सागर, विष्णु, सुदर्शन चक्र और चक्रवात

कितना आश्चर्य होता है जब मैं यह सोचता हूँ कि कितने महान रहे होंगे हमारे पूर्वज और कितने कुढ़ हैं हम | उन्होंने सुदर्शन चक्र की बात की तो हवा में नहीं की थी | सारे चक्रवात सागर से ही उत्पन्न होते हैं | विष्णु जी जो क्षीरसागर में विश्राम करते हैं, वह भी लोगों को यही समझाने के लिए कि यदि तुम लोग अधर्म के मार्ग पर चलोगे तो सागर में सो रहे विष्णुजी नाराज हो जायेंगे और सुदर्शन चक्र से अधर्मियों का नाश कर देंगे |

उद्देश्य उनका शायद यही रहा होगा कि लोग भय से ही सही अधर्म के मार्ग से बचेंगे | लेकिन आज अधर्मी की ही जय जय होती है और सत्कर्मी भूखों मरता है | विष्णु अब कल्पना हो गये और राम सत्य हो गये |

लेकिन ऐसा हुआ क्यों यह भी मैं कई बार सोचता हूँ | शायद विष्णु तो ईश्वर हैं और आलौकिक शक्तियों के मालिक इसलिए वह बहुत महत्वपूर्ण नहीं हैं | महत्वपूर्ण राम हो गये क्योंकि राम तो मानव रूप थे | उन्होंने मानव की तरह ही जीवन जीया और दुःख-सुख भोगे | इसलिए वे आदर्श बन गये | लोगों के लिए प्रेरणा के स्त्रोत बने और शायद अवतार का उद्देश्य भी यही था कि लोग बहाना न बनायें कि जो ईश्वर कर सकता है हम नहीं कर सकते |

लेकिन हम भी तो ईश्वर से कम महान थोड़े ही हैं | हमने राम को भी भगवान् बना दिया और उसे मूर्ति बनाकर मंदिर में बैठा दिया | अघोषित रूप से घोषणा हो गयी कि हम आपके आदर्शों पर नहीं चलेंगे और वही करेंगे जो हमें ठीक लगे | आप यहीं मंदिर में रहें आपके खाने पीने और कपड़े लत्ते में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे लेकिन बाहर मत निकलना | जब कभी हमें दर्शन करना होगा यहीं आ जायेंगे हम |

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विष्णु जी ने सोचा कि ये लोग मेरे सारे किये कराये पर पानी फेर रहें हैं, तो उन्होंने श्री कृष्ण के रूप में जन्म लिया और लोगों को फिर से सद्मार्ग की ओर ले चलने का प्रयास किया लेकिन मनुष्य तो अकलमंद प्राणी है यह विष्णु जी भूल गये | उन्होंने श्रीकृष्ण को भी मूर्ति बना कर बैठा दिया मंदिरों में |

आज राम और कृष्ण को मानने वाले भारत में प्रेमियों को ही मौत के घाट उतारा जाता है | दूसरे के बच्चे को प्रेम से पालने वाली माता यशोदा को पूजने वाले भारतीय गर्भ में ही बच्चियों की हत्या कर रहें हैं | गरीव सुदामा को भी गले लगाने वाले श्रीकृष्ण के देश में गरीब धनाभाव में अपना इलाज भी नहीं करवा पाता किसी अस्पताल में और न ही महँगी होती दवाएँ खरीद पाता है…..

फिर जब सुदर्शन चक्र चलता है तब लोग त्राहि माम त्राहि माम क्यों करते हैं ? ~विशुद्ध चैतन्य

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