श्री राम जी जब कोर्ट में आयेंगे तब मैं उन्हीं से ये प्रश्न करूँगा

लगता है बिहारी फिर अपने प्राचीन उच्चतम मानसिक स्तर को प्राप्त करने लगे हैं | लगता है फिर से वे चैतन्य होने लगे हैं | लगता है वे भेड़चाल से मुक्त होने लगे हैं और दिमाग का प्रयोग करने लगे हैं | शायद “एक बिहारी सौ पर भारी” वाली कहावत को चरितार्थ करने लगे हैं |

अभी हाल ही में एक बिहारी ने उच्चतम न्यायालय कि सदियों पुरानी परम्परा तोड़ दी जिसके अंतर्गत याचिका केवल अंग्रेजी में ही स्वीकार किया जाता था, बहस भी अंग्रेजी में ही होती थी… अब हिंदी में याचिका स्वीकार होंगी और बहस भी अगले महीने से हिंदी में ही हो सकेंगी | और यह श्रेय बिहार के वकील इंद्रदेव प्रसाद को जाता है | सर्वोच्च न्यायलय ने भी उनकी दलीलें सुनने के बाद उनकी याचिका को स्वीकार कर किया है।

आपको बता दें की हमारी न्याय व्यवस्था में आंग्ल भाषा में काम होता है। सर्वोच्च न्यायलय और सभी उच्च न्यायालयों में याचिका दायर करने के लिए और बहस करने के लिए मुख्य रूप से आंग्ल भाषा का ही इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अब इंद्रदेव प्रसाद के प्रयासों के कारण सर्वोच्च न्यायलय में हिंदी भाषा की गूंज सुनाई देगी जो हमारी न्याय व्यवस्था में एक नई शुरुआत होगी।

दूसरा महत्वपूर्ण कदम उठाया है बिहार के ही मेजरगंज थाना क्षेत्र के डुमरी कला गांव निवासी व अधिवक्ता ठाकुर चंदन कुमार सिंह को जिन्होंने भगवान रामचंद्र जी उर्फ भगवान राम जी व लक्ष्मण जी पर त्रेतायुग में हुई घटना को लेकर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के कोर्ट में शनिवार को एक मुकदमा दाखिल किया है। मामले की सुनवाई सोमवार होगी। इसमें आरोप लगाया गया है कि मां जानकी (सीता) का कोई कसूर नहीं था। इसके बाद भी भगवान राम ने उन्हें जंगल में वनवास क्यों भेजा। कोई भी पुरुष पत्नी पर इतना बड़ा जुर्म कैसे कर सकता है?

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केस दर्ज कराने वाले चंदन ने कहा कि वह भी मिथिला में पैदा हुए और सीता भी मिथिला में ही पैदा हुई थीं। लेकिन अयोध्या नरेश ने मिथिला की बेटी के साथ इंसाफ नहीं किया। सीता मैया को न्याय दिलाने के लिए यह केस दर्ज कराया है। मेरा मकसद सिर्फ सीता को न्याय दिलाना है। किसी धर्म या किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं। याचिका पर सुनवाई आज (०१ फरवरी २०१६) को होगी |

मैं भी चंदन कुमार का समर्थन करता हूँ और मुझे पूरी आशा है कि याचिका स्वीकार कर ली जायेगी और सीता माँ को विधिवत न्याय दिलवाने का प्रयास सफल हो पायेगा | याचिका को निरस्त करने का कोई आधार मुझे नहीं दिखाई पड़ता क्योंकि जब रामभगवान् के घर के लिए कोर्ट में केस चल सकता है, तब सीता जी को इन्साफ दिलाने के लिए क्यों नहीं ? और हो सकता है इसी बहाने श्रीराम के दर्शन भी हो जाएँ, वरना तो अभी तक केवल उनके एजेंट ही उनके नाम से सारा कारोबार संभाल रहे थे और लोगों को उन्हें देखने का अवसर कभी मिल ही नहीं पाया त्रेतायुग के बाद | यदि वे कोर्ट में उपस्थित हुए तो कम कम हम उनसे पूछ तो सकेंगे कि आपके नाम से बनी ये रंगबिरंगी सेनाओं के उत्पात से देश को कब मुक्ति मिलेगी ? हम पूछ तो सकेंगे कि इनको आपकी नाम से सेना बनाने का लाइसेंस किसने दिया जबकि इनमें आपके कोई गुण है ही नहीं ? हम पूछ तो सकेंगे उनसे कि आपके नाम से जो चंदा इकठ्ठा किया जाता है, चढ़ावा वसूला जाता है उसका कितना प्रतिशत आप तक पहुँचता है और आप उन पैसों का क्या करते हो स्वर्ग में क्या भारतीय करेंसी स्वर्ग में मान्य है ? हम पूछ तो सकते हैं उनसे कि गरीब लोग जब आपको अपने खून पसीने की कमाई से चढ़ावा चढाते हैं, तब आप उनकी नहीं सुनते, लेकिन जब कोई अमीर व्यक्ति देश और गरीबों को लूटकर आपको चढ़ावा चढ़ाता है, तब आप उनके हज़ारों, लाखों करोड़ का टैक्स और कर्जा माफ़ करवा देते हो…..ऐसा क्यों करते हो ? किसान आत्महत्या के लिए विवश हो रहा है, आदिवासी बेमौत मारे जा रहे हैं, बेघर हो रहे हैं, नक्सलवाद की भेंट चढ़ रहे हैं…. क्या आपको उनपर तरस नहीं आता ? क्या आप शबरी की भक्ति और बेर भूल गये ?

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ये सभी प्रश्न मेरे मन में भी है लेकिन किसी से कह नहीं सकता क्योंकि मैं तो अनपढ़ हूँ कोई मेरी बात पर गौर करेगा ही नहीं | इसलिए श्री राम जी जब कोर्ट में आयेंगे तब मैं उन्हीं से यह प्रश्न करूँगा | ~विशुद्ध चैतन्य

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