजे जाते हैं | चलिए मान लिया कि कोई मलेच्छ था जो चन्द्रगुप्त के नाम से प्रसिद्ध हुआ, चाणक्य नाम का कोई उपद्रवी रहा… सब लोग आपस में लड़ते रहे…. तो क्या आज भी लड़ते रहें ?

इस प्रकार एक दिन खोज निकाला जाएगा कि गीता भी सही नहीं है और जो कुछ उसमें लिखा है वह भी सब झूठ है, महाभारत भी एक दिन झूठ सिद्ध किया जाएगा और वेद-ऋग्वेद भी झूठ सिद्ध किया जाएगा | उद्देश्य क्या है ? एक विशिष्ट वर्ग को भारतीय बताना और बाकियों को देश से बाहर निकालने के उपाय करना ?

मुझे इतिहास में बचपन से कोई रूचि नहीं रही और जिसने जो कहा मान लिया | आप लोग सही हैं या नहीं इससे भी मुझे कोई मलतब नहीं है | क्योंकि इतिहास से हमने कुछ अच्छा नहीं सीखा | सीखा तो केवल निंदा और घृणा |

और यदि इतिहास में पीछे ही जाना है तो फिर वहाँ पहुँचिये जब पृथ्वी में जीवन आरम्भ हुआ था जो कि शैवाल के रूप में था | अब उन शैवालों में हिन्दु शैवालों की संख्या कितनी थी और मुस्लिमों की कितनी थी ? ब्राह्मण कितने थे और शुद्र कितने थे ? शिया कितने थे और सुन्नी कितने थे ? पूरी वंशावली ही निकालने का शौक है तो वहाँ से शुरू कीजिये… लेकिन तब भी वंशावली सही नहीं हो सकती क्योंकि शैवाल के भी पूर्वज रहें होंगे ?

कई हज़ार साल पहले की बात है | एक बहुत ही प्यारा और सुन्दर गाँव था जिसमें सभी बहुत ही नेक व धार्मिक लोग रहा करते थे | उन्होंने कभी चोरी चकारी या कोई भी अनैतिक न तो कभी किया था और न ही कभी होने दिया था अपने गाँव में |

एक दिन गाँव में भयंकर बाढ़ आ गई और कई लोग बहने लगे | बहते बहते वे एक पहाड़ी के पास से गुजरे | पहाड़ी पर एक नौजवान अपनी भेड़ें चरा रहा था | जब उसने देखा कि कुछ लोग नदी में बहकर आ रहें हैं तो उसने एक मोटी रस्सी नीचे फेंक दी और चिल्लाकर कहा कि रस्सी की तरफ आने की कोशिश करो | सभी रस्सी की और आने लगे और धीरे धीरे सभी रस्सी से लटक गए |
नौजवान ने चैन की साँस ली और ईश्वर को धन्यवाद् किया और कहा कि ठीक है एक एक करके ऊपर आते जाइए | लोग धीरे धीरे ऊपर चढ़ने लगे | उन्हीं में से एक व्यक्ति महान इतिहासकार था और अमेरिका से भारतीय संस्कृति और इतिहास की डिग्री ली थी |

उस लड़के की शक्ल को गौर से देखता रहा और थोड़ी देर बाद चिल्लाया कि यह लड़का तो तिहाड़ से भागा हुआ अपराधी है | इसने एक ढाबे से दो रोटी चुराई थी इसलिए इसे जेल की सजा हुई थी | और हम लोगों ने ऐसे पापी के हाथ का छुआ रस्सी पकड़ ली ? हमारा तो धर्म ही भ्रष्ट हो गया | हम अपने गाँव जाकर क्या मुँह दिखाएँगे ?

तब तक दो तीन लोग ऊपर पहाड़ी पर पहुँच चुके थे और बाकी लोगों को बाहर निकलने में सहायता कर रहे थे | उस विद्वान् ने उन सभी को कोसना शुरू कर दिया | वे बेचारे बड़े धर्म संकट में पड़ गये कि क्या करें अब | इतनी देर में विद्वान् ने सभी को धिक्कारते हुए रस्सी छोड़ दी और नदी में फिर बहने लगा | बाकी धार्मिकों ने भी धर्म की रक्षा के लिए र
स्सी छोड़ दी और नदी में बहने लगे | जब पहाड़ी पर पहुँच चुके लोगों ने देखा तो वे भी नीचे नदी में कूद गए और बहने लगे |
नौजवान ने सुबह जब अखबार खोला तो पता चला की सभी धार्मिकों कि लाशें पुलिस ने नदी से निकाल ली हैं |

उस दिन से गाँव में रस्सी को छूना अशुभ माना जाने लगा और लोग रस्सी की जगह केवल अमेरिकन जंजीर का ही प्रयोग करते हैं | -विशुद्ध चैतन्य

READ  यदि आप ईश्वर कि रचना की रक्षा नहीं कर रहे, तो ध्यान रहे, न तो मोक्ष मिलेगा आपको और न ही ईश्वर |

लेख से सम्बन्धित आपके विचार

avatar
  Subscribe  
Notify of